रक्षा व सैन्य सहयोग को मजबूत करने श्रीलंका पहुंचे भारतीय नौसेना के छह जहाज

 

चीन की चालबाजी को मात दे दोनों पड़ोसी देश रच रहे रक्षा संबंधों की प्रगाढ़ता का नया इतिहास
भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास में मील का पत्थर है। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में भारतीय नौसेना के जहाज श्रीलंका पहुंचे हैं। प्रशिक्षण भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के सबसे मजबूत व स्थायी स्तंभों में शामिल है।

कोलंबो, प्रेट्र। भारतीय नौसेना के पहले प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के छह जहाज पहली बार चार दिवसीय यात्रा पर रविवार को श्रीलंका के त्रिंकोमाली बंदरगाह पहुंचे। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग मजबूत करना व साथ काम करने की क्षमता को बढ़ाना है। भारतीय जहाज ऐसे समय में श्रीलंका पहुंचे हैं, जब चालबाज चीन द्वीपीय राष्ट्र के साथ रक्षा संबंध बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा, 'यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास में मील का पत्थर है। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में भारतीय नौसेना के जहाज श्रीलंका पहुंचे हैं। प्रशिक्षण भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के सबसे मजबूत व स्थायी स्तंभों में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे की दूरदृष्टि के अनुरूप यह यात्रा दोनों देशों के लोगों में संपर्क बढ़ाने और रक्षा कर्मियों के बीच सौहार्द्र व मित्रता को प्रगाढ़ करने में सकारात्मक योगदान देगी।'

नौसेना की टीम में 75 अफसर और 153 अफसर कैडेट्स हैं शामिल

यात्रा में शामिल जहाज दक्षिण नौसैन्य कमान (एसएनसी) का हिस्सा हैं, जो भारतीय नौसेना की प्रशिक्षण कमान है। इसका नेतत्व एसएनसी के फ्लैग आफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल एके चावला कर रहे हैं। भारतीय उच्चायुक्त गोपाल बागले ने वाइस एडमिरल चावला से मुलाकात की। नौसेना की टीम में 75 अफसर, 153 अफसर कैडेट्स, 10 एनसीसी कैडेट्स व 530 जवान शामिल हैं। श्रीलंका में दोनों देशों की नौसेनाओं के जवान व अधिकारी पेशेवर, प्रशिक्षण, सांस्कृतिक व स्पो‌र्ट्स जैसी गतिविधियों में शामिल होंगे।

40 साल से अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दे रही भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना 40 साल से अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दे रही है। श्रीलंका यात्रा के दौरान भारतीय नौसेना के जहाज मगर व शार्दुल के साथ ही 101 आइओटीसी के प्रशिक्षु कोलंबो बंदरगाह जाएंगे, जबकि जहाज सुजाता, सुदर्शिनी, तारंगिनी व सीजीएस विक्रम 100वीं आइओटीसी के प्रशिक्षुओं के साथ त्रिंकोमाली में रहेंगे। जहाज वापसी के लिए 27 व 28 अक्टूबर को रवाना होंगे।