आत्महत्या पर बीमा दावे को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए राजी, जानें क्या है पूरा मामला

 

एनसीडीआरसी ने बीमा कंपनी को मृतक की पत्नी को 13.48 लाख रुपये देने का दिया है निर्देश

सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने 20 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा नोटिस जारी किया जाता है जिस पर आठ हफ्तों के भीतर जवाब आना चाहिए। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आदेश पर रोक रहेगी ।

नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट एक बीमा कंपनी की उस अपील पर सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है जिसमें उसने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के एक आदेश को चुनौती दी है। एनसीडीआरसी ने उसे एक महिला को 13.48 लाख रुपये देने का निर्देश दिया था जिसके पति ने आत्महत्या कर ली थी।

रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह बीमा नीति के दायरे से बाहर है।

एनसीडीआरसी के आदेश पर रोक लगाते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्‍‌ना की पीठ ने बीमा कंपनी के शाखा प्रबंधक की ओर से दायर अपील पर महिला को नोटिस जारी किया।

पीठ ने 20 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा, 'नोटिस जारी किया जाता है, जिस पर आठ हफ्तों के भीतर जवाब आना चाहिए। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आदेश पर रोक रहेगी।'

पूरे मामले पर बीमा कंपनी की ओर से पेश हुए वकील ने रखी अपनी शर्तें

बीमा कंपनी की ओर से पेश हुए वकील ने पीठ के समक्ष कहा कि बीमा नीति की धारा नौ और धारा 12 की सामान्य शर्तों में कुछ चीजों के बाहर रहने के मद्देनजर नीति शुरू होने की तारीख से 12 महीनों के भीतर किसी बीमाधारक द्वारा आत्महत्या करने पर कोई धनराशि का भुगतान नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह नीति 28 सितंबर, 2012 को चालू हुई थी और प्रीमियम न देने के कारण 28 सितंबर, 2013 को इसकी अवधि खत्म हो गई। 25 फरवरी, 2014 को फिर से बीमा नीति बहाल की गई और 30 जून, 2014 को आत्महत्या से मौत हुई यानी कि नीति बहाल होने के 12 महीनों के भीतर।

जब बीमा कंपनी ने बीमा राशि का भुगतान करने से इन्कार कर दिया तो मृतक की पत्‍‌नी ने जिला फोरम का रुख किया जहां कंपनी को उसे 13.48 लाख रुपये देने का निर्देश दिया गया।