पीएम मोदी कल अफगानिस्तान पर G20 शिखर सम्मेलन में वर्चुअली भाग लेंगे, इटली के राष्ट्रपति ने दिया निमंत्रण

 

पीएम मोदी कल G20 शिखर सम्मेलन में वर्चुअली भाग लेंगे, इटली के राष्ट्रपति ने दिया निमंत्रण
पीएम मोदी मंगलवार को अफगानिस्तान पर ग्रुप आफ 20 (G20) एक्स्ट्राआर्डिनरी लीडर्स के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की एक्स्ट्राआर्डिनरी बैठक की घोषणा सबसे पहले 29 सितंबर को इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी ने की थी।

नई दिल्ली, एजेंसी।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल (12 अक्टूबर) वर्चुअली अफगानिस्तान पर आगामी G20 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोमवार को कहा कि पीएम मोदी मंगलवार को अफगानिस्तान पर ग्रुप आफ 20 (G20) एक्स्ट्राआर्डिनरी लीडर्स के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी इतालवी राष्ट्रपति के निमंत्रण पर शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

मंत्रालय ने आगे कहा कि बैठक के एजेंडे में मानवीय जरूरतों की प्रतिक्रिया और युद्धग्रस्त राष्ट्र में बुनियादी सेवाओं और आजीविका तक पहुंच पर चर्चा शामिल होगी, जिसे इस साल अगस्त में तालिबान ने अपने कब्जे में ले लिया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि एजेंडा में सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और गतिशीलता, प्रवास और मानवाधिकारों पर बातचीत भी शामिल होगी।

दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की एक्स्ट्राआर्डिनरी बैठक की घोषणा सबसे पहले 29 सितंबर को इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी ने की थी। यह बैठक रोम में 30 और 31 अक्टूबर को होने वाले जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले होगी।

वैश्विक समाचार एजेंसी रायटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ड्रैगी ने हाल ही में रूस के व्लादिमीर पुतिन और चीन शी जिनफिंग सहित अन्य विश्व नेताओं से युद्ध से तबाह राष्ट्र में सामने आने वाले संकट का सामना करने के लिए रणनीति बनाने के लिए एक विशेष बैठक आयोजित करने की आवश्यकता के बारे में बात की थी। बता दें कि इस्लामिक उग्रवादी समूह के तहत मानवाधिकारों, विशेष रूप से महिलाओं और अल्पसंख्यकों की चिंता विश्व स्तर पर एक प्रमुख चिंता का विषय रही है। यूरोपीय देशों ने भी संकट के बारे में अपनी आशंका व्यक्त की है जिससे प्रवासियों के बड़े पैमाने पर आने का खतरा भी जताया गया है।

ड्रैगी ने संवाददाताओं से कहा, 'हमें यह देखना होगा कि क्या जी20 देशों के बीच साझा उद्देश्य हैं...हम एक ऐसे बिंदु पर पहुंच गए हैं जहां हमें केवल जान बचाने की चिंता करने की जरूरत है।' उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी अफगानिस्तान को आतंकवादियों का अड्डा बनने से रोकने के लिए रणनीति बनानी चाहिए