गुरुनगरी अमृतसर में जरूर देखें अनोखा लंगूर मेला, लाल व सिल्वर गोटे के चाेले में बच्‍चे पेश करते हैं अद्भुत नजारा

 

अमृतसर के श्री बड़ा हनुमान मंदिर में नवरात्र पर अद्भूत लंगूर मेला लगता है। (फाइल फोटो)

पंजाब में गुरुनगरी अमृतसर में श्री दुर्ग्‍याणा तीर्थ स्थित श्री बड़ा हनुमान मंदिर में नवरात्रों में अनोखा लंगूर मेला लगता है। इस दौरान लाल और सिल्‍वर गोटे वाले चोले में सजे-धजे बच्‍चे अद्भूत नजारा पेश करते हैं।

अमृतसर।गुरुनगरी में श्री दरबार साहिब और श्री दुर्ग्‍याणा तीर्थ में काफी संख्‍या में लोग आते हैं। यहां नतमस्‍तक होने के बाद लोगों के आकर्षण केंद्र जलियांवाला बाग और अटारी बार्डर पर रिट्रीट सेरेमनी होती है। लेकिन, यदि आप नवरात्रों में गुरुनगरी आते हैं तो श्री बड़ा हनुमान मंदिर में लगने वाला अद्भूत श्री लंगूर मेला जरूर देखें। श्री दुर्ग्‍याणा तीर्थ में स्थिति इस मंदिर में लगने वाले श्री लंगूर मेला में लाल व सिल्‍वर गोटे वाले चोले में सजे-धजे हजारों बच्‍चे अनोखा नजारा पेश करते हैं। इस बार इस मेले में करीब पांच हजार बच्‍चे लंगूर बनेंगे।

लाल व सिल्वर गोटे वाला चोला, सिर पर टोपी हाथ पर छड़ी पकड़े पाव में छम-छम करती घुंघरू की आवाज के साथ ढोल की ताल पर झूमते व जय श्री राम के जयकारे लगाते बच्‍चे के साथ श्रद्धालु कल अद्भुत नजारा पेश करेंगे। यह श्री लंगूर मेला श्री दुर्ग्‍याणा तीर्थ परिसर में बने श्री बड़ा हनुमान मंदिर में शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन से लगता है। धार्मिक मान्‍यता है कि यह मंदिर रामायण कालीन है।jagran

श्री हनुमान जी की प्रतिमा के पास पूजा-अर्चना में शामिल होते लंगूर बने बच्‍चे। 

श्री दुर्ग्‍याणा तीर्थ के श्री बड़ा हनुमान मंदिर में कल से शुरू होगा श्री लंगूर मेला

कल से लगने वाले इस लंगूर मेले के लिए श्री दुर्ग्‍याणा तीर्थ कमेटी द्वारा व्‍यापक प्रबंध किए गए हैं। लंगूर मेले के प्रथम दिन वीरवार को श्री दुर्ग्‍याणा तीर्थ परिसर में बने बाहरी कंपलेक्स में 100 पंडितों का इंतजाम किया गया है जहां पर लंगूर बनने वाले बच्चों के माता-पिता द्वारा पंडितों से पूजा अर्चना करवाई जाएंगी।

इस बार बनेंगे 5000 से अधिक बच्चे

बताया जाता है कि इस बार 5000 हजार से अधिक बच्‍चे लंगूर बनेंगे। इस दौरान लंगूर बनने वाले बच्चों को मंदिर परिसर में स्‍नान करवाया जाएगा। उसके बाद पंडितों द्वारा पूरी धार्मिक परंपरा के अनुसार बच्चों को पहनाए जाने वाले वस्त्रों की पूजा अर्चना की जाएगी। उसके बाद बच्चों को वस्त्र पहनाए जाएंगे तथा 10 दिन तक धार्मिक परंपरा को निभाने का प्रण किया जाएगा।

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श्री लंगूर मेले में शामिल होते श्रद्धालु। 

मंदिर का इतिहास

श्री दुर्ग्‍याणा तीर्थ परिसर के नजदीक श्री बड़ा हनुमान मंदिर स्थित है। यह मंदिर श्री रामायण काल का बताया जाता है। मंदिर में श्री हनुमान जी की बैठी हुई अवस्था की प्रतिमा है। मान्यता है कि यह प्रतिमा श्री हनुमान जी ने स्वयं बनाई थी। लव कुश ने जब भगवान श्री राम की सेना के साथ युद्ध किया था, तब लवकुश ने इसी मंदिर में श्री हनुमान जी को वट वृक्ष से बांध दिया था। यह वटवृक्ष आज भी मंदिर में सुशोभित है।

मान्‍यता है कि जब हनुमान बंधन से मुक्त हुए तो श्रीराम ने उनको आशीर्वाद दिया। मान्‍यता है कि श्री राम ने कहा जो भी निसंतान दंपति इस मंदिर में सच्चे मन से संतान की प्राप्ति के लिए आराधना करेगा, उसकी मनोकामना पूरी होगी। यह ऐसा स्थान है, जहां पर श्री राम का उनके संतान के साथ मिलाप हुआ था। इस मंदिर में जिन परिवारों के घर संतान की प्राप्ति होती है। वह शारदीय नवरात्रों के दिनों में 10 दिनों तक अपने बच्चों को लंगूर बनाते हैं तथा 10 दिनों तक कठिन तपस्या में दो बार मंदिर में नतमस्तक होने आते करना होता है।

