जायडस कैडिला वैक्सीन की कीमत तय, 265 रुपये में मिलेगी एक डोज

 

जायडस कैडिला की तीन डोज वैक्सीन की कुल कीमत पड़ेगी 1074 रुपये (फाइल फोटो)
जायडस कैडिला की कोरोना रोधी वैक्सीन की कीमत तय हो गई है। इसकी एक डोज 265 रुपये में मिलेगी। यह सुई रहित वैक्सीन है और इसे लगाने के लिए विशेष प्रकार के एप्लीकेटर फार्मा जेट की जरूरत पड़ेगी जिसकी कीमत 93 रुपये होगी। कंपनी ने सोमवार को यह जानकार दी।

बेंगलुरु, रायटर। अहमदाबाद की दवा कंपनी जायडस कैडिला की कोरोना रोधी वैक्सीन की कीमत तय हो गई है। इसकी एक डोज 265 रुपये में मिलेगी। यह सुई रहित वैक्सीन है और इसे लगाने के लिए विशेष प्रकार के एप्लीकेटर 'फार्मा जेट' की जरूरत पड़ेगी, जिसकी कीमत 93 रुपये होगी। कंपनी ने सोमवार को यह जानकार दी।

कंपनी ने कहा है कि एप्लीकेटर समेत तीन डोज की वैक्सीन की कीमत 1,074 पड़ेगी। सरकार ने कंपनी को एक करोड़ डोज खरीद का आर्डर दिया है। यह वैक्सीन 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों और वयस्कों को लगाई जाएगी। देश में 12 से 18 साल के बच्चों के लिए यह पहली कोरोना रोधी वैक्सीन है। भारत के दवा नियामक ने अगस्त में इसके इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी।

सुई रहित वैक्सीन है जायडस कैडिला

शेयर बाजार को दी गई सूचना में जायडस के प्रबंध निदेशक शर्विल पटेल ने कहा कि यह सुई रहित वैक्सीन है यानी अब तक लगाई जा रही वैक्सीन की तरह से इसे देने के लिए सुई की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे जो लोग सुई से डरते हैं वो भी बिना किसी डर के इसे आसानी से लगवा सकते हैं। पटेल ने इसके बाजार में आने से टीकाकरण की रफ्तार तेज होने की उम्मीद जताई।

अभी भारत में इन दो कंपनी की टीका का हो रहा प्रयोग

देश में अभी कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान में सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की स्वदेशी कोवैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये दोनों दो डोज की वैक्सीन है और जायडस वैक्सीन की तुलना में इनकी कीमत भी कम है। स्पुतनिक वी के इस्तेमाल को भी मंजूरी मिली है, लेकिन उसका इस्तेमाल अभी नहीं हो रहा है।

28 दिन के अंतराल में दिया जाएगा तीन डोज

सूत्र ने बताया कि सीमित उत्पादन क्षमता की वजह से शुरू में सिर्फ वयस्कों को ही यह टीका दिए जाने की संभावना है। कंपनी के अधिकारियों ने मंत्रालय को बताया कि जायडस कैडिला प्रति माह जाइकोव-डी की एक करोड़ डोज मुहैया कराने की स्थिति में है। इसके तीन डोज को 28 दिनों के अंतराल पर दिया जाना है। देश में विकसित यह दुनिया का पहला ऐसा टीका है जो डीएनए-आधारित एवं सुई-रहित है। जाइकोव-डी को 20 अगस्त को दवा नियामक से आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली थी।