सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन, सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी जीत

 

लंबे समय से चली आ रही प्रणाली के अंतर्गत महिलाएं केवल 14 वर्ष तक ही सेवा में रह सकती थीं
शार्ट सर्विस कमीशन के तहत महिलाएं केवल 10 या 14 साल तक ही अपनी सेवाएं दे सकती हैं। इसके बाद वे सेवानिवृत्त हो जाती हैं। साल 1992 में शार्ट सर्विस कमीशन के लिए महिलाओं का पहला बैच भर्ती हुआ था। तब ये पांच साल के लिए हुआ करता था।

 भारतीय सेना में स्थायी कमीशन को लेकर 39 महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी जीत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार इन महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का आदेश जारी करे। दरअसल, लंबे समय से चली आ रही प्रणाली के अंतर्गत महिलाएं केवल 14 वर्ष तक ही सेवा में रह सकती थीं। इस कारण उन्हें पेंशन के साथ अन्य वित्तीय लाभों से वंचित कर दिया जाता था। साथ ही वे सेवानिवृत्ति से पहले ज्यादा से ज्यादा लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक तक ही पहुंच पाती थीं, लेकिन अब स्थायी कमीशन के तहत एक महिला अधिकारी तब तक पद पर बनी रहेगी, जब तक कि वह सेवानिवृत्त न हो जाए। स्थायी कमीशन में उन्हें पेंशन और सभी भत्ते भी मिलेंगे।

गौरतलब है कि शार्ट सर्विस कमीशन के तहत महिलाएं केवल 10 या 14 साल तक ही अपनी सेवाएं दे सकती हैं। इसके बाद वे सेवानिवृत्त हो जाती हैं। साल 1992 में शार्ट सर्विस कमीशन के लिए महिलाओं का पहला बैच भर्ती हुआ था। तब ये पांच साल के लिए हुआ करता था। इसके बाद इस सर्विस की अवधि को 10 साल के लिए बढ़ाया गया। साल 2006 में इस सेवा को 14 साल कर दिया गया। वहीं महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अधिकारियों को अधिक अधिकार प्राप्त हैं। शार्ट सर्विस कमीशन के 10 साल पूरे होने पर वे अपनी योग्यता के अनुसार, स्थायी कमीशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन महिलाएं ऐसा नहीं कर सकती थीं। वर्तमान में महिलाओं को शार्ट सर्विस कमीशन के जरिये सेना में भर्ती किया जाता है, जबकि पुरुष सीधे स्थायी कमीशन के जरिये भी भर्ती हो सकते हैं।

महिलाओं ने सेना में रहकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनको पुरुषों के समान अधिकार देना देश हित में होगा। दूसरे विश्व युद्ध में सैनिकों की कमी होने पर बहुत से देशों ने महिलाओं को सेना में शामिल किया था। 11 सितंबर, 2001 को न्यूयार्क में हुए आतंकी हमले के बाद अमेरिका और ब्रिटेन ने अफगानिस्तान और इराक में सेना भेजी थी। इन सेनाओं में महिलाओं की खास टुकड़ियां थीं, जिन्हें ‘फीमेल एंगेजमेंट टीम’ कहा जाता था।

अगर हम भारतीय सेना में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की बात करें, तो सेना में मेडिकल और नर्सिंग में महिलाओं का सिर्फ 11 फीसद प्रतिनिधित्व है, जबकि वायुसेना में 7.30 फीसद और नौसेना में 3.45 फीसद है। जब एक महिला सेना में अपना करियर चुनती है, तो वह कड़ी परीक्षाओं को पार करती है। ऐसे में उन्हें स्थायी कमीशन देना उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना है। महिलाएं स्थायी कमीशन के लिए चुने जाने पर फुल कर्नल, ब्रिगेडियर और जनरल भी बन सकती हैं। सेना के अंदर का पुरुषवादी वातावरण भी समाप्त होगा। साथ ही अन्य क्षेत्रों की तरह सेना में भी ज्यादा से ज्यादा महिलाएं आने के लिए इच्छुक होंगी।