10 बिंदुओं में जानिए चीनी राष्‍ट्रपति शी चिनफ‍िंग के बारे में, आखिर कौन है उनका आदर्श नेता

 

10 बिंदुओं में जानिए चीनी राष्‍ट्रपति शी चिनफ‍िंग के बारे में।
चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की बैठक में चिनफ‍िंग तीसरी बार देश के राष्‍ट्रपति बनाए गए हैं। न्‍होंने अपने को माओ और देंग की तरह एक युगांतकारी नेता के रूप में पेश किया। चिनफ‍िंग कौन है। क्‍या है उनकी पृष्‍ठभूमि। कैसे वह सत्‍ता के शिखर तक पहुंचे। कौन है उनका आदर्श।

नई दिल्‍ली आनलाइन डेस्‍क। चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की बैठक में शी चिनफ‍िंग तीसरी बार देश के राष्‍ट्रपति बनाए गए हैं। कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि कोई व्‍यक्ति लगतार तीसरी बार देश का राष्‍ट्रपति बना। 2012 में सत्‍ता पर काबिज होने के बाद उन्‍होंने कम्‍युनिस्‍ट पार्टी को अपनी चंगुल में ले लिया। सत्‍ता की खातिर उन्‍होंने चीन के संव‍िधान को ही बदल दिया। उन्‍होंने अपने को माओ और देंग की तरह एक युगांतकारी नेता के रूप में पेश किया। आखिर शी चिनफ‍िंग कौन है। क्‍या है उनकी पृष्‍ठभूमि। कैसे वह सत्‍ता के शिखर तक पहुंचे। कौन है उनका आदर्श। 

1- चिनफ‍िंग के पिता कम्‍युनिस्‍ट पार्टी से गहरे से जुड़े हुए थे। इसलिए बचपन में ही उनका कम्‍युनिस्‍ट पार्टी और उसकी विचारधारा के प्रति गहरा लगाव था। उनका किशोरावस्‍था माओ की मशहूर छोटी किताबों में गुजरा। उस वक्‍त चीन में माओ की छोटी लाल किताब काफी प्रसिद्ध थी। उस वक्‍त चिनफ‍िंग की अवस्‍था 15 वर्ष की थी। यह चीन के सांस्‍कृतिक क्रांति का दौर था। इस तरह चिनफ‍िंग की बाल्‍यावस्‍था और किशोरावस्‍था सांस्‍कृतिक क्रांति और लाल किताब के बीच गुजरी। इसकी उनके जीवन पर गहरी छाप है।

2- राष्‍ट्रप‍ति के तौर पर उन्‍होंने अपने पहले पांच वर्ष एक महान इंसान के रूप में गढ़ा। वह खुद को एक जननेता के रूप में अपने आप को पेश करते हैं। जननेता के रूप में स्‍थापित करने के लिए वह गरीबों के घर जाने एवं गली कूचों की भी सैर करते हैं। वह कई बार लंच लेने के लिए कतार में खड़े हुए हैं। वह अपने खाने का बिल खुद देते हैं। वह अक्‍सर छात्रों के साथ भी वार्ता करते हैं। छात्रों के साथ उनका यह संवाद काफी चर्चा में रहता है। वह कहते हैं कि जिंदगी एक बटन वाली कमीज है, जिसके शुरू के बटन सही तरीके से लगने चाहिए, वरना सारे बटन गलत बंद होते हैं।

3- साठ के दशक में माओ ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर जुल्‍म ढाया। चिनफ‍िंग का परिवार भी माओ के इस जुल्‍म का शिकार हुआ। पहले चिनफ‍िंग के पिता को कम्‍युनिस्‍ट पार्टी से निष्‍कासित कर दिया गया। इसके बाद उन्‍हें जेल भेज दिया गया। ऐसे में चिनफ‍िंग के परिवार की प्रतिष्‍ठा काफी गिर गई। परिवार और मित्रों के बगैर चिनफ‍िंग अपनी जान बचाने के लिए लंबे समय तक माओ के रेड गार्ड्स से छिपते रहे। इस दौरान उनकी एक बहन की मौत हो गई। उस वक्‍त चिनफ‍िंग की उम्र 13 वर्ष की थी। इसका असर चिनफ‍िंग के अध्‍ययन पर पड़ा। उनकी पढ़ाई बंद हो गई। उस वक्‍त बीजिंग के सारे स्‍कूल बंद कर दिए गए थे। 14 वर्ष की अवस्‍था में चिनफ‍िंग से माओ के रेड गार्ड्स ने यह सवाल किया था कि तुम अपने जुर्म को कितना गंभीर मानते हो। उनका उत्‍तर था कि इसका अंदाजा तुम खुद लगाओ, क्‍या यह मुझे मारने के लिए काफी है।

4- 60 के दशक में चीन में गांवों की जिंदगी काफी जटिल थी। गांवों में बिजली नहीं थी। यातायात के साधन नहीं थे। खेती के लिए मशीनें नहीं थी। उस वक्‍त चिनफ‍िंग का जीवन गांवों में व्‍यतीत हुआ। उन्‍हें खाने के लिए दलिया, बन और कुछ सब्जियां ही मिला करती थी। चिनफ‍िंग को पढ़ने और सिगरेट पीने का शौक था। वह ढिबरी की रोशनी में पढ़ा करते थे। वह माओ के भाषण को चीन के सरकारी अखबार में पढ़ा करते थे। इसके सिवाय पढ़ने के लिए कुछ और था ही नहीं।

