खेल में कमाएं नाम: जानें बच्चे कैसे प्रोफेशनल क्रिकेट में बना सकते हैं अपना करियर

 

आपमें क्रिकेट को लेकर जोश है, तो फिर आप भी बन सकते हैं प्रोफेशनल क्रिकेटर।
भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल भर नहीं है बल्कि यह उससे कहीं बढ़कर है। इसकी दीवानगी ऐसी है कि तकरीबन हर बच्चा एक दिन नीली जर्सी पहनने का सपना जरूर देखता है। आइपीएल के जरिए छोटे शहरों के क्रिकेटर सामने आकर राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन रहे हैं।

 एक समय अभिभावक चाहते थे कि उनका बच्चा पढ़ाई करके बड़ा नाम कमाए, लेकिन अब उनकी सोच बदलनी लगी है। आइपीएल जैसी लोकप्रिय लीग के जरिए जिस तरह छोटे शहरों के क्रिकेटर सामने आकर राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन रहे हैं, उससे दूसरे पैरेंट्स भी चाहने लगे हैं कि उनका बच्चा भी एक-न-एक दिन नीली जर्सी जरूर पहने। जानें बच्चे कैसे प्रोफेशनल क्रिकेट में अपने को आगे बढ़ाकर नाम कमा सकते हैं...

भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल भर नहीं है, बल्कि यह उससे कहीं बढ़कर है। इसकी दीवानगी ऐसी है कि तकरीबन हर बच्चा एक दिन नीली जर्सी पहनने का सपना जरूर देखता है। अब जब आइसीसी टी-20 वर्ल्ड कप की शुरुआत हो गई है, तो हर तरफ इसका जोश और उत्साह महसूस किया जा सकता है। भारत की इस वर्ल्ड कप टीम में कई खिलाड़ी (मोहम्मद शमी, ऋषभ पंत) ऐसे हैं, जो छोटे शहरों से निकलकर टीम का हिस्सा बने हैं। ये चीजें छोटे शहरों व गांवों में रहने वाले युवाओं को भी खूब आकर्षित करती हैं। आपमें क्रिकेट को लेकर जोश है, तो फिर आप भी बन सकते हैं प्रोफेशनल क्रिकेटर।

किस उम्र में करें शुरू

क्रिकेट में उम्र का बहुत बड़ा महत्व होता है। वैसे तो कोई भी किशोर-युवा 12 से 22 आयु वर्ग में भाग ले सकता है, लेकिन क्रिकेट एकेडमी में शामिल होने के लिए आदर्श आयु 6-9 वर्ष है। जो बच्चे कम उम्र में शुरू करते हैं, उन्हें बुनियादी बातों और क्रिकेट के नियमों का अच्छा ज्ञान होता है। भारतीय क्रिकेट में विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर जैसे महान नामों ने बहुत कम उम्र (लगभग 8-9) से पेशेवर क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। हालांकि हर आयु वर्ग के लिए प्रतियोगिता का स्तर अलग होता है। कई बार ऐसा भी होता है कि कई खिलाड़ी छोटे आयु वर्ग के खिलाड़ियों के साथ खेलने के लिए अपनी रजिस्टर आयु भी कम कर देते हैं। यह उन्हें युवा खिलाड़ियों से बीच तो बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करता है, लेकिन यह पूरी तरह से अवैध है। सच्चाई सामने आने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। देखा जाए, तो क्रिकेट में मूल रूप से चार तरह के खिलाड़ी होते हैं। बल्लेबाज, गेंदबाज, विकेटकीपर और आलराउंडर। आपको शुरुआत में ही अपनी भूमिका तय करने की जरूरत नहीं है। लेकिन सबसे ज्यादा क्या पसंद है, उस हिसाब से प्रैक्टिस के दौरान फोकस कर सकते हैं।

क्रिकेटर बनने की आवश्यक शर्तें

एक पेशेवर क्रिकेटर बनना कोई आसान काम नहीं होता है। अच्छा खेलने के साथ-साथ कुछ अन्य कौशल भी आपमें होना चाहिए :

प्रैक्टिस: पेशेवर स्तर का खिलाड़ी बनने के लिए आपको खूब अभ्यास करना होगा और हमेशा खेल के स्तर को बढ़ाने के लिए प्रयास करते रहना होगा।

बुनियादी ज्ञान: बल्ले और गेंद का उपयोग कैसे किया जाता है, आपके लिए केवल इतना ही काफी नहीं है। आपको क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न शब्दों, डिवाइस और खेल के नियमों की बुनियादी समझ भी होनी चाहिए।

क्षमता को पहचानना: आपको यह जानने की जरूरत है कि आप खेल के किस हिस्से में अच्छे हैं। अभ्यास के साथ सीखेंगे कि अच्छे गेंदबाज हैं या फिर अच्छे बल्लेबाज। फिर उस हिसाब से अपने कमजोर पहलुओं को सुधारने का प्रयास करना होगा।

क्रिकेट एकेडमी को करें ज्वाइन

भारतीय टीम या आइपीएल की जर्सी की ख्वाहिश रखते हैं, तो क्रिकेट एकेडमी को ज्वाइन करने से काफी मदद मिल सकती है। पेशेवर कोच न सिर्फ आपको बेहतर खिलाड़ी बनाने में मदद करेंगे, बल्कि खेल में होने वाले जोखिम से भी परिचित कराएंगे। दैनिक अभ्यास के साथ क्रिकेट एकेडमी के प्रभावी टिप्स और ट्रिक्स पर पर्याप्त समय देना होगा। सही क्रिकेट एकेडमी आपको अपनी ताकत को बेहतर तरीके से प्रदर्शित करने के साथ कमजोरियों को दूर करने में भी मदद करेगी। पेशेवर एकडेमी की अच्छी बात यह होती है कि आप अपनी और प्रतिस्पर्धी टीम के साथियों से घिरे रहेंगे, जो आपको हर दिन बेहतर परफार्म करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

करें सही कोच की तलाश

क्रिकेट खिलाड़ियों के अपने कोच के साथ मधुर संबंध होते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि क्यों? ऐसा इसलिए है कि कोच न केवल आपको निखारने का काम करते हैं, बल्कि अपनी सीमाओं से परे भी धकेलते हैं ताकि हर कोई आपके छिपे हुए कौशल को देख सके। अपने कोच का चयन करते समय पूरी तरह से पृष्ठभूमि की जांच करें और फिर तय करें कि किसे चुनना है। अक्सर रिटायर्ड क्रिकेटर एकेडमी में स्वतंत्र रूप से कोच के रूप में सेवाएं देते हैं। लेकिन जो एकेडमी ज्वाइन करने जा रहे हैं, उसके बारे में कुछ चीजों को जान लें...

- एकेडमी या क्लब के कितने खिलाड़ी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं या खेले हैं?

- कोच की पृष्ठभूमि, उनकी पहुंच और संपर्क कहां तक है।

- एक महीने में अन्य टीमों (अन्य क्लब या एकेडमी) के साथ कितने मैच खेले जाते हैं।

आपके बता दें कि हर पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ी किसी न किसी एकेडमी में सीखा और अभ्यास किया होता है। सीधे स्टेट या नेशनल लेवल टीम में एंट्री करना लगभग असंभव है। कई रिटायर्ड और वर्तमान खिलाड़ियों की भी अपनी खेल अकादमियां हैं।

जिला टीम में चयन

पेशेवर क्रिकेटर के रूप में आगे बढ़ने के लिए प्रोफेशनल टीम के साथ खेलना जरूरी है। स्कूल या कालेज क्रिकेट टीम का हिस्सा होने से आपको आगे बढ़ने में आसानी होगी। फिर उस टीम के लिए खेलना शुरू कर सकते हैं, जो विभिन्न निजी क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलती है। आप किसी ऐसे क्लब के लिए खेलना शुरू कर सकते हैं, जो प्रसिद्ध हों। किसी लोकप्रिय क्रिकेट क्लब में चयनित होने के लिए क्लब की बुनियादी योग्यताओं को पूरा करना होता है। इसके बाद अगला लक्ष्य जिला टीम में चयन का होना चाहिए। प्लेइंग-11 में जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी और ट्रायल में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। वहां आपके जैसे बहुत सारे युवा होंगे। अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में एक वर्ष या उससे कम अनुभवी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए आप 14 साल के हैं और अंडर-16 के लिए ट्रायल दे रहे हैं, तो ऐसे लोग होंगे जिनके पास आपसे एक साल या अधिक का अनुभव होगा। एक बार जब चयन हो जाता है, तो फिर प्रदर्शन ही सब कुछ होता है। प्रदर्शन अच्छा होगा, तो अगले लेवल के लिए कोशिश कर सकते हैं। साथ ही, जिला टीम के लिए अपने प्रदर्शन के आधार पर कुछ छात्रवृत्ति प्राप्त करने का भी प्रयास कर सकते हैं।

