पेट्रोल-डीजल में राहत देने पर गैर भाजपाई सूबे तैयार नहीं, अभी तक 22 राज्यों ने घटाए, 14 की चुप्पी

 

पेट्रोल-डीजल में राहत देने पर गैर भाजपाई राज्य तैयार नहीं। (फाइल फोटो)
पेट्रोल व डीजल पर शुल्क घटा कर आम जनता को राहत देने के मुद्दे पर जम कर राजनीति हो रही है। तीन नवंबर को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में क्रमश पांच रुपये और 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा की थी।

 ब्यूरो, नई दिल्ली।  पेट्रोल व डीजल पर शुल्क घटा कर आम जनता को राहत देने के मुद्दे पर जम कर राजनीति हो रही है। तीन नवंबर को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में क्रमश: पांच रुपये और 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर आम जनता को राहत पहुंचाने की घोषणा की थी। इसके बाद शनिवार तक 22 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से स्थानीय शुल्क (मूल्य वर्धित शुल्क-वैट) की दरों में कटौती की जा चुकी है, लेकिन अभी तक 14 राज्यों ने चुप्पी साध ली है जो विपक्षी दलों का शासन है।

केरल और आंध्र प्रदेश ने साफ तौर पर कह दिया है कि स्थानीय शुल्क में कटौती की कोई जरूरत नहीं है।पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक शनिवार देर शाम तक महाराष्ट्र, दिल्ली, बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, मेघालय, अंडमान व निकोबार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पंजाब और राजस्थान में स्थानीय शुल्क की कटौती नहीं की गई है।

सबसे ज्यादा कटौती केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, कर्नाटक और पुडुचेरी ने की है। इन तीनों राज्यों में पेट्रोल की कीमतों में क्रमश: 13.43 रुपये, 13.35 रुपये और 12.85 रुपये प्रति लीटर की कमी हुई है। डीजल की कीमतों में उक्त तीनों राज्यों में जनता को क्रमश: 19.61 रुपये, 19.49 रुपये और 19.08 रुपये प्रति लीटर की राहत मिली है।जिन राज्यों ने शुल्कों में कटौती नहीं की है उनमें से कुछ राज्य ऐसे हैं जहां देश में सबसे ज्यादा वैट लगाया जाता है।

महाराष्ट्र की बात करें तो वहां स्थानीय शुल्क की वजह से ही आज पेट्रोल व डीजल की कीमतें देश में सबसे ज्यादा हैं। वहां पेट्रोल पर 25 प्रतिशत वैट के अलावा 10.12 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त स्थानीय शुल्क वसूला जाता है। डीजल पर वहां 24 प्रतिशत का वैट व तीन रुपये का अतिरिक्त स्थानीय शुल्क लगाया जाता है। केरल में पेट्रोल पर 30.08 प्रतिशत वैट के साथ एक प्रतिशत अतिरिक्त बिक्र कर के अलावा एक प्रतिशत अधिभार अलग से लागाया जाता है।डीजल पर वहां की सरकार 22.76 प्रतिशत वैट और दूसरे बिक्त्री कर पेट्रोल जैसे ही लगाए जाते हैं। बंगाल में 25 प्रतिशत वैट के अलावा वैट पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स पेट्रोल पर वसूला जाता है जबकि डीजल पर 17 प्रतिशत वैट और वैट पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाया जाता है। कांग्रेस शासित राजस्थान में पेट्रोल पर 36 प्रतिशत वैट के अलावा सड़क विकास अधिभार भी लगाया जाता है। जबकि डीजल पर 26 प्रतिशत का वैट और सड़क विकास अधिभार अलग से लागू है।