भारत को अमेरिका की परिस्थितियों से सबक लेने की जरूरत

 


टीकाकरण की तेज गति और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन।
 नए डाटा बताते हैं कि वैक्सीन के खिलाफ प्रभावी म्यू वैरिएंट के संक्रमण की रफ्तार धीमी हुई है लेकिन भविष्य में किसी वैक्सीन रेजिस्टेंट वैरिएंट की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है। भारत को अमेरिका की परिस्थितियों से सबक लेने की जरूरत है।

डा दिलीप कुमार। हमारा लिटमस टेस्ट है। हमारा त्योहारों का मौसम सिर पर है और हमें अपने उत्सव का भरपूर आनंद लेने के साथ सतर्क रहने की भी आवश्यकता है। साल के शुरुआती 2 महीने में हमने अपनी लापरवाही का नतीजा बाद में देखा। पूरा देश शायद ही कभी उस मंजर को भूला पाएगा। अब हमें दूसरे देशो में आई तीसरी लहर के प्रकोप और उनसे जुड़े कारणों को समझने व जरूरी एहतियात बरतने की आवश्यकता है ताकि हमें फिर किसी लहर का सामना न करना पड़े। अमेरिका में पिछले साल दिसंबर में आई भीषण दूसरी लहर के बाद आगे के 4-5 महीनों में कोरोना संक्रमण की दर में ऐसी ही स्थिरता देखने को मिली थी। यहां तक कि जून में नए संक्रमण की संख्या घटकर रोजाना 10 हजार तक आ गई थी। ठीक भारत की तरह इसके पीछे भी अहम वजह थी टीकाकरण की तेज गति और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन।

उसके बाद यहां का सबसे बड़ा उत्सव आया चार जुलाई यानी अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस। बड़ी भीड़ का एक साथ उत्सव मनाना और ज्यादा संक्रामक डेल्टा वैरिएंट्स के कांबिनेशन की वजह से तीसरी लहर आई। नतीजा यह हुआ कि अगस्त से आज तक यहां दैनिक संक्रमण के मामले एक लाख आ रहे हैं और कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या सात लाख के दुखद आंकड़े को छू गई है। यह 1918 में फैले स्पेनिश फ्लू में हुई मौतों से भी ज्यादा है। अभी भी यहां की अमूमन 30 प्रतिशत से ज्यादा आबादी ऐसी है, जिसने वैक्सीन की एक भी डोज नहीं ली है। एंटी वैक्सर्स मूवमेंट और वैक्सीन से जुड़े दुष्प्रचारों ने यहां टीकाकरण की गति बहुत धीमी कर दी है। यही वजह है कि यहां तीसरी लहर अभी तक नहीं थमी है।

कहीं भी कोई आयोजन हो तो जरूरी है कि सिर्फ टीके की दोनों डोज ले चुके लोगों को ही एकत्रित होने की छूट मिले। सरकार को दोनों डोज लगवा चुके लोगों को सामाजिक उत्सवों में छूट देनी चाहिए, जिससे लोगों में टीके के प्रति झुकाव बढ़ेगा। ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण और नियमों का पालन ही हमें दशहरा और दीवाली के बाद नए साल का जश्न मनाने का भी अच्छा अवसर देगा। हाल में कोरोना के खिलाफ मर्क कंपनी की नई दवा के ट्रायल्स ने बहुत अच्छे परिणाम दिखाए हैं। इससे भी उम्मीद की किरण दिखी है। तब तक हमें त्योहारों को मनाने के साथ पूर्ण सतर्कता बरतनी होगी।