कोरोना काल में चिरंजीव ने किए 30 हजार से अधिक अंतिम संस्कार

करोलबाग निवासी चिरंजीव का जीवन लोगों की निश्वार्थ मदद को सपर्पित
किसी का पिता बन खिलाया तो कभी बेटा बन अंतिम संस्कार किया। उनके मुताबिक वो निश्शुल्क रूप से शवों के दाह संस्कार की सेवा के साथ 30 हजार से अधिक अंतिम संस्कार भी कर चुके हैं और अभी भी कर रहे हैं। ये है एंबुलेंस मैन की कहानी।

नई दिल्ली। कोरोना काल में जब लोग कोरोना से संक्रमित हुए तो उनके अपनों ने साथ छोड़ दिया। मरने के बाद परिवार के लोगों ने अंतिम संस्कार करना तो दूर शव को हाथ तक लगाना जरूरी नहीं समझा। ऐसे लोगों के लिए मसीहा साबित हुए हैं ''एंबुलेंस मैन'' के नाम से मशहूर चिरंजीव मल्होत्रा। करोलबाग निवासी चिरंजीव ने कोरोना काल में विभिन्न तरीकों से लोगों की सेवा की।

कभी किसी का पिता बन खाना खिलाया तो कभी किसी का बेटा बन अंतिम संस्कार किया। उनके मुताबिक वो निश्शुल्क रूप से शवों के दाह संस्कार की सेवा के साथ 30 हजार से अधिक अंतिम संस्कार भी कर चुके हैं और अभी भी कर रहे हैं। इसमें ज्यादातर वो उन शवों का अंतिम संस्कार किया, जिनके खुद के घरवाले हाथ लगाने से डर रहे थे। वो कहते हैं कि अगर हर कोई घर बैठ जाएगा तो लोगों की मदद कौन करेगा। इसलिए वो हर जरूरतमंद की मदद करते हैं।

शवों का श्मशाम घाट पहुंचाने का भी किया कार्य

उनके मुताबिक वो अस्पताल में भर्ती मरीजों की मृत्यु की सूचना के बाद उनके परिजनों का इंतजार करते। परिजन के न आने के बाद वो खुद ही अपनी एंबुलेंस से शवों को श्मशान घाट ले जाते और पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कराते हैं। उनके मुताबिक इस दौरान कई ऐसे लोगों से भी मुलाकात हुई जो आर्थिक समस्या के चलते अपने परिजनों का अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे थे। चिरंजीव ऐसे लोगों की आर्थिक सहायता के साथ-साथ उन्हें अंतिम संस्कार का सारा सामान दिलाते हैं।

एंबुलेंस मैन बनने की कहानी

चिरंजीव बताते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान एक वक्त ऐसा आया जब लोगों को श्मशान घाट जाने की लिए एंबुलेंस नहीं मिल रही थी। इस समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए इन्होंने खुद की छह एंबुलेंस चलवाई और शवों को श्मशान तक पहुंचाने का कार्य भी किया। इसके साथ ही कई मरीजों को अस्पताल पहुंचाया। उन्होंने अपनी बुजुर्गों को टीकाकरण केंद्र पहुंचाकर टीका लगवाने के लिए भी एंबुलेंस चलवाई।

आक्सीजन और दवाइयां भी उपलब्ध कराई

कोरोना के दौरान किसी-किसी के घर में तो पूरा का पूरा परिवार ही संक्रमित था। ऐसे में इन्होंने इन परिवारों की मदद के लिए निश्शुल्क दवाइयां पहुंचाई और आक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराया। इसके साथ ही उन्होंने कोरोना के दौरान सात हजार से अधिक परिवारों को निश्शुल्क राशन वितरण किया और लंगर सेवा भी शुरू की।