5- च‍िनफ‍िंग के दोस्‍त लू के मुताबिक हंसी मजाक चिनफ‍िंग को कतई नहीं पसंद था। उनकी खेलकूद में भी कोई दिलचस्‍पी नहीं थी। 18 वर्ष की उम्र में उन्‍होंने अपना सियासी सफर शुरू किया। वह कम्‍युनिस्‍ट पार्टी यूथ लीग में शामिल हुए। 21 वर्ष की उम्र में वह कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के सदस्‍य बन गए। कम्‍युनिस्‍ट क्रांति के बाद वह कट्टर कम्‍युनिस्‍ट बन गए। चिनफ‍िंग जब 25 वर्ष के थे तब उनके पिता की पार्टी में दोबारा वापसी हुई। पिता की मदद से चिनफ‍िंग का करियर तेजी से आगे बढ़ा। धीरे-धीरे पार्टी में उनके सहयोगियों की संख्‍या काफी बढ़ गई। सत्‍तर के दशक में वह चीन की सेना में शामिल हो गए। ली के मुताबिक चिनफ‍िंग की निगाह हमेशा लक्ष्‍य पर होती थी और वह बेहद महत्‍वाकांक्षी थे। चिनफ‍िंग ने पार्टी के टाप नेताओं की सूची में पहुंचने का पक्‍का इरादा कर लिया था।

6- चिनफ‍िंग उस वक्‍त सुर्खियों में रहे जब उन्‍होंने अपनी मौजूदा पत्‍नी पेंग लियुआन से शादी की। पेंग चीन की एक मशहूर गाय‍िका थीं। चिनफ‍िंग की पहली शादी टूट गई थी। काफी वर्षों तक चिनफ‍िंग की पहचान उनके पति के तौर पर रही थी। चिनफ‍िंग हमेशा रिजर्व और सतर्क रहते थे ताकि उनके दामन में कोई दाग नहीं लगे।

7- वर्ष 2012 में राष्‍ट्रपति बनने से पहले चिनफ‍िंग आयोवा के दौरे पर गए थे। वह एलेनोर के घर पर ठहरे थे। इसी वर्ष च‍िनफ‍िंग चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के नेता बने। वह कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के तमाम खेमों के आम सहमति से चुने गए नेता थे। सत्‍ता में आने के बाद उन्‍होंने चीन में एक साफ सुथरी सरकार का वादा किया। चिनफ‍िंग ने देश में भ्रष्‍टाचार के खिलाफ सख्‍त अभियान चलाया। उनका सख्‍त फरमान था कि जो पैसा कमाना चाहता है वह कम्‍युनिस्‍ट पार्टी छोड़कर जाए। चिनफ‍िंग ने सरकार के शाही खर्चों पर रोक लगाई। बड़े-बड़े भोजों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। सरकारी कारों के काफ‍िलों को बंद कर दिया गया। उस वक्‍त किसी को इस बात का अनुमान नहीं था कि वह पांच वर्षों मे एक शक्तिशाली नेता बनकर उभरेंगे।

8- चीन में कम्‍युनिस्‍ट पार्टी में एक नई संस्‍कृति का जन्‍म हुआ। कम्युनिस्ट पार्टी, बरसों से घूसखोरी, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से ही चलती रही है। चिनफ‍िंग ने इस पर सख्‍ती से रोक लगाई। चिनफ‍िंग उस वक्‍त भी सुर्खियों में आए जब चाऊ योंगकांग को मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि, चाऊ के गांव के लोग यह मानते हैं कि चिनफ‍िंग ने उसके साथ गलत व्‍यवहार किया। चाऊ के पहले उनके एक कारोबारी साझीदार को मौत की सजा दी गई थी। चाऊ के बारे में ये भी कहा जाता है कि वो कम्युनिस्ट पार्टी में चिनफ‍िंग के विरोधी खेमे से संबंध रखते थे।

9- चिनफ‍िंग के शासन काल में बहुत बड़े नेता और कारोबारी लापता हो गए। यह भी कहा जाता है कि इसमें अधिकतर नजरबंद हैं। भ्रष्‍टाचार के आरोप में चिनफ‍िंग ने कई नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया। अपने दूसरे कार्यकाल में चिनफ‍िंग पार्टी पर नियंत्रण की लड़ाई लड़ रहे थे। इसके अलावा वह इंटरनेट पर काबू पाना चाहते हैं। कानून और तकनीक की मदद से उन्‍होंने इंटरनेट पर काफी हद तक पाबंदी लगा दी है। वह साइबर सुरक्षा को सुरक्षा का मुद्दा मानते हैं। कोई भी फर्जी खाता बनाकर चीन में सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकता। इतना ही नहीं विदेश जाने वाले चीन के नागरिकों पर भी साइबर सुरक्षा एजेंसियों की निगाह रहती है।

10- चीन में चिनफ‍िंग के करीबी लोगों को सरकारी चाबुक का सामना करना पड़ा। इसमें शू झियोंग प्रमुख है। उन्‍होंने बोलने की आजादी की मांग करते हुए नागरिकों का एक मंच खड़ा किया था। उन्हें देशहित के खिलाफ काम करने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में शू ने कहा कि देश का संविधान उन्हें बोलने की आजादी देता है। चिनफ‍िंग राज में कम्युनिस्ट क्रांति या इसके नेताओं पर सवाल उठाना जुर्म है। भले ही वह और उनका परिवार माओ के जुल्म के शिकार रहे हों। चिनफ‍िंग माओ की परंपरा को ही आगे बढ़ाना चाहते हैं। वह खुद को माओ का वारिस समझते हैं।