स्जिद के पास बम धमाका, कई लोगों की मौत, कई घायल के पास बम धमाका, कई लोगों की मौत, कई घायल

 



काबुल की एक मस्जिद में हुए धमाके में कई नागरिकों के मारे जाने की जानकारी सामने आ रही है।
अफगानिस्‍तान अभी भी आतंकी हमलों की आग में झुलस रहा है। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक काबुल की एक मस्जिद में हुए धमाके में कई नागरिकों के मारे जाने की जानकारी सामने आ रही है। पढ़ें यह रिपोर्ट...

काबुल, एजेंसियां। अफगानिस्‍ता की सत्‍ता पर तालिबान की वापसी के बाद हालात और खराब हो गए हैं। अफगानिस्‍तान अभी भी आतंकी हमलों की आग में झुलस रहा है। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान की राजधानी में काबुल में एक मस्जिद के प्रवेश द्वार पर हुए धमाके में कई नागरिकों के मारे जाने की खबर है। समाचार एजेंसी एपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह बम धमाका काबुल में ईदगाह मस्जिद को निशाना बना कर किया गया जहां तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद की मां के लिए एक स्मारक सेवा आयोजित की जा रही थी।

फि‍लहाल इस हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है। हालांकि अगस्त के मध्य में अफगानिस्तान की सत्‍ता पर तालिबान की वापसी के बाद से आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों के हमले बढ़ गए हैं। अधिकांश हमले तालिबान लड़ाकों को निशाना बनाकर किए गए हैं। हाल के दिनों में हुए इन आतंकी हमलों ने दोनों चरमपंथी समूहों तालिबान और इस्‍लामिक स्‍टेट के बीच व्यापक टकराव की संभावना को बढ़ा दिया है।

मालूम हो कि अफगानिस्‍तान के पूर्वी प्रांत नंगरहार में खूंखार आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट की उपस्थिति काफी मजबूत है। इस्‍लामिक स्‍टेट तालिबान को अपना कट्टर दुश्मन मानता है। इस्‍लामिक स्‍टेट ने तालिबान के खिलाफ कई हमलों का दावा किया है। अब तक इस्‍लामिक स्‍टेट हमलों का केंद्र प्रांतीय राजधानी जलालाबाद थी। जलालाबाद में इस्‍लामिक स्‍टेट की ओर से कई हमले किए जा चुके हैं जिनमें बड़ी संख्‍या में लोगों की मौतें हुई हैं। काबुल में आईएस की ओर से किया गया यह दुर्लभ हमला है।  

तालिबान की वापसी के बाद अफगानिस्‍तान में हालात और खराब हो गए हैं। हाल ही में पाकिस्तान में मौजूद संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी की हाई कमिश्नर फिलिपो ग्रांडी ने कहा था कि अफगानिस्तान में मानवीय स्थितियां बहुत ही खराब हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल मदद के लिए आगे आना चाहिए। आलम यह है कि अफगानिस्तान की आर्थिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। लोग रोजी रोटी के संकट से जूझ रहे हैं।