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मंदिर में श्री हनुमान जी का भव्‍य दरबार।

बच्‍चे ऐसे बनते हैं लंगूर

लंगूर मेले के दौरान लंगूर बनने वाले बच्चे तथा उनके माता-पिता को कई धार्मिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है । प्रथम दिन लंगूर बनने से पहले होने वाली पूजा में मिठाई, नारियल, दो पुष्प हार अर्पित करने होते हैं। इसके बाद पुजारी से आशीर्वाद लेकर बच्‍चे चाेला धारण करते हैं। फिर बच्‍चे व श्रद्धालु ढोल की थाप पर नाचते हैं और पूरा माहौल भक्तिमस हो जाता है। लंगूर बने बच्‍चों को प्रतिदिन दो समय माथा टेकना होता है। इसके अलावा जमीन पर सोना, जूते-चप्पल नहीं पहनना, चाकू की कटी हुई कोई चीज नहीं खाना आदि जैसे नियमों का भी लंगूर बने बच्‍चों और उनके माता-पिता को मानना पड़ता है। खानपान वैष्णो होता है। वहीं, लंगूर बने बच्‍चे अपने घर के अलावा किसी और के घर के अंदर नहीं जा सकते हैं।

इसके साथ ही लंगूर बनने वाला बच्चा सुई, धागे का काम और कैंची नहीं चला सकता। उसे 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। 10 दिन तक वह ठाकुर जी का सिमरन करता है। फिर, विजयदशमी को लंगूर बना बच्चा रावण व मेघनाद के पुतलों को तीर मारता है। अगले दिन छोटे हनुमान मंदिर में हनुमान जी के आगे नतमस्तक होकर अपना चोला उतार देता है।

 शनि की साढ़़े साती व ढैया में मिलती है राहत

मंदिर के पुजारियों के अनुसार , यह मान्‍यता भी है कि यदि किसी व्यक्ति को शनि की साढ़े साती या ढैया लगी हुइ्र है तो श्री बड़ा हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना करने से उसे राहत मिलती है। यहां श्री हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से शनि की साढ़े साती और ढ़ैया में होने वाले सभी कष्ट दूर होते हैं।

मंदिर में कपाट खुलने का समय

कपाट खुलने का समय लंगूर मेले के दौरान श्री बड़ा हनुमान मंदिर के कपाट प्रथम दिन रविवार को प्रातः 4:00 बजे खुल जाएंगे। यह दोपहर तक खुले रहेंगे, जब तक हर एक लंगूर बनने बच्‍चे का परिवार दरबार में नतमस्तक हो जाएगा। शाम को 4:00 बजे से 10:00 बजे तक कपाट खुले रहेंगे। आगामी दिनों में कपाट 5:00 बजे से लेकर दोपहर 1:15 बजे तक तथा शाम 3:00 बजे से लेकर रात 10:00 बजे तक माथा देखने के लिए खुले रहेंगे।

माथा टेकने के लिए रास्ता

लंगूर बनने वाले बच्चों व उनके परिवारों के लिए तथा बजरंगी सेना के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। लंगूर बनने वाले बच्चे व उनके माता-पिता माता शीतला मंदिर के जाने वाले रास्ते से श्री हनुमान मंदिर में प्रवेश करेंगे तथा बजरंगी सेना वाले श्री दुर्ग्‍याणा तीर्थ कार्यालय से लंगर हाल की ओर जाने वाले श्री रघुनाथ मंदिर से श्री बड़ा हनुमान मंदिर में प्रवेश करेंगे। बजरंगी सेना में इस बार 50 प्रतिशत कटौती की गई है। इस बार एक बजरंगी सेना में बनने वाले 11 मूर्तियां तथा 10 सेवादार होंगे।

श्री दुर्ग्‍याणा कमेटी ने किए है सभी प्रबंध पूरे

श्री दुर्ग्‍याणा कमेटी के प्रधान एडवोकेट रमेश शर्मा, महामंत्री अरुण खन्ना व श्री गिरिराज सेवा संघ चेयरमैन संजय शर्मा ने बताया ने कि श्री लंगूर मेले को लेकर सभी प्रबंध पूरे किए गए हैं। लंगूर मेले में बाहर से आने वाले लोगों के लिए धर्मशाला में विशेष प्रबंध किया गया है। इसके अलावा कोविड-19 को देखते हुए भी हर तरह के नियमों की पालना की जाएगी।

उन्होंने बताया कि इस बार करीब 5000 बच्चों के लंगूर बनने की संभावना है। लोगों की सुविधा के लिए चाय पानी में लंगर की व्यवस्था की गई है। लंगूर बनने वाले बच्चों व उनके परिवारों के लिए पूरे दिन धार्मिक नियम के अनुसार भोजन तैयार करवाया जाएगा। इसके अलावा सुरक्षा के भी प्रबंध किए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी हर तरफ नजर रखी जाएगी। सेवादारों की भी ड्यूटी लगाई गई है। पुलिस प्रबंध भी कड़े करने के लिए विभाग को लिखा गया है।