घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस

 

वी द वीमेन आफ इंडिया ने दायर की है याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक घरों में प्रताड़ित महिलाओं को प्रभावी कानूनी सहायता मुहैया कराने और उनके लिए आश्रय गृह बनाने के लिए देश भर में पर्याप्त बुनियादी ढांचा मुहैया कराने की मांग वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है।

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश भर में घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में प्रताड़ित होने वाली शादीशुदा महिलाओं को प्रभावी कानूनी सहायता प्रदान करने और पतियों और ससुराल वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद उनके लिए आश्रय गृह बनाने की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्रीय मंत्रालयों से जवाब मांगा और मामले की सुनवाई छह दिसंबर को तय की है। एक गैर सरकारी संगठन 'वी द वीमेन आफ इंडिया' द्वारा दायर याचिका में घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों के उचित कार्यान्वयन, सुरक्षा अधिकारियों, सेवा प्रदाताओं की नियुक्ति, पीड़ितों की सुरक्षा के लिए आश्रय गृहों की स्थापना की मांग की गई है।

4.05 लाख मामलों में से 30 फीसद घरेलू हिंसा के मामले

याचिका में कहा गया है कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 15 साल से अधिक समय पहले लागू होने के बावजूद भारत में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा सबसे आम अपराध है। याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, 'महिलाओं के खिलाफ अपराध' के तहत दर्ज किए गए 4.05 लाख मामलों में से 30 प्रतिशत से अधिक घरेलू हिंसा के मामले थे।

केंद्र और राज्यों सरकारों को बनाया पक्षकार

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के निष्कर्षों का हवाला देते हुए, याचिका में कहा गया है कि घरेलू हिंसा की शिकार लगभग 86 प्रतिशत महिलाएं कभी मदद नहीं लेती हैं। जनहित याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया है।