कोविड प्रोटोकाल के साथ मनाएं छठ त्योहार, जानें एक्सपर्ट की सलाह

 

छठ पूजा के दौरान कोविड प्रोटोकाल का पालन करना जरूरी (फाइल फोटो)
वर्तमान समय अनुशासित रहकर त्योहार मनाने का है क्योंकि कोरोना पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। दैनिक संक्रमण के मामले भले ही कम सामने आ रहे हैं लेकिन कोविड वायरस अभी है। इसलिए जरूरी है कि हम जब भी सार्वजनिक जगहों पर जाएं कोविड प्रोटोकाल का पालन करें।

नई दिल्लीन।  छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। पहले भले ही यह पर्व बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सीमित था, मगर बीते कई सालों से यह पूरे देश में मनाया जा रहा है। जहां भी पूर्वांचल के लोग हैं, वहां छठ मनाया जा रहा है। इस विशेष त्योहार के अवसर पर लोग अपने घरों की ओर भी जा रहे हैं। असल में, इस पर्व को मनाने के पीछे जो दर्शन है, वह विश्वव्यापी है। छठ पर्यावरण संरक्षण, रोग-निवारण व अनुशासन का पर्व है। इसका उल्लेख आदिग्रंथ ऋग्वेद में भी मिलता है।

वर्तमान समय अनुशासित रहकर त्योहार मनाने का है, क्योंकि कोरोना पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। दैनिक संक्रमण के मामले भले ही कम सामने आ रहे हैं, लेकिन कोविड वायरस अभी है। इसलिए जरूरी हो जाता है कि हम जब भी सार्वजनिक जगहों पर जाएं, कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें।

त्योहारों में कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन: डा एनके अरोड़ा

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स पटना और देवघर के प्रेसीडेंट डाक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि देश ने दस महीने से भी कम समय में टीकाकरण में सौ करोड़ का एक अहम पड़ाव हासिल कर लिया है। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इस पड़ाव तक पहुंचने में हमारी सबसे अधिक सहायता वैक्सीन आत्मनिर्भरता ने की। हम एक बड़ी आबादी तक वैक्सीन को सिर्फ इसलिए पहुंचा पाएं क्योंकि हमनें न सिर्फ वैक्सीन को विकसित किया बल्कि देश में ही वैक्सीन का निर्माण भी किया गया। उन्होंने कहा कि यह सब एक रात में प्राप्त नहीं किया गया, यह पूरे एक से डेढ़ साल की रणनीतिक सोच और कड़ी मेहनत का परिणाम है। 

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि देश के कोने कोने में हमारे कोरोना वारियर ने टीका पहुंचाया। लेकिन सरकार की रणनीति और इन योद्धाओं की मेहनत तभी कारगर होगी जब हम आने वाले कुछ महीने में और अधिक समझदारी का परिचय देंगे। कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है, कुछ राज्यों में अभी भी एक्टिव केस का प्रतिशत ज्यादा है। वैक्सीन को लोगों ने कोरोना से सुरक्षा के हथियार के रूप में अपना लिया है उन्हें भी त्योहार में विशेष एहतियात बरतनी होगी। जिन लोगों ने कोविड की पहली या दूसरी डोज ले ली है, उन्हें भी त्योहारों में कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करना है। निर्धारित दूरी, मास्क का प्रयोग और नियमित रूप से हाथ धोते रहने की आदत को व्यवहार में शामिल करें, ऐसा करने से हम अपने आसपास के वातावरण को कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रख सकते हैं।

कोविड नियमों का पालन करें, सुरक्षित रहें: डा सुरेखा किशोर

पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख शहर है गोरखपुर। एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ सुरेखा किशोर कहती हैं कि फिलहाल कोरोना के मामले कम हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि बीमारी खत्म हो गई है। इसलिए जब कभी घर से बाहर निकलें, तो मास्क हमेशा लगाकर रखें। मास्क का इस्तेमाल बिलकुल न छोड़ें। शारीरिक दूरी का पालन करें। साथ ही अपने हाथों को नियमित अंतराल पर सैनिटाइज करें। इसके अलावा, जब कभी समय और सुविधा मिले, तो अपने हाथों को साबुन और साफ पानी से जरूर धोएं । एक चीज का अवश्य ध्यान रखें कि त्योहारों में भीड़ इकठ्ठा न करें। घर पर ही त्योहारों को मनाएं। जितना हो सके, घर से बाहर कम से कम जाएं और बाहर स्पिटिंग (थूकना) बिल्कुल न करें। इन नियमों का पालन करने से हम सब सुरक्षित रह सकते हैं।

जरूरी न हो तो सार्वजनिक यात्रा से बचें: डा पीके सिंह

कई शहरों से लोग बिहार पहुंच रहे हैं। यह सिलसिला जारी है। एम्स पटना के निदेशक डा पीके सिंह कहते हैं कि बिहार जैसे राज्य में लोग त्योहार के मौसम में दूर से आते हैं। अपने परिवार के साथ पर्व मनाने आते हैं। रेल, बस और हवाई जहाज की यात्रा करते हैं। मेरी सलाह है कि यदि बहुत अधिक जरूरी न हो, तो इस साल सार्वजनिक यात्रा से बचा जा सकता है। त्योहार अगले साल भी होगा। कोरोना पर देश ने एक बार विजय हासिल कर लिया जाए, तो अगले साल सभी मिलकर त्योहार मनाएंगे। हमें और आपको अभी भी सावधान रहने की जरूरत है। लोगों को कोरोना अनुरूप व्यवहार का पालन करने के लिए प्रेरित करना होगा। त्योहारों के मौसम में सावर्जनिक जगहों पर लोग जाएं तो मास्क जरूर लगाकर जाएं। जितना संभव हो निर्धारित दूरी का पालन करें। जो लोग किसी गंभीर अथवा संक्रामक रोग से ग्रसित हैं, उन्हें सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचना चाहिए।

कोरोना अभी गया नहीं है: डा सौरभ वार्ष्णेय

वहीं, झारखंड के देवघर में स्थिति एम्स के निदेशक डा सौरभ वार्ष्णेय ने कहा कि कोरोना अभी गया नहीं है। हमारे देश के कुछ राज्य जैसे महाराष्ट्र और केरल में लगातार कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। हमें पूर्व के अनुभवों को भूलना नहीं चाहिए। कोरोना का यदि एक भी मरीज है तो हमें समझना चाहिए कि संक्रमण का खतरा टला नहीं है। लंबे समय से लोग एक दूसरे से मिले नहीं हैं, इसलिए उत्साह का होना लाजिमी है, लेकिन इसी उत्साह में कोरोना को हमारे बीच फिर से पांव पसारने का मौका भी मिलेगा। हमारी समझदारी ही कोरोना को दोबारा बढ़ने से रोक सकती है। बीते डेढ़ साल ने लोगों ने संयम का बेहतर तरीके से पालन किया है, अगले कुछ समय और इसी तरह का व्यवहार करना है। यकीन मानिए आपको बिल्कुल भी नहीं पता कि आपका कौन सा सगा रिश्तेदार वायरस के साथ घर में प्रवेश कर जाएं, इसलिए त्योहार में भी गैर जरूरी यात्रा से बचें।