आखिर क्‍यों जवान अपने ही साथियों पर कर देते हैं अंधाधुंध फायरिंग, पढ़ें- एक्‍सपर्ट की राय

 

जवानों का तनाव बनता है अप्रिय घटनाओं की वजह
सुकमा में सीआरपीएफ के जवान द्वारा अपने ही जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग कर चार साथियों की जान लेने की घटना ने सभी को हैरानी में डाल दिया है। इससे ये सवाल उठता है कि आखिर इस तरह की घटनाएं क्‍यों होती हैं।

नई दिल्‍ली । छत्तीसगढ़ के सुकमा में सीआरपीएफ (CRPF) जवान द्वारा अपने ही साथियों पर गोलियां चलाए जाने की घटना ने हर किसी को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसा क्‍यों होता है। इस तरह की ये कोई पहली घटना नहीं है बल्कि इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। ताजा घटना सीआरपीएफ के 4 जवानों की मौत हो गई और तीन घायल हो गए हैं। ये घटना लिगम पल्ली सीआरपीएफ 50 बटालियन कैंप की है।

जानकार मानते हैं कि इस तरह की घटनाओं के पीछे सबसे बड़ी वजह तनाव होता है। इस तनाव की बड़ी वजह में कुछ बातें शामिल हैं। दरअसल, जवानों का जीवन बेहद कष्‍टमय होता है। ड्यूटी की लंबी अवधि और उस पर सुविधाओं का अभाव, हर वक्‍त खतरा और इन सभी के बीच घर जाने के लिए छुट्टी मिलने में होने वाली देरी इस तनाव का कारण बनती है। 

दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर डाक्‍टर गोपाल का कहना है कि जवानों के दिल और दिमाग पर तनाव कई बार इस कदर हावी हो जाता है कि उनको छुट्टी न मिलने की वजह से गुस्‍सा फूट पड़ता है। पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आई है जिसमें छुट्टी न मिलने की वजह से तनाव में आए जवान ने अपने ही साथियों पर अंधाधुंध गोलियां चला दी थींं। 

डाक्‍टर गोपाल मानते हैं कि इस तरह की घटनाओं से बचने का एक तरीका ये है कि जवानों की प्रोपर तरीके से काउंसलिंग की जाए। इसके अलावा जवान की संख्‍या को बढ़ाया जाए। साथ ही उन्‍हें एक अंतराल पर छुट्टी पर जाने की इजाजत मिल सके। इसके अलावा दुगर्म इलाको में तैनात जवानों को अपने परिजनों का हाल-चाल जानने का भी पूरा मौका मिलना चाहिए। जवानों को इस बात का अहसास नहीं होना चाहिए कि वो अपने घर से दूर हैं और उन्‍हें जरूरत के समय घर जाने का मौका शायद ही मिलेगा।  

आपको बता दें कि सुकमा जिले में हुई घटना की फिलहाल कोई वजह सामने नहीं आ सकी है। लेकिन अधिकारी इस मामले की जांच में जुटे हैं। डाक्‍टर गोपाल इस तरह की घटना को दिल दहला देने वाली मानते हैं। उनका कहना है कि जवानों को तनाव मुक्‍त रखने के हर संभव उपाय किए जाने बेहद जरूरी हैं।