ग्रेटर नोएडा में कितने लाख करोड़ का हुआ है भूखंड आवंटन घोटाला, पढ़िए अन्य डिटेल

नोएडा ग्रेटर नोएडा में सबसे बड़ा भूखंड आवंटन घोटाला हुआ है।
नोएडा ग्रेटर नोएडा में सबसे बड़ा भूखंड आवंटन घोटाला हुआ है। इसकी अनुमानित लागत दो लाख करोड़ से कहीं अधिक है। इस घोटाले को अंजाम देने के लिए नोएडा ग्रेटर नोएडा में किसानों की जमीन हासिल करने के लिए दो बार अर्जेंसी क्लाज लगाया गया।

नोएडा। देश का सबसे बड़ा घोटाला कोल आवंटन माना जाता है, लेकिन नोएडा ग्रेटर नोएडा में सबसे बड़ा भूखंड आवंटन घोटाला हुआ है। इसकी अनुमानित लागत दो लाख करोड़ से कहीं अधिक है। इस घोटाले को अंजाम देने के लिए नोएडा ग्रेटर नोएडा में किसानों की जमीन हासिल करने के लिए दो बार अर्जेंसी क्लाज लगाया गया। किसानों को जनहित व औद्योगिक विस्तार का हवाला देकर जमीन हासिल की गई। नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन चेयरमैन व सीईओ मोहिंदूर सिंह तैनात रहे, जबकि नोएडा में तत्कालीन ओएसडी का चार्ज यशपाल सिंह के पास रहा। इसके बाद किसानों के साथ धोखाकर औद्योगिक विस्तार के नाम पर हासिल की गई जमीन को मोहिंदूर सिंह और यशपाल सिंह ने बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से नोएडा एक्सटेंशन के नाम पर बिल्डरों को कौड़ियों के भाव जमीन आवंटित कर दी, जबकि नोएडा का विस्तार तो हुआ ही नहीं।

जमीन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में थी, लेकिन नोएडा के नाम पर ही निवेश आ सकता था, इसलिए नोएडा एक्सटेंशन नाम रखा गया। यहीं नहीं नोएडा में दो लाख वर्ग मीटर जमीन किसानों से जो ली गई, उस पर 168 फार्म हाउस काटकर नौ हजार वर्ग मीटर विकसित दर आने के बावजूद 3100 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अपने चहेतों को फार्म हाउस बांट दिए गए। हैरानी की बात यह रही कि इस घोटाला की आवाज को वर्ष 2011 में तत्कालीन भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने बुलंद ही नहीं किया, बल्कि पूरे प्रकरण की फाइल को जांच के लिए आयकर विभाग को सौंप दिया, लेकिन जांच व कार्रवाई के नाम पर आज तक कुछ नहीं किया गया। आज भी यह फाइल विभाग में धूल फांक रही है। जबकि फाइल में यादव सिंह समेत 13 बिल्डरों के नाम शामिल हैं।

स्पष्ट किया गया था कि कैसे-कैसे बिल्डरों को जमीन आवंटन कर राशि ली गई, किन कंपनियों के माध्यम से भूखंड का पैसा विदेशों को ट्रांसफर किया गया। किन विदेशी कंपनी के माध्यम से यह पैसा देश में वापस आया और एक नंबर की रकम में दिखाया गया। यह पूरा खेल बाकायदा तीन सौ सेल कंपनियों के जरिये किया गया, जिसमें शेयर की दर को आर्टिफिशियल तरीके से बढ़ाया और उसके बाद 25 से 30 कंपनियों में पूरी रकम को कनवर्ट कर लिया गया।

नोएडा ग्रेटर नोएडा के चेयरमैन कम सीईओ मोहिंदूर सिंह और नोएडा प्राधिकरण ओएसडी यशपाल सिंह का भूखंड आंवटन में एक छत्र राज रहा। यशपाल सिंह औद्योगिक, संस्थागत, ग्रुप हाउसिंग, वाणिज्यक, होटल तक की जमीन का भूखंड आवंटन खुद करते थे, जिस पर मोहिंदूर सिंह मुहर लगाते थे।

इन सबकी निकली मिलीभगत

सेवारत अधिकारी

मुकेश गोयल- तत्कालीन नियोजन सहायक,


ऋतुराज व्यास- तत्कालीन सहयुक्त नगर नियोजक,

अनीता- तत्कालीन प्लानिंग असिस्टेंट,

विमला सिंह- सहयुक्त नगर नियोजक।

सेवानिवृत्त अधिकारी :

मोहिंदूर सिंह- तत्कालीन सीईओ नोएडा,

एसके द्विवेदी- तत्कालीन सीईओ नोएडा,

आरपी अरोड़ा- तत्कालीन अपर सीईओ नोएडा,

यशपाल सिंह- तत्कालीन विशेष कार्याधिकारी,

एके मिश्र- तत्कालीन नगर नियोजक,

राजपाल कौशिक- तत्कालीन वरिष्ठ नगर नियोजक,

त्रिभुवन सिंह- तत्कालीन मुख्य वास्तुविद नियोजक,

शैलेंद्र कैरे- तत्कालीन उप महाप्रबंधक (ग्रुप हाउसिंग),

बाबूराम- तत्कालीन परियोजना अभियंता,

टीएन पटेल- तत्कालीन प्लानिंग असिस्टेंट,

वीए देवपुजारी- तत्कालीन मुख्य वास्तुविद नियोजक,

एनके कपूर- तत्कालीन एसोसिएट आर्किटेक्ट,

प्रवीण श्रीवास्तव- तत्कालीन सहायक वास्तुविद,

ज्ञान चंद- तत्कालीन विधि अधिकारी,

राजेश कुमार- तत्कालीन विधि सलाहकार,

विपिन गौड़- तत्कालीन महाप्रबंधक,

एमसी त्यागी- तत्कालीन परियोजना अभियंता,

केके पांडेय- तत्कालीन मुख्य परियोजना अभियंता,

पीएन बाथम- तत्कालीन अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी,

एसी सिंह- तत्कालीन वित्त नियंत्रक।

सुपरटेक के निदेशक

आरके अरोड़ा, संगीता अरोड़ा, अनिल शर्मा, विकास कंसल।

आर्किटेक्ट और उनकी फर्म

दीपक मेहता- दीपक मेहता एंड एसोसिएट्स,

नवदीप- मोदार्क आर्किटेक्ट।