अलीगढ़ में मलेरिया व डेंगू के लिए डीबीसी बनेगा ढाल, जानें-क्या है मामला

 

कोरोना के मामले थमने के बाद शहर से लेकर देहात तक डेंगू, मलेरिया व बुखार का प्रकोप बढ़ गया है।
कोरोना के मामले थमने के बाद शहर से लेकर देहात तक डेंगू मलेरिया व बुखार का प्रकोप बढ़ गया है। तमाम कवायदों और जागरूकता अभियानों के बावजूद ये बीमारियां महामारी की तरह फैल रही हैं। लेकिन अब डेंगू और मलेरिया के सामने डीबीसी ढाल बन जाएंगे।

अलीगढ़, संवाददाता।  कोरोना के मामले थमने के बाद शहर से लेकर देहात तक डेंगू, मलेरिया व बुखार का प्रकोप बढ़ गया है। तमाम कवायदों और जागरूकता अभियानों के बावजूद ये बीमारियां महामारी की तरह फैल रही हैं। लेकिन, अब डेंगू और मलेरिया के सामने डीबीसी ढाल बन जाएंगे। चौंकिए मत, डीबीसी यानि डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर, डूडा द्वारा हायर किए स्वयं सेवक हैं, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन दिनों डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। सोमवार को सीएमओ कार्यालय में करीब दो दर्जन डीबीसी को प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया।

डूडा ने हायर कर रखे बीडीसी

अलीगढ़ ही नहीं, पूरे प्रदेश में हर साल डेंगू व मलेरिया का प्रकोप देखने को मिलता है। कई जनपदों में हालात बेकाबू हो गए। तब हालात को नियंत्रण करने में डीबीसी की अहम भूमिका रही, जिन्हें जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) समेत कई निकायों ने हायर किया। डीबीसी ने रिकार्ड मलेरिया और डेंगू के लार्वा की जांच कर बीमारी की रोकथाम की। इस बार भी डेंगू व मलेरिया का प्रकोप है। मलेरिया विभाग के पास इतने कर्मचारी नहीं देहात में लार्वा रोधी कार्रवाई सुनिश्चित कराए। यह स्थिति तमाम जनपदों में देखने को मिल रही है। ऐसे में शासन ने डूडा को पूर्व में हायर कर रखे गए सभी डीबीसी, स्वास्थ्य विभाग व मलेरिया विभाग के सहयोग हेतु भेजने के निर्देश दिए हैं।

डीबीसी की टीमें शहर से लेकर देहात तक घर-घर दस्तक देकर छतों पर, फ्रिज, स्टोर समेत अन्य सभी स्थानों को चेक कर पता लगाती हैं कि कहीं डेंगू का लार्वा तो नहीं पनप रहा है। यदि ऐसा होता है तो उसे फौरन नष्ट किया जाता है। पानी को भी खाली करा दिया जाता है। शासन ने डीबीसी की मदद से व्यापक रूप से अभियान चलाने के आदेश दिए हैं।

डीबीसी की टीमों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है, कि उन्हें कैसे और कहां लार्वा को पनपने से रोकने की कार्रवाई करनी है। इन टीमों के क्षेत्र में उतरने से सोर्स रिडक्शन की प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी। फिलहाल, 10 से 12 टीमें गठित की जाएगी।

- डा. राहुल कुलश्रेष्ठ, जिला मलेरिया अधिकारी।