भारतीय होनहारों ने AI के लिए बनाई कमाल की कंप्यूटर लैंग्वेज, जानें क्या हैं खूबियां

 

संस्कृत, हिंदी सहित किसी भी भाषा में की जा सकेगी प्रोग्रामिंग।
यलो सबमरीन इनीशिएटिव के संस्थापक आर्यमित्र पटैरिया ने बताया कि एआइ की प्रोग्रामिंग के लिए अब 20 लाइनों वाला लंबा-चौड़ा जटिल कोड महज दो साफ-सुथरी लाइनों में लिखा जा सकेगा। इससे दस दिन तक चलने वाले प्रोजेक्ट को एक दिन में भी पूरा किया जा सकेगा।

नई दिल्ली। प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती है। यह साबित कर दिखाया है दिल्ली के डीएवी स्कूल के 12वीं कक्षा के दो होनहार छात्रों ने। महज 17 साल की उम्र के आर्यमित्र पटैरिया और प्रणत शर्मा ने उच्च स्तरीय कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा विकसित की है। छात्रों की इस उपलब्धि को आइटी विशेषज्ञ भी सराह रहे हैं। छात्रों ने विकसित की गई कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा को 'यलो सबमरीन' नाम दिया है। इसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) की स्क्रिप्टिंग के लिए सर्वाधिक अनुकूल और दक्ष करार दिया गया है। दावा है कि यह पहली 'मेड इन इंडिया' एआइ फ्रेंडली हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है।

दो लाइनों में लिख सकेंगे कोड

यलो सबमरीन इनीशिएटिव के संस्थापक आर्यमित्र पटैरिया ने बताया कि एआइ की प्रोग्रामिंग के लिए अब 20 लाइनों वाला लंबा-चौड़ा जटिल कोड महज दो साफ-सुथरी लाइनों में लिखा जा सकेगा। इससे दस दिन तक चलने वाले प्रोजेक्ट को एक दिन में भी पूरा किया जा सकेगा। जिससे कीमती समय और संसाधनों की बचत होगी। यही नहीं, यह ऐसी पहली कंप्यूटर भाषा है, जिसे किसी भी भाषा की टाइपोग्राफी (की-वर्ड) में लिखा जा सकता है। अब तक उपलब्ध कंप्यूटर भाषा में टाइपोग्राफी को परिवर्तित नहीं किया जा सकता था, लेकिन इसमें मल्टीपल टाइपोग्राफी की अनूठी सुविधा है। इससे अंग्रेजी पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। आर्यमित्र की मानें तो यलो सबमरीन का पहला संस्करण अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत (वैकल्पिक) टाइपोग्राफी की सुविधा सहित जारी किया गया है।

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वेबसाइट से कर सकते डाउनलोड

इसे यलो सबमरीन इनीशिएटिव की वेबसाइट 'डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.यलोसबमरीन.ओआरजी.इन' से डाउनलोड किया जा सकता है। आर्यमित्र ने एआइ-मशीन लर्निंग पर एक किताब भी लिखी है, जो दिसंबर तक बाजार में होगी।

नासा विज्ञानी भी परखेंगे भाषा

उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल रहे प्रणत शर्मा ने बताया कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के विज्ञानियों के समक्ष भी डेमो देने जाएंगे। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान एआइ पर निर्भर हो चला है और नासा कहती रही है कि एआइ सरीखे अत्याधुनिक तकनीक के लिए कंप्यूटर भाषा का अत्याधुनिक नहीं होना एक चुनौती है। यही नहीं, नासा विज्ञानियों ने कंप्यूटर भाषा तैयार करने में संस्कृत के कारगर होने पर भी जोर दिया था। बकौल प्रणत विकसित की गई कंप्यूटर भाषा में यह दक्षता भी है।

बहुत सही प्रोग्रामिंग भाषा

यलो सबमरीन एआइ के लिए बहुत सही प्रोग्रामिंग भाषा है। इससे मशीन लर्निंग व लेखन बेहद आसान और सुव्यवस्थित होने जा रहा है। यह भाषा निश्चित ही क्रांतिकारी उपलब्धियों की नई राह खोलेगी।

डी. जानी, टेक्नोलाजिस्ट

प्रोग्रामिंग को बहुत आसान बना दिया

एआइ-मशीन लर्निंग पूरी तरह से गणित और प्रोग्रामिंग के परिष्कृत एकीकरण पर आधारित तकनीक है और यलो सबमरीन इसी परिष्कृत स्तर पर बेहद कारगर कंप्यूटर भाषा है। इसने प्रोग्रामिंग को बहुत आसान बना दिया है।

डा. सी. फर्को, डिपार्टमेंट आफ क्वांटम फिजिक्स, यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया, डेविस, अमेरिका

मेक इन इंडिया या स्वदेशी अभियान का उत्कृष्ट उदाहरण

यलो सबमरीन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया या स्वदेशी अभियान का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके द्वारा बहुत से जटिल विषयों जैसे साइबर सिक्योरिटी, स्पीच प्रोसेसिंग, कंप्यूटर विजन, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग आदि पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित तकनीकों से शोध किया जा सकता है। अब मशीन लर्निंग व डीप लर्निंग को सीखना और भी आसान हो जाएगा।

प्रो. अरुण शर्मा, विभागाध्यक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस व डाटा साइंस, इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी महिला विश्वविद्यालययलो सबमरीन पर एआइ प्रोग्रामिंग का मेरा अनुभव कमाल का रहा। यह भारत में बनी अब तक की सबसे एडवांस्ड लैंग्वेज है। यंग इंडिया की इस प्रतिभा को देख मैं सुखद आश्चर्य से भर उठी हूं।

सुरभि शर्मा, टेक्नोलाजिस्ट, टीसीएस, गुरुग्राम

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