दिल्ली-एनसीआर के लाखों लोगों के लिए यूपी गेट से आई बुरी खबर

 

Kisan Andolan: दिल्ली-एनसीआर के लाखों लोगों के लिए यूपी गेट से आई बुरी खबर
संयुक्त किसान मोर्चा के गाजीपुर सीमा के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने कृषि कानून विरोधी धरना स्थल यूपी गेट (गाजीपुर सीमा) पर बदलते मौसम के अनुरूप व्यवस्थाएं करने का एलान किया है। इससे साफ है कि प्रदर्शनकारी यहां से नहीं हटेंगे और न दिल्ली जाने वाला रास्ता खुलेगा।

नई दिल्ली/गाजियाबाद ,तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली-एनसीआर के चारों बार्डर (सिंघु, टीकरी, शाहजहांपुर और टीकरी) पर जारी प्रदर्शन को आगामी 26 नवंबर को एक साल पूरे हो जाएंगे। इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से ऐलान किया गया है कि वह दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बार्डर को खाली नहीं करने जा रहे हैं, बल्कि प्रदर्शनकारियों ने यहां पर ठंड के मद्देनजर कई तरह के इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। 

नहीं खाली करेंगे बार्डर, रास्ता रहेगा बंद

संयुक्त किसान मोर्चा के गाजीपुर सीमा के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने कृषि कानून विरोधी धरना स्थल यूपी गेट (गाजीपुर सीमा) पर बदलते मौसम के अनुरूप व्यवस्थाएं करने का एलान किया है। इससे साफ हो गया है कि प्रदर्शनकारी यहां से नहीं हटेंगे और न ही दिल्ली जाने वाला रास्ता खुलेगा।

मंगलवार को किसान संगठन लेंगे बड़ा फैसला

जगतार सिंह बाजवा ने रविवार को कहा कि 26 नवंबर को किसान आंदोलन का एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। नौ नवंबर को सिंघु सीमा पर संयुक्त किसान मोर्चा आगे की योजना तय करेगा। उसी के अनुरूप अगला कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मौसम बदल रहा है। ठंड शुरू हो गई। बदलते मौसम के अनुरूप यहां आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी।

लगातार दे रहे हैं रास्ता नहीं खोलने का संदेश

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यूपी गेट से होकर दिल्ली जाने वाले रास्तों के खुलने की अटकलें शुरू हो गई थीं। 21 अक्टूबर को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने यहां लगे एक तंबू के पर्दे और कुछ बल्लियों को खोलकर दिल्ली पुलिस पर रास्ता बंद करने का आरोप लगाया। 29 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने फ्लाईओवर के ऊपर से अपने बैरिकेड हटा लिए। उसी दिन भाकियू ने यूपी गेट पर प्रदर्शन यथावत जारी रखने का एलान किया। एक नवंबर को राकेश टिकैत ने ट्वीट करके 26 नवंबर के बाद पक्की किलेबंदी करने की चेतावनी दी। इन सबसे स्पष्ट हो गया कि प्रदर्शनकारी न तो हाईवे से तंबू हटाएं न ही रास्ता देंग

े।