जले खाद्य तेल से बनेगा बायोडीजल, फर्म को म‍िली जिम्मेदारी

 

जलेे हुआ तेल का वायोडीजल बनाने की तैयारी चल रही है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

प्रयोग के बाद जला हुआ तेल दोबारा फूड चेन में वापस नहीं आ पाएगा। यानी कोई दुकानदार खाद्य सामग्री बनाने के लिए उसका प्रयोग नहीं कर सकेगा। इस तेल से अब बायोडीजल बनाया जाएगा। इसके लिए लखनऊ की एक फर्म को शासन ने जिम्मेदारी दी है।

गोरखपुर। होटल, रेस्टोरेंट, नमकीन फैक्ट्रियों एवं अन्य प्रतिष्ठानों में प्रयोग के बाद जला हुआ तेल दोबारा फूड चेन में वापस नहीं आ पाएगा। यानी कोई दुकानदार खाद्य सामग्री बनाने के लिए उसका प्रयोग नहीं कर सकेगा। इस तेल से अब बायोडीजल बनाया जाएगा। इसके लिए लखनऊ की एक फर्म को शासन ने जिम्मेदारी दी है। फर्म के कर्मचारी डोर टू डोर जाकर प्रयोग किया जा चुका तेल खरीदेंगे। पहले चरण में होटल, रेस्टोरेंट एवं नमकीन बनाने वाली फैक्ट्रियों से तेल खरीदा जाएगा। फर्म की ओर से जले हुए तेल के बदले में भुगतान भी किया जाएगा।

अभी ऐसे होता है जले हुए तेल का प्रयोग

शासन एक अनुमान के मुताबिक बड़े होटल, रेस्टोरेंट एवं नमकीन आदि बनाने वाली फैक्ट्रियों में प्रयोग के बाद तेल को रिफाइन कर दोबारा बाजार में उतार दिया जाता है। पैकेजिंग होने के कारण इसपर लगाम भी नहीं लग पाती है। इस तरह से करीब जले हुए तेल का करीब 60 फीसद दोबारा फूड चेन में वापस आ जाता है। हालांकि आधिकारिक रूप से फैक्ट्रियों की ओर से दावा किया जाता है कि जले हुए तेल को वे बर्नर में प्रयोग कर लेते हैं।

गंभीर बीमारियों का है खतरा

जला हुआ खाद्य तेल स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं होता है। इसमें ट्रांस फैट होता है जिसके इस्तेमाल से दिल की बीमारियों के साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ता जाता है। युवाओं में हर्ट अटैक की समस्या के पीछे भी इसे बड़ा कारण माना जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से जले हुए तेल के दोबारा इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

अधिकतम तीन बार गर्म किया जा सकता है खाद्य तेल

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी खाद्य तेल को अधिकतम तीन बार गर्म किया जा सकता है। इसके बाद इसका टोटल पोलर कंटेंट (टीपीसी) 25 से ऊपर चला जाता है। सामान्य तेल में टीपीसी पांच तक होता है। टीपीसी बढ़ने के बाद इसका इस्तेमाल मानव शरीर के लिए हानिकारक होता है।

हो सकती है कार्रवाई

यदि किसी ने फर्म को तेल नहीं दिया और जांच में टीपीसी 25 के ऊपर पाया गया तो खाद्य सुरक्षा विभाग उसपर कार्रवाई भी करेगा। ऐसे लोगों का चालान किया जा सकता है।

जले हुए तेल को फूड चेन में दाेबारा न लाया जा सके इसलिए इससे ईंधन बनाने का निर्णय लिया गया है। यह तेल पूरी तरह से मानव शरीर के लिए हानिकारक है और केंद्र सरकार ने प्रतिबंध भी लगाया है। जिले में भी जले हुए तेल को एकत्र किया जाएगा। तेल बेचने पर प्रतिष्ठान के मालिक को आय भी होगी। दशहरा बाद अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। - कुमार गुंजन, अभिहित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग।