कैप्टन अमरिंदर की दीपावली से पहले पंजाब की सियासत में धमाके की तैयारी, जानें कांग्रेस क्‍यों है सांसत में

 पंजाब के पूर्व मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो)

 पंजाब के पूर्व मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह दीपावली से पहले पंजाब की सियासत में धमाका करने की तैयारी है। कैैप्‍टन अपनी नई पार्टी की घोषणा कर

चंडीगढ़,कैप्टन अमरिंदर सिंह दीपावली से पहले अपनी पार्टी बनाकर पंजाब की सियासत में धमाका करने और कांग्रेस में बम फोड़ने की तैयारी में हैं। माना जा रहा है कि इसके लिए वह अगले तीन से चार दिनों में कांग्रेस में अपने करीबी व नाराज विधायकों के साथ बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में ही तय होगा कि वह कितने विधायकों के साथ अपनी पार्टी बनाने की घोषणा करेंगे। इससे कांग्रेस के नेता सांसत में हैं और राज्‍य की चरणजीत सिंह चन्‍नी सरकार के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। 

इसके साथ ही यह भी तय माना जा रहा है कि कैप्टन पार्टी बनाकर भारतीय जनता पार्टी के साथ ही समझौता करेंगे। भाजपा को भी शिरोमणि अकाली दल से नाता टूटने के बाद एक ऐसे चेहरे की आवश्यकता है जिसकी पहचान राष्ट्रव्यापी हो। भाजपा के पास पहले यह चेहरा प्रकाश सिंह बादल के रूप में था।

समर्थक कांग्रेस विधायकों के साथ अगले दो-तीन दिन में कर सकते हैं बैठक

कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही यह घोषणा कर चुके हैं कि वह अपनी पार्टी बनाएंगे, लेकिन इसकी घोषणा कब होगी इसे लेकर असमंजस बरकरार था। कैप्टन इन दिनों सोशल मीडिया पर जितना सक्रिय हैं, उतना ही राजनीतिक रूप से भी सक्रिय दिख रहे हैं। इन सबके बीच कैप्टन ने दीपावली अपनी पार्टी का गठन कर मनाने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि अगले कुछेक दिनों में ही वह अपनी पार्टी बनाने की घोषणा कर सकते हैं।

कांग्रेस के करीब दो दर्जन से ज्यादा विधायकों के साथ लगातार बनाए हुए हैं संपर्क

कांग्रेस के कई विधायक भी कैप्टन की पार्टी में शामिल हो सकते हैं। कैप्टन करीब दो दर्जन से ज्यादा विधायकों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। कांग्रेस के अंतरकलह में अपने मंत्री पद गंवाने वाले  भी कैप्टन के साथ संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा अपनी पार्टी बनाने के बाद कांग्रेस में नियमित अंतराल पर बम फोड़े जाएंगे। माना जा रहा है कि कैप्टन के करीबी एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग समय पर उनकी पार्टी में जा सकते हैं।

कैप्टन की नई पार्टी को भाजपा का भी समर्थन मिलेगा। कृषि सुधार कानूनों को लेकर शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ लिया। ऐसे में भाजपा की नजर कैप्टन अमरिंदर सिंह पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि जिस प्रकार से बिहार में नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी बनाकर भाजपा के साथ समझौता किया था उसी प्रकार कैप्टन अपनी पार्टी बनाकर भाजपा के साथ समझौता करेंगे।

सूत्र बताते हैं कि इससे भाजपा को कृषि आंदोलन के कारण उसके विपरीत गई परिस्थिति को भी संभालने का मौका मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा यह भी संदेश दे सकेगी कि सिखों का एक बड़ा नेता उनके साथ जुड़ा हुआ है। वहीं, कैप्टन अगर अपनी पार्टी बनाते हैं तो उनके करीबी कांग्रेस विधायकों को उनके साथ जुड़ने में भी किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।