होटल के कमरे में कुछ ऐसा हुआ था जो हादसा नहीं था, SIT जांच में सच आया सामने

 


मनीष की पत्‍नी मीनाक्षी अपने बेटे के साथ। - फाइल फोटो
 मनीष गुप्ता हत्याकांड में आरोप‍ित पुलिसकर्मियों की तलाश शुरू हो गई है। कानपुर एसआइटी की जांच में तय हो गया है कि कमरे के अंदर कुछ ऐसा हुआ था जिसे हादसा नहीं कहा जा सकता।

गोरखपुर,  संवाददाता। कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता हत्याकांड में आरोप‍ित पुलिसकर्मियों की तलाश शुरू हो गई है। कानपुर एसआइटी की जांच में तय हो गया है कि कमरे के अंदर कुछ ऐसा हुआ था जिसे हादसा नहीं कहा जा सकता। इसी वजह से एसआइटी ने आरोपित पुलिसकर्मियों को तलाशने की अनुमति दे दी है।क्राइम ब्रांच के साथ ही चार अलग-अलग टीम इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह ने अन्य आरोपितों की तलाश में छापेमारी कर रही है। एसआइटी इस मामले अभी कुछ भी नहीं बोल रही है।

गोरखपुर क्राइम ब्रांच सहित चार टीमें अलग-अलग ठिकानों पर दे रही दबिश

कानपुर से शनिवार को अपर पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में गोरखपुर पहुंची एसआइटी ने घटनास्थल होटल कृष्णा पैलेस में साढ़े छह घंटे तक छानबीन की थी। होटल के कमरा नंबर 512 के साथ ही रेलिंग, सीढ़ी और रिसेप्शन के पास खून का नमूना एकत्र किया था। पुलिसकर्मियों के खिलाफ साक्ष्य मिलने के बाद गोरखपुर के साथ ही कानपुर क्राइम ब्रांच की टीम इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह तलाश में जुट गई है। एक टीम को लखनऊ, दूसरे को अमेठी भेजा गया है। बताया जा रहा है कि लखनऊ के घर पर तो कोई नहीं मिला। अमेठी में भी कोई नहीं मिला।वहीं दूसरी तरफ एक टीम बलिया और एक गाजीपुर गई है। आरोपित उप निरीक्षक विजय यादव गाजीपुर तो अक्षय मिश्र बलिया के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

शनिवार की रात में अमेठी पहुंची थी गोरखपुर क्राइम ब्रांच

अमेठी जिले के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के अढनपुर निवासी जगत नारायण सिंह के घर शनिवार की देर रात गोरखपुर पुलिस पहुंची। उनके साथ मुसाफिरखाना कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक परशुराम ओझा भी थे।लेकिन निरीक्षक जगत नारायण सिंह अपने घर पर नहीं मिले।स्वजन ने बताया कि वे अभी तक घर नहीं आए हैं।

मेडिकल कालेज के कैमरे थे खराब, पर्चा की कापी ले गई टीम

मेडिकल कालेज गेट व ट्रामा सेंटर पर लगे सीसी कैमरे खराब मिले हैं।एसआइटी की छानबीन में पता चला कि मनीष को लेकर जब रामगढ़ताल पुलिस मेडिकल कालेज पहुंची थी तो ट्राली मैन स्ट्रेचर से अंदर ले गया लेकिन रजिस्टर में विवरण दर्ज नहीं किया। ट्रामा सेंटर के ट्राली मैन अमित ने एसआइटी को बताया कि देर रात में मनीष को लेकर पुलिस आयी थी और बहुत जल्दी में थी। मरीज को ट्राली पर लादकर ही इमरजेंसी के सर्जरी विभाग में पहुंचाया गया था। लेकिन रजिस्टर में इंट्री नहीं कर पाया। एसआइटी ने इमरजेंसी के बाहर लगे सीसी कैमरे को चेक किया तो बंद मिला। जिस पर अपर पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी ने नाराजगी जताई।भर्ती काउंटर पर पहुंचकर उन्होंने भर्ती पर्चा बनने का समय नोट किया। शाम 6.30 बजे मेडिकल कालेज पहुंचे कैजुअल मेडिकल आफिसर डाक्टर एके श्रीवास्तव पहुंचे तो उनका बयान दर्ज किया।एसआइटी इमरजेंसी का भर्ती पर्चा और रजिस्टर में लिखी गई रिपोर्ट की कापी भी अपने साथ ले गई।

होटल कर्मचारी खोलेगा राज, किसने मिटाया सबूत

एसआइटी पहले दिन से ही यह पता करने की कोशिश में जुटी है कि किसके दबाव में होटल कर्मचारी आर्दश पांडेय ने घटना के तत्काल बाद ही कमरे से मनीष के खून के धब्बों को साफ कर दिया था।क्राइम सीन रीक्रिएट करने के दौरान भी गिरकर इतनी गंभीर चोट लगने की बात सामने नहीं आई।

सीबीआइ जांच से पहले एसआइटी कर सकती है बड़ा पर्दाफाश

मनीष गुप्ता हत्याकांड की दो दिन से जांच कर रही कानपुर एसआइटी के हाथ अहम सुराग लगा है।चर्चा है कि यह केस सीबीआइ के टेकओवर करने से पहले ही एसआइटी की रिपोर्ट पर बड़ा पर्दाफाश हो सकता है।