पीएम मोदी से प्रेरित हो एक व्‍यक्ति ने गांव के विकास पर खर्च किए 25 करोड़ रुपये, अब पहुंचे राष्‍ट्रपति

 

पीएम मोदी की प्रेरणा से भिवानी के सूई गांव को उद्योगपति श्रीकृष्ण जिंदल ने संवारा, अब राष्ट्रपति गांव आए
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 2014 में शुरू हुई आदर्श गांव बनाने की प्रेरणा ने सूूई गांव की तकदीर और तस्वीर बदल दी। प्रधानमंत्री की योजना से प्रेरित होकर 1962 में गांव छोड़ कर गए श्रीकृष्ण जिंदल और उनके परिवार ने गांव को गोद लिया। स्वप्रेरित आदर्श गांव बनाया।

 भिवानी: हर काम के लिए सरकार को कोसना और प्रगति को सरकार की ही जिम्मेदारी मानना कोई नई बात नहीं है, लेकिन हरियाणा के एक गांव ने दिखाया है कि अगर मन में निश्चय हो, इच्छाशक्ति हो तो सरकार के दिखाए रास्ते पर चलकर खुद भी स्वावलंबन की आदर्श परिभाषा लिखी जा सकती है। यह कहानी है भिवानी जिले के गांव सूई की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 2014 में शुरू हुई आदर्श गांव बनाने की प्रेरणा ने सूूई गांव की तकदीर और तस्वीर बदल दी। प्रधानमंत्री की योजना से प्रेरित होकर 1962 में गांव छोड़ कर गए श्रीकृष्ण जिंदल और उनके परिवार ने गांव को गोद लिया। स्वप्रेरित आदर्श गांव बनाया।

इसका परिणाम यह है कि आज महामहिम राष्ट्रपति गांव में बनी झील, आडिटोरियम, स्कूल का लोकार्पण करने आए हैैं। राष्‍ट्रपति यहां लंच भी करेंगे तो साथ ही कई विकास कार्यों का लोकापर्ण करेंगे। उद्योगपति श्रीकृष्‍ण जिंदल ने गांव के विकास पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। ग्रामीण भी गदगद हैं। सीएम मनोहर लाल ने भी गांव के लिए कई घाेषणाएं कर दी हैं।

2015 में हुई थी गांव के विकास की शुरुआत

श्रीमती महादेई परमेश्वरी दास जिंदल चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से 2015 में आदर्श गांव बनाने की शुरूआत हुई। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल स्वयं गांव पहुंचे। छह साल बाद 17 नवंबर को अब 25 करोड़ रुपये की लागत से सुधरे इस सूई गांव के काम को देखने स्वयं राष्ट्रपति महामहिम राम नाथ कोविन्द पहुंचे हैं। घोषणाएं हुई तो इस पर श्रीकृष्ण जिंदल अपने ट्रस्ट की तरफ से 100 करोड़ रुपये लगाने को तैयार हैं।

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भिवानी जिले के गांव सूई में बनाया गया आडिटोरियम। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सड़क का निर्माण करते हुए।

भिवानी जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर स्थित है गांव सूई। 300 साल पहले यह गांव बसा था। गांव बसने के बाद अनेक परिवार व्यापार केलिए बाहर आते-जाते थे। उसी कड़ी में श्रीकृष्ण जिंदल अपने परिवार के मुंबई चले गए थे। वहां पर रसायनों का काम किया। गांव के पैतृक आवास पर कभी कभार आना भी हो जाता था।

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भिवानी जिले के गांव सूई में बनाई गई झील।

2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों को एक गांव गोद लेकर उनको आदर्श बनाने की योजना शुरू की तो भले ही श्रीकृष्ण जिंदल सांसद नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने गांव को गोद लेने का संकल्प लिया। विकास कार्यों की योजना बनाई और 2015 में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से अपने द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्यों का आंरभ कराया। उसके बाद से निरंतर काम चला और आज गांव निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है।

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भिवानी जिले के गांव सूई में समाजसेवी एवं उद्योगपति श्रीकृष्ण जिंदल अपने गांव के साथी सुमेर और चांदराम के साथ चर्चा करते हुए।

गांव में झील भी, पार्क भी

-सूई-बलियाली रोड पर नौ एकड़ में झील और पार्क का निर्माण किया गया है। इसमें दो एकड़ में झील बनी है जिसमें चार नाव भी हैैं। गांव के लोग इसका आनंद लेते ह

-इसी प्रकार रेस्ट हाउस, पार्क का निर्माण किया गया है। पुराने पेड़ों को बखूबी खड़ा रखा गया है ताकि उनकी खूबसूरती से पार्क दमकता रहे। रात को लाइट जलने पर पार्क दूधिया रोशनी से नहा जाता है।

- गांव में चार पार्क बने हैैं। दो पार्क तो ऐसे हैैं जहां पहले गांव के लोग गंदगी फेंकते थे। पार्कों में झूलों के अलावा व्यायाम के लिए मशीनें भी लगी हुई हैं।

- गांव में बने सीनियर सेकेंडरी स्कूल को भी श्रीकृष्ण जिंदल की तरफ से समृद्ध किया गया। इस पर करीब दो करोड़ की राशि खर्च हुई। 10 कमरों का निर्माण करवाया गया। कंप्यूटर लैब बनवाई गई। पुस्तकालय और साइंस लैब का निर्माण कराया गया।

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भिवानी जिले के गांव सूई में बनाए गए आडिटोरियम का अंदर का दृष्य। यहीं पर राष्ट्रपति का कार्यक्रम होना है।

- तीन एकड़ में आडिटोरियम का निर्माण करवाया गया है। इस आडिटोरियम में एक थियेटर बनाया है जिसमें 400 से ज्यादा लोगों के बैठने की व्यवस्था हैं। इसमें फिल्म भी दिखाई जा सकती है। इसके अलावा तीन हाल और कमरे बनाए गए हैं।

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भिवानी-गांव सूई के मार्ग पर गांव में एंट्री से पहले बनाया गया गेट।

- आडिटोरियम सहित गांव में अनेक बड़ी जगहों पर सोलर सिस्टम लगाया गया है।

- गांव की अधिकांश गलियां पक्की हो चुकी हैैं हैं।

- गांव में सफाई कर्मचारी तैनात करने के साथ ट्रैक्टर और डंपर दिए गए ताकि गांव साफ सुथरा रहे।

- गांव में प्रवेश एंट्री के चार गेट हैं।

-2014 में प्रधानमंत्री के विचारों से प्रेरणा लेकर ही गांव को आदर्श गांव बनाया। सूई मेरा गांव है और हम इसको आगे लेकर जाएंगे। यह देश के नक्शे पर अलग दिखाई देगा। मैं अपने काम से सेवानिवृत्त हो चुका हूं। अब पूरा ध्यान समाज के लिए योगदान पर है।

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