गोरे होने की चाहत कहीं बिगाड़ न दे आपकी सेहत, पढ़िये- ताजा चौंकाने वाला शोध

 

त्वचा को गोरा करने वाली क्रीम का इस्तेमाल करते हैं तो सावधान, पढ़िये- ताजा चौंकाने वाला शोध
पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले दिल्ली के गैर सरकारी संगठन टाक्सिक लिंक ने अपनी शोध में पाया है कि भारत में आयातित त्वचा को गोरा करने वाली क्रीमों में उच्च स्तर की जहरीली पारा सामग्री और न्यूरोटाक्सिन का समावेश रहता है।

नई दिल्ली। त्वचा को गोरा करने वाली क्रीम का इस्तेमाल करने में थोड़ी सतर्कता बरतना जरूरी है। कारण, ऐसी क्रीