कविता पाठ के स्टाइल से एक स्टूडेंट ने कवि कुमार विश्वास का मनमोहा, फिर ऐसा मिला आशीष

 

कुमार विश्वास ने कहा कि सभी युवा व्हाटस अप विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ रहे। कुछ सचमुच में पढ़-समझ रहे हैं।
देश दुनिया में जैसे-जैसे इंटरनेट मीडिया का प्रचार प्रसार बढ़ा है लोगों की याद करने की क्षमताएं और पढ़ने की ललक खत्म सी हो गई है। ऐसे में अब तमाम जगहों पर कुछ याद किया हुआ सुनने और देखने को नहीं मिलता है।

नई दिल्ली, विनय तिवारी। देश दुनिया में जैसे-जैसे इंटरनेट मीडिया का प्रचार प्रसार बढ़ा है, लोगों की याद करने की क्षमताएं और पढ़ने की ललक खत्म सी हो गई है। ऐसे में अब तमाम जगहों पर कुछ याद किया हुआ सुनने और देखने को नहीं मिलता है। कुछ खास मौकों को छोड़ दें तो ऐसे दृश्य यदा कदा ही सामने आते हैं। आज हर एक के हाथ में हाइ फाइ मोबाइल है और वो ही उनकी याददाश्त और खोजने, सुनने का सबसे बड़ा माध्यम है। युवा पीढ़ी मोबाइल में व्हाट्सअप ग्रुप पर चैट करने में लगी रहती है तो बच्चे अपना कार्टून देखने में मस्त रहते हैं। किताबों और पशु पक्षियों से इनका याराना एकदम खत्म सा हो गया है। मोबाइल ने किसी चीज को याद करने की ललक ही खत्म कर दी है।

शनिवार को दो अक्टूबर को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती थी, ऐसे में एक स्टूडेंट सुधाशुं का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ। कुट्ज नामक ट्विटर हैंडल से इसे ट्वीट किया गया था। कवि कुमार विश्वास ने भी इस दो मिनट 20 सेकंड के वीडियो को देखा और कमेंट किया। दो मिनट 20 सेकंड के इस वीडियो में देखने को मिला कि स्कूल की ड्रेस में एक स्टूडेंट सुधाशुं किस ओजस्विता के साथ कविता पाठ कर रहा है। वो कवि दिनकर की एक कविता बड़े ही मनमोहक अंदाज में पढ़ता है, सुधाशुं के उस वीडियो को देखने के बाद कवि कुमार विश्वास ने भी उसे रिट्वीट किया और लिखा है कि सभी युवा व्हाटस अप विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ रहे। कुछ सचमुच में भी पढ़-समझ रहे हैं। जीते रहिए सुधांशु, भारत को आप सब की पीढ़ी से बेहद आशाएँ हैं।माँ भारती कृपा करे

आज के दौर में यदि कोई स्टूडेंट किसी स्वतंत्रता सेनानी या किसी पुराने लेखक की कोई कविता मंच से पुरी भाव भंगिमा के साथ सुनाता है तो सहसा आश्चर्य होना लाजिमी भी है। कोरोनाकाल के बाद से अब तक स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई नियमित नहीं हो पाई है। बच्चे घरों में कैद है वो आनलाइन ही पढ़ाई लिखाई कर रहे हैं, अपने सहपाठियों के साथ मिले और उनके साथ मस्ती किए हुए एक लंबा समय बीत चुका है, माता-पिता भी बच्चों के घर में कैद होने से परेशान है, वो भी चाहते हैं कि बच्चा घर से बाहर निकले, स्कूल कालेज जाए तो उसका भी थोड़ा मन बहल जाए। स्कूल-कालेज जाने से अन्य बहुत सी जानकारियां भी मिल पाती है जो आनलाइन किसी भी तरह से संभव नहीं है। खैर आज के समय में बच्चों को पुराने कवियों की कविता और अन्य चीजों से लगाव कम ही देखने को मिलता है। ऐसे में यदि कोई स्टूडेंट पुराने कवि की कविता को अंदाज से सुनाता है तो उसकी तारीफ तो होनी ही चाहिए।