स्टेट टीम का हिस्सा

चूंकि अपनी जिला टीम में चुने गए हैं, इसलिए प्रदर्शन पर फोकस करना है और चयनकर्ताओं की नजर में आना है। यह स्टेट लेवल टीम की प्लेइंग-11 में जगह बनाने का सबसे अच्छा तरीका है। ट्रायल के लिए भी जा सकते हैं, जो तीन महीने में एक बार होता है। अगर स्टेट टीम का हिस्सा बन जाते हैं, तो फिर रणजी ट्राफी, दलीप ट्राफी, विजय हजारे ट्राफी आदि जैसे प्रथम श्रेणी के राष्ट्रीय टूर्नामेंट में प्रतिस्पर्धा करेंगे। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को उनके क्षेत्र के अनुसार सरकारी नौकरी भी मिलती है।

राष्ट्रीय टीम में चयन

क्रिकेट में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले सभी राष्ट्रों की अपनी राष्ट्रीय टीम के साथ एक ए-टीम भी होती है। अपने देश की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने के लिए पहले ए-टीम का सदस्य बनना आवश्यक है, हालांकि यह अनिवार्य नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ए-टीम का हिस्सा बनने का मौका दिया जाता है। सभी देशों की ए-टीम एक-दूसरे के साथ खेलते हैं ताकि संभावित क्रिकेटरों को विदेशी पिच पर खेलने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके। राष्ट्रीय टीम में पहुंचना काफी मेहनत का काम है। मगर आजकल कई दूसरे विकल्प भी खुल गए हैं। आप आइपीएल जैसे लीग में फ्रैंचाइजी टीम की तरफ से खेल सकते हैं या फिर विभिन्न देशों में आयोजित होने वाली लीग का हिस्सा बन सकते हैं। कुछ प्रमुख क्रिकेट लीग जिनमें खिलाड़ी जाते हैं, उनमें आइपीएल के अलावा, काउंटी क्रिकेट इंग्लैंड, बीबीएल आस्ट्रेलिया आदि हैं।

फिटनेस पर करें काम

क्या आपने कभी जिम में विराट कोहली को वर्कआउट करते हुए देखा है? क्या आप जानते हैं कि रविंद्र जडेजा योयो टेस्ट में इतना बेहतरीन प्रदर्शन कैसे करते हैं? दोनों सवालों का जवाब एक ही है यानी सही व संतुलित आहार का सेवन और नियमित एक्सरसाइज। शारीरिक तौर पर फिट रहना बेहद जरूरी है। बेसिक कार्डियो से लेकर हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट को अपनी दिनचर्या का बनाना होगा। अगर संतुलित आहार पर ध्यान नहीं देंगे, तो फिर अच्छा नहीं खेल पाएंगे। साथ ही, अनावश्यक कार्बोहाइड्रेट का सेवन बंद करना होगा और प्रोटीन के सेवन पर जोर देना होगा। यह कदम एक क्रिकेटर बनने के लिए सबसे जरूरी है। यह केवल शुरुआती चरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि फिजिकल फिटनेस को बनाए रखना प्रत्येक क्रिकेटर की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।

खुद पर रखें यकीन

एक अच्छा क्रिकेटर बनने के लिए बहुत जरूरी है कि खुद पर यकीन रखें, परिणाम निश्चित रूप से अच्छे आएंगे। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई खिलाड़ी मुश्किलों से लड़कर सितारे बनकर उभरे हैं।

उमेश यादव: कोयला खनिक के पुत्र

रविंद्र जडेजा : प्राइवेट सिक्योरिटी फर्म में काम करने वाले के पुत्र

मोहम्मद शमी: किसान का पुत्र

मुनाफ पटेल : फैक्ट्री मजदूर के पुत्र

महेंद्र सिंह धौनी: टिकट कलेक्टर के रूप में काम किया

वसीम जाफर : बस चालक के पुत्र

वीरेंद्र सहवाग: अभ्यास करने के लिए रोजाना 84 किमी. का सफर तय करते थे।

क्रिकेट एकेडमी न हो तो...

अगर आपके आसपास कोई क्रिकेट एकेडमी नहीं है, तो फिर खेल की बारिकियों को सीखने के लिए आनलाइन प्लेटफार्म की मदद ले सकते हैं :

क्रिकुरुः अगर आसपास कोई क्रिकेट सिखाने वाला न हो, तो फिर यह एप काम का हो सकता है। इसे वीरेंद्र सहवाग और संजय बांगड़ ने मिलकर तैयार किया है। यहां पर वीरेंद्र सहवाग के साथ ब्रायन लारा जैसे महान खिलाड़ियों से क्रिकेट के बेसिक्स को सीख पाएंगे। इसे टियर-2 और 3 शहरों में रहने वाले युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें कोच के रूप में एबी डिविलियर्स, ब्रायन लारा, क्रिस गेल, ड्वेन ब्रावो, हरभजन सिंह और जोंटी रोड्स जैसे पूर्व दिग्गज क्रिकेटर शामिल हैं।

क्रिकेटस्ट्राक्सः युवाओं को क्रिकेट सिखाने में लिए लोकप्रिय पूर्व बल्लेाज कृष्णामचारी श्रीकांत का यह प्लेटफार्म काफी लोकप्रिय है। यहां से बेसिक्स को सीखने के साथ -साथ क्रिकेट से जुड़े टिप्स लिए जा सकते हैं। क्रिकेटस्ट्राक्स साइट पर बालिंग, बैटिंग, कीपिंग, कैचिंग, फिटनेस और ट्रेनिंग की जानकारी हासिल कर सकते हैं। बैटिंग कर रहे हैं, तो स्क्वायर कट, पुल शाट के अलावा बैटिंग ग्रिप, गार्ड और बैटिंग स्टेंस के बारे में भी जान सकते हैं। इस खेल से जुड़े तमाम वीडियोज की मदद से सीखना आपके लिए आसान हो सकता है।

सही आयु में प्रशिक्षण रहेगा फायदेमंद

जिन बच्चों को क्रिकेट खेलने का शौक अथवा जुनून होता है, उन्हें आमतौर पर छह-सात वर्ष की आयु से ही कोच से प्रशिक्षण लेना शुरू कर देना चाहिए। अगर समय से कदम उठाए जाएं, तो 12 वर्ष की आयु में बच्चा अंडर-14 खेलने के लिए तैयार हो जाता है। वैसे, क्रिकेट एक टीम स्पोर्ट्स है, जो काफी मेहनत की मांग करता है। इसलिए बच्चों को अभिभावक, स्कूल प्रबंधन एवं कोच के सहयोग एवं प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। इसमें बच्चे का अपना जुनून काफी मायने रखता है, चाहे वह गांव के बच्चे ही क्यों न हों। उनकी क्षमता को कहीं से कमतर नहीं आंका जा सकता है। शहरी बच्चों की अपेक्षा वे मानसिक रूप से कहीं अधिक मजबूत होते हैं। खेल के प्रति एकाग्रता एवं फोकस भी अच्छा रहता है। 2019 से मैंने एक मुहिम चला रखी है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण परिवेश के बच्चों-किशोरों (11 से 16 वर्ष की आयु) के लिए निश्शुल्क ट्रायल आयोजित कराया जाता है। हर वर्ष 400 से 500 बच्चों के आवेदन आते हैं। इनमें से हम चार बच्चों का चयन कर उन्हें निश्शुल्क कोचिंग आदि देते हैं। अगर अन्य लोग व संस्थाएं भी ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रायल कैंप लगाएं, तो हमें अच्छे टैलेंट मिल सकते हैं। जहां तक क्रिकेट में आगे बढ़ने की बात है, तो उत्तर प्रदेश में बच्चे को पहले जिला स्तर पर खेलना होता है, जिसके लिए बकायदा फार्म भरे जाते हैं। उसके बाद सात-आठ टीम बनाकर ट्रायल होता है। मैचेज होते हैं। यहां से जोन लेवल के लिए चयन होता है। उम्दा प्रदर्शन करने वालों का कानपुर में ट्रायल होता है। वहीं से राज्य स्तर की टीम के लिए खिलाड़ियों का चयन होता है। (फूलचंद शर्मा, वरिष्ठ क्रिकेट कोच)

प्रमुख क्रिकेट अकादमी

- राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी, बेंगलुरु

- कर्नाटक इंस्टीट्यूट आफ क्रिकेट, बेंगलुरु

- सहवाग क्रिकेट अकादमी, झज्जर

- मदन लाल क्रिकेट अकादमी, दिल्ली

- जयपुर क्रिकेट अकादमी, जयपुर

- नेशनल स्कूल आफ क्रिकेट, देहरादून

- वीबी क्रिकेट अकादमी, चेन्नई

- वेंगसरकर क्रिकेट अकादमी (वीसीए), मुंबई

- एलबी शास्त्री क्रिकेट अकादमी, दिल्ली

- सानेट क्रिकेट क्लब, दिल्ली