कांग्रेस में एकबार फिर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग जोर पर, सिद्धारमैया का समर्थन


राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग फिर से उठी।(फोटो: फाइल)
कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर से राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। फिलहाल सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष हैं। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया का मिला समर्थन।

बेंगलुरू, एएनआइ। कांग्रेस में एक बार फिर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। फिलहाल सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष हैं। पार्टी के कई शीर्ष नेता नेतृत्व व पार्टी के फैसलों को लेकर सवाल उठा चुके हैं। बता दें कि महामारी के बाद से कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव अटका पड़ा है।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने पार्टी के नेता राहुल गांधी को अपना समर्थन दिया जबकि राहुल गांधी द्वारा पार्टी अध्यक्ष का पद संभालने की उनकी लंबे समय से मांग थी।

विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने सोमवार को बेंगलुरु में कहा कि मैं लंबे समय से कह रहा हूं कि राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए। मैं उनसे जल्द से जल्द कार्यभार संभालने का आग्रह करता हूं।

कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से आग्रह किया है कि उन्हें जितनी जल्दी हो सके, पार्टी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी की सेहत ठीक नहीं है, इसलिए राहुल को पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए।उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सोनिया जी अध्यक्ष के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं। सोनिया जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। इसलिए मैंने राहुल जी को जल्द से जल्द पदभार संभालने का सुझाव दिया।

बंगलूरू में एक कार्यक्रम के मौके पर पत्रकारों से चर्चा में सिद्धारमैया ने कहा, 'मैंने राहुल जी को सुझाव दिया है कि उन्हें अभा कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बन जाना चाहिए। ऐसा नहीं है कि सोनिया जी अध्यक्ष के रूप में कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रही हैं, बल्कि उनकी सेहत अच्छी नहीं है। इसलिए मैंने राहुल जी को सुझाव दिया था कि जितनी जल्दी संभव हो आप नेतृत्व संभालिये।'

कर्नाटक को ज्यादा कोयले की जरूरत नहीं

कर्नाटक में कोयले की कमी के सवाल पर सिद्धारमैया ने कहा कि केंद्र पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कोई कमी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जब राज्य में अक्षय ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है तो कर्नाटक को इतने कोयले की आवश्यकता नहीं है।