संपत्ति बदरंग अधिनियम ताख पर, दीवारों और खंभों पर लग रहे नेताओं के पोस्टर

 


पोस्टरों के कारण वाहन चालकों का ध्यान भटकने का अंदेशा हर समय रहता है।
 एक तरफ दक्षिणी निगम के चारों जोन में स्वच्छता अभियान पर जोर दिया जा रहा है और दूसरी तरफ विभिन्न राजनीतिक दल और निजी संस्थान संपत्ति बदरंग अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं। अगले साल दिल्ली में नगर निगम चुनाव है।

नई दिल्ली,  संवाददाता। अगले वर्ष होने वाले निगम चुनाव को लेकर तैयारियों का दौर अभी से शुरू हो गया है। दीवारों और खंभों पर लगे बैनर और होर्डिंग्स इस बात का प्रमाण दे रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब ऐसा करना कानूनन अपराध है। एक तरफ दक्षिणी निगम के चारों जोन में स्वच्छता अभियान पर जोर दिया जा रहा है और दूसरी तरफ विभिन्न राजनीतिक दल और निजी संस्थान संपत्ति बदरंग अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उत्तम नगर, पालम, राजनगर, जनकपुरी, राजौरी गार्डन, टैगोर गार्डन, महावीर एंक्लेव, सीतापुरी, नजफगढ़, कैर गांव समेत सभी इलाकों में इस तरह की समस्याएं इन दिनों देखने को मिल रही हैं। हालांकि ये समस्या अब आम हो चुकी है, क्योंकि निगम के पास इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं है। निगम पार्षद एक तरफ खुद स्वच्छता बनाए रखने का दावा करते हैं और दूसरी तरफ मौका मिलने पर अधिकांश निगम पार्षद बैनर और पोस्टर लगाकर स्वच्छता अभियान को तार-तार कर देते हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि फंड की किल्लत से जूझ रहे निगम ने राजस्व को बढ़ाने के लिए जगह-जगह बैनर लगाने के लिए कुछ जगह संरक्षित कर रखी है। कई लोग राजस्व के भुगतान से बचने के लिए उस स्थान पर बैनर लगाने से बचते हैं। संपत्ति बदरंग अधिनियम के तहत राजधानी की सुंदरता को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रविधान है। इस अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर दोषी को अधिकतम एक वर्ष की सजा या 50 हजार रुपए जुर्माने का प्रविधान है।

नहीं बरती जाती सख्ती

अवैध पोस्टरों और बैनरों को लगाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहता है। खासकर नजफगढ़ रोड पर स्थित मेट्रो के खंभे, द्वारका में लगी स्ट्रीट लाइटों के खंभे, फुटपाथ के पेड़ों पर यह समस्या ज्यादातर देखने को मिलती है। इसमें दुकानों, निजी शिक्षण संस्थानों के अलावा कई अन्य प्रतिष्ठानों और इलाके में होने वाले आयोजनों के पोस्टर शामिल रहते हैं। द्वारका इलाके में लोगों की शिकायत के बाद एक-दो दिनों तक सख्ती दिखाई देती है, लेकिन बाद में स्थिति जस की तस हो जाती है। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर इन पोस्टरों के कारण वाहन चालकों का ध्यान भटकने का अंदेशा हर समय रहता है। ऐसे में कभी भी दुर्घटना हो सकती है।

सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर लगाना गलत

सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर लगाना बिल्कुल गलत है। निगम की ओर से इसको लेकर कार्रवाई की जाती है। हफ्ते में एक बार असिस्टेंट पब्लिक रिलेशन आफिसर पूरे इलाके का जायजा लेते हैं और जहां भी पोस्टर लगे रहते हैं, उन्हें उतारा जाता है। जरूरत पड़ने पर मामला दर्ज कराया जाता है। लोगों से अपील है कि निगम द्वारा चिह्नित स्थानों पर अनुमति के बाद ही पोस्टर लगाएं।

कर्नल बीके ओबेराय अध्यक्ष, स्थाई समिति, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम