सतर्कता के साथ-साथ उत्साह और सकारात्मक भाव महामारी से लड़ने का देगा संबल

 


महामारी को हराना है, उत्सवधर्मिता को नहीं।
महामारी ने निसंदेह अप्रत्याशित चुनौतियां हमारे सामने रखी हैं लेकिन यह ध्यान रखें कि हमें महामारी को हराना है हमारी उत्सवधर्मिता को नहीं। पाबंदियों और प्रतिबंधों के बीच ही हमें उत्सव भी मनाना है। प्रतिबंध शारीरिक गतिविधियों पर लगे हैं आंतरिक उत्साह पर नहीं।

नई दिल्‍ली। हमारी सतर्कता आखिरकार रंग लाने लगी है। करीब दो साल से कोविड-19 महामारी के दौरान हमारे संयम ने इस महालड़ाई को एक निर्णायक मुकाम दिया है। हमारे एहतियाती कदम शनै: शनै: तथाकथित तीसरी लहर की धार को कुंद करते दिख रहे हैं। इन सबकी पुष्टि देश में कोरोना के हर दिन आने वाले नए मामले घटते दिख रहे हैं। कम होने वाले मामले हर दिन रिकार्ड बना रहे हैं। स्वास्थ्य आपातकाल सरीखे इस हालात में अगर लोगों का उनके धैर्य और सूझ-बूझ के लिए इस्तकबाल किया जाना चाहिए तो हमारी सरकारें भी अभिनंदन की पात्र हैं। केंद्र सरकार के प्रभावी नेतृत्व में न सिर्फ संसाधनों का जखीरा तैयार कर लिया गया बल्कि विकसित देशों की तर्ज पर स्वदेशी टीका विकसित कर बड़े पैमाने पर टीका उत्पादन की हर बाधाएं भी दूर की गईं।

आज दुनिया के तमाम गरीब-अमीर देश भारत को टीके के लिए धन्यवाद दे रहे हैं। यह देख-सुन भला कौन गर्व से आह्लादित नहीं हो जाएगा। सरकार और नागरिकों के यह साङो प्रयास का नतीजा है कि आज हर कोई तय समय पर अपना टीका लगवा रहा है। कोई हिचक नहीं। दुनिया के कई विकसित देश के लोग टीके से दूरी बनाए रखने की मानसिकता से उबर नहीं पा रहे हैं। बदलती तस्वीर की गवाही माहौल भी दे रहा है। अर्थव्यवस्था से लेकर बाजार और उद्योग की हर चीज फिर से र्ढे पर आती दिख रही है। चिंता सिर्फ एक बात की है। आने वाले दिनों में त्योहारी सीजन शुरू हो रहे हैं। नवरात्र से लेकर दशहरा, दीपावली होते हुए यह उत्सवी माहौल छठ तक चलेगा। हमारे त्योहार हमारी विरासत हैं।

हमारी उत्सवधर्मिता के प्रतीक हैं। तमाम विशेषज्ञ इसी बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर अगले एक महीने हम संयम और सतर्कता से बिता ले गए तो महामारी पर विजय पाने से हमें कोई नहीं रोक सकता। ये हमारा अंतिम लिटमस टेस्ट है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया और एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया भी त्योहारी सीजन से जुड़ी यह चिंता जाहिर कर चुके हैं। ये चिंता गैरजायज भी नहीं है। अतीत में केरल का उदाहरण हम सबके सामने है। उत्सव को हम मनाएं। अपनी खुशियों को एक दूसरे से जरूर बांटे, लेकिन सजगता और सतर्कता से किनारा न करें। हमारा यह महीने भर का संयम कोरोना महामारी के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा।

29 सितंबर को सभी राज्यों को जारी गृह मंत्रलय के दिशानिर्देश : कोविड-19 के लिए कंटेनमेंट दिशा-निर्देश 31 अक्टूबर तक जारी रहेंगे। उन कार्यक्रमों में काफी सतर्कता बरती जाए जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। मेलों, त्योहारों और धार्मिक कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर लोगों के जमा होने से देश में कोविड-19 के मामले बढ़ सकते हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने यहां हर जिले में संक्रमण दर और अस्पताल व आइसीयू में बिस्तरों की संख्या पर करीब से निगाह रखनी चाहिए