सावधान! कमर दर्द और पैरों के सुन्न होने की समस्या को न करें नजरअंदाज, गंभीर बीमारी का है संकेत

 


माइक्रोडिस्सेक्टोमी सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित और कारगर है
 कानपुर के स्पाइन सर्जन डा. अंकुर गुप्ता ने बताया कि स्पाइन सर्जरी की नवीनतम तकनीक माइक्रोडिस्सेक्टोमी मरीजों के लिए कारगर साबित हो रही है...इस तकनीक में एक इंच चीरे के द्वारा विशेष उपकरणों के जरिए स्पाइन की हड्डी में दबी हुई नस को खोल दिया जाता है

कानपुर, जेएनएन। Microdiscectomy Spine Surgery 35 वर्षीय अनिल कुमार एक निजी कंपनी में काम करते हैं। कोरोना काल में उन्हें घर पर ही रहकर काम करना पड़ा। घर पर रहने के कारण काम करते वक्त उनके बैठने का तरीका ठीक नहीं रहा। वह बेड, चेयर या फिर फर्श में बैठकर काम निपटाते थे। इस कारण उनकी कमर में दर्द रहने लगा।

एक दिन घर की साफ-सफाई के दौरान भारी वजन उठाने की वजह से कमर दर्द और तेज हो गया। तकलीफ इतनी बढ़ गई कि वह चार-पांच मिनट से ज्यादा चल नहीं पा रहे थे और न ही खड़े हो पा रहे थे। हालत यह थी कि कमर दर्द के साथ उनके दोनों पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट, जलन, खिंचाव और भारीपन महसूस होने लगा। ये लक्षण स्लिप डिस्क की वजह से सियाटिका के होते हैं। स्लिप डिस्क की बीमारी कई अन्य समस्याओं का भी कारण बनती है।

माइक्रोडिस्सेक्टोमी तकनीक की विशेषताएं

  • यह सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित और कारगर है
  • रोगी को एक दिन बाद चलने की अनुमति मिल जाती है
  • इस आपरेशन को अंजाम देने में लगभग एक घंटे का समय लगता है
  • आपरेशन के बाद दबी नस के खुल जाने पर दर्द और पैरों की तकलीफ दूर हो जाती है
  • आपरेशन के डेढ़ से दो सप्ताह बाद मरीज अपने सभी कार्य आसानी से करने लगता है
  • इस तकनीक में एक इंच चीरे के द्वारा विशेष उपकरणों के जरिए स्पाइन की हड्डी में दबी हुई नस को खोल दिया जाता है

डाक्टर से परामर्श लेने पर जांच में पता चला कि उनकी कमर में (एल4 व एल5) नस दबी हुई है। डाक्टर ने उन्हें एक नई तकनीक माइक्रोडिस्सेक्टोमी से आपरेशन करवाकर दबी हुई नस को खोलने की सलाह दी, जिससे उनकी तकलीफ हमेशा के लिए दूर हो सके। आपरेशन का नाम सुनते ही अनिल घबरा गए। उनके मन में पारंपरिक सर्जरी वाली तकलीफ भरी बातें चलने लगीं। डाक्टर ने उनके मन से भय निकालने के लिए कुछ ऐसे लोगों से मिलवाया जो इस नवीनतम तकनीक से आपरेशन करवाकर स्वस्थ हो चुके थे। अब अनिल भी आपरेशन कराकर स्वस्थ हैं।