यहां बच्चों के बीमार होने पर रावण को बांधते हैं मन्नत का धागा, दशहरा पर होती है मूर्ति की पूजा

 

मंदसोर में बच्चों के बीमार होने पर रावण को बांधते हैं मन्नत का धागा। फाइल फोटो
Dussehra 2021 मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में 400 साल पुरानी 41 फीट ऊंची रावण की मूर्ति के पैर में धागा यानी रक्षा सूत्र बांधकर बच्चों की बीमारी ठीक होने की मन्नत मांगी जाती है। स्वस्थ होने पर रावण की मूर्ति के सामने दीपक जलाकर रक्षा सूत्र खोल दिया जाता है।

मंदसौर, जेएनएन। मध्य प्रदेश के मंदसौर में नामदेव छीपा समाज मंदोदरी को बेटी और रावण को दामाद मानकर पूजा करता है। यहां के खानपुरा क्षेत्र में करीब 400 साल पुरानी 41 फीट ऊंची रावण की मूर्ति के पैर में धागा यानी रक्षा सूत्र बांधकर बच्चों की बीमारी ठीक होने की मन्नत मांगी जाती है। यहां बच्चों के स्वस्थ होने पर रावण की मूर्ति के सामने दीपक जलाकर रक्षा सूत्र खोल दिया जाता है। प्राचीन साहित्य व कई अभिलेखों में मंदसौर यानी दसपुर का उल्लेख मिलता है। यहां के लोग मानते हैं कि रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका मंदसौर था। हालांकि, इतिहासकार मंदोदरी के वर्तमान मंदसौर से किसी भी तरह के संबंध के साक्ष्य की पुष्टि नहीं करते हैं। मंदसौर में रावण की मूर्ति क्यों बनीं, इसका भी कोई दस्तावेज नहीं है।

यहां होती है रावण की पूजा

नामदेव छीपा समाज के बुजुर्ग कहते हैं कि मंदोदरी की वजह से ही इसका नाम मंदसौर है। विजयदशमी पर देशभर में भले ही रावण का पुतला जलाकर बुराई का अंत किया जाता है, लेकिन मंदसौर में रावण की पूजा की जाती है। रावण को दामाद मानने की प्रचलित मान्यता के कारण ही नामदेव छीपा समाज सहित कई अन्य समाज की बुजुर्ग महिलाएं अब भी रावण की मूर्ति के सामने से निकलते वक्त घूंघट निकालती है। यहां पर दशहरा के दिन सुबह नामदेव छीपा समाज के लोग खानपुरा के बड़ा लक्ष्मीनारायण मंदिर से ढोल लेकर रावण की मूर्ति की पूजा-अर्चना करते हैं। राजेश नामदेव के मुताबिक, समाज के लोग रावण से क्षेत्र को बीमारी और महामारी से दूर रखने की प्रार्थना करते हैं। रावण की मूर्ति के पैर में मन्नत का रक्षा सूत्र भी बांधा जाता है। गोधूलि बेला में रावण की मूर्ति की पूजा कर वध के लिए क्षमा मांगते हैं। यहां विजयदशमी पर दूर-दराज से काफी लोग आते हैं। इस वजह से यहां काफी भीड़ रहती है। यहां का दशहरा प्रदेश के साथ देश में भी चर्चित है।