खगोलीय घटनाओं से भरपूर होगा अक्‍टूबर, सूर्य के करीब पहुंचेगा मंगल, टूटते तारों से रंगीन नजर आएगा आसमान

 

खगोलीय घटनाओं से भरपूर होगा अक्‍टूबर, सूर्य के करीब पहुंचेगा मंगल, टूटते तारे से रंगीन नजर आएगा आसमान
अक्टूबर माह ग्रह-नक्षत्रों के खूबसूरत नजारे से गुलजार रहने वाला है। स्याह आसमान की सुंदरता में हमारी आकाशगंगा चार चांद लगाएगी तो टूटते तारों की बारिश रोमांच पैदा करेगी। इस बीच वीनस गुरू मंगल व शनि के दीदार होंगे तो इसी माह मंगल सूर्य के करीब पहुंचने जा रहा है।

 नैनीताल : अक्टूबर माह ग्रह-नक्षत्रों के खूबसूरत नजारे से गुलजार रहने वाला है। स्याह आसमान की सुंदरता में हमारी आकाशगंगा चार चांद लगाएगी तो टूटते तारों की बारिश रोमांच पैदा करेगी। इस बीच वीनस, गुरू, मंगल व शनि के दीदार होंगे तो इसी माह मंगल सूर्य के करीब पहुंचने जा रहा है।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ खगोल विज्ञानी डा. शशिभूषण पांडेय ने बताया कि मानसून के बाद आसमान की आभा निखर उठती है। जिस कारण प्रदूषणमुक्त रात के आसमान में ग्रहों नक्षत्रों को देख पाना आसान हो जाता है। इन दिनों पश्चिम के आकाश में वीनस को आसानी देखा जा सकता है, जो पूरे माह देखा जा सकेगा।

14 अक्टूबर को शनि चंद्रमा के साथ नजर आएगा तो 15 अक्टूबर की रात गुरू चांद के पहलू में सफर कर रहा होगा। इससे पूर्व आठ अक्टूबर का दिन खगोलीय घटनाओं में खास रहने वाला है, जब मंगल सूर्य के बेहद करीब जा पहुंचेगा। इस घटना को विज्ञानी कंजक्शन कहते हैं। दो साल में एक बार यह खगोलीय घटना होती है।

अगली बार 18 नवंबर 23 में वह सूर्य के नजदीक पहुंचेगा। दिन का समय होने के कारण इस घटना को नही देखा जा सकेगा। इसके बाद 21 को टूटते तारे यानी उल्कावृष्टि की आतिशी रिमझिम बरसात देखने को मिलेगी। यह नजारा बेहद रोमांचक रहने वाला है, जिसे भोर के समय बेहतर देखा जा सकेगा। यह आरिनिड मेटियोर शॉवर होगा, जो हेली कामेट यानी धूमकेतु के छोड़ी गई उल्काओं व धूल कंकड़ पृथ्वी की राह पर छोड़े जाने के कारण देखने को मिलती है।

इस पूरे माह हमारी अपनी आकाशगंगा को बेहतर देख पाने का सुनहरा मौका मिलता है। इन सभी आकाशीय घटनाओं को देखने के लिए अंधेरे स्थानों में पहुंचना होगा। पूरे साल में यही एक माह होता है, जब आकाशीय घटनाओं को देखने के लिए विज्ञानियों समेत खगोल प्रेमियों को इंतजार रहता है।

खगोलीय घटनाओं को देखने में विध्न डालता है प्रकाश प्रदूषण

एरीज के निदेशक प्रो दीपांकर बनर्जी का कहना है कि निसंदेह ग्रह तारों की भरी आसमान की दुनिया अनुठी है। मगर बढ़़ते विद्युत प्रदूषण के चलते खगोलीय घटनाओं को देख पाना जितना मुश्किल होते जा रहा है, विज्ञानियों को ऑब्‍जर्वेशन में भी उतनी ही दिक्कत आ रही है। प्रकाश प्रदूषण कम तो नहीं किया जा सकता, लेकिन बल्बों अथवा स्ट्रीट लाईट की रोशनी आसमान की ओर न जाए, इस तरह की विद्युत व्यवस्था करनी होगी। प्रकाश प्रदूषण को लेकर एरीज पिछले कई सालों से जागरूकता अभियान चला रहा है। जिसके तहत घरों के बाहर लगाए जाने वाले बल्बों के उपर शेड लगाकर रोशनी को आसमान में जाने से रोका जा सकता ह

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