केरल-कर्नाटक और तमिलनाडु में बाढ़ की चेतावनी, तीनों राज्यों के लिए जारी हुआ रेड और आरेंज अलर्ट

केरल-कर्नाटक और तमिलनाडु में बाढ़ की चेतावनी, तीनों राज्यों के लिए जारी हुआ रेड और आरेंज अलर्ट
केरल कर्नाटक और तमिलनाडु में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने मंगलवार को केरल में एक नदी के लिए रेड अलर्ट और कर्नाटक- तमिलनाडु में स्थित पांच अन्य नदियों के लिए आरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

नई दिल्ली, आइएएनएस। केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने मंगलवार को केरल में एक नदी के लिए रेड अलर्ट और कर्नाटक- तमिलनाडु में स्थित पांच अन्य नदियों के लिए आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बता दें कि बीते दिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भारी बारिश दर्ज की गई। यहां पर एयरपोर्ट पर भी पानी भर गया, जिसके चलते लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

गरज के साथ बिजली भी गिरने के आसार

भारत मौसम विज्ञान विभाग ( India Meteorological Department) ने पिछले 24 घंटों में सुबह 8.30 बजे तक केरल और माहे में अलग-अलग स्थानों सहित तमिलनाडु में भारी बारिश दर्ज की है। इसके साथ ही मौसम विभाग की तरफ से अंडमान निकोबार में भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है। उधर,कर्नाटक, तमिलनाडु में भी भारी बारिश के आसार बने हुए हैं। मौसम विभाग की तरफ से कहा गया कि गरज के साथ बिजली भी गिर सकती है।

यहां पर जारी हुए अलर्ट

कर्नाटक के अलावा केरल के कोल्लम, पथनमथिट्टा, कोट्टायम, अलाफुजा, अर्नाकुलम और इडुक्की जिलों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ओर से इन शहरों के लिए आरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। वहीं त्रिशूर, पलक्कड, मलप्पुरम, कोझीकोड, वायनाड, कन्नूर और कासारगोड जिलों में भी हल्की बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी हुआ है।

इन राज्यों में बरसेंगे मेघा

इसके अलावा मौसम विभाग ने कहा कि झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों से दक्षिण पश्चिम मानसून पूरी तरह वापस हो गया है। इसके अलावा अगले तीन दिनों तक गोवा और कोंकण में भी गरज के साथ बारिश के आसार हैं।

वहीं झारखंड के मध्य उत्तर पूर्वी और दक्षिण भाग में 14 अक्टूबर को बारिश की संभावना है। रांची में लोकल क्लाउड फार्मेशन के कारण कल शाम के बाद मौसम में बदलाव की संभावना है। अंडमान समुद्र और बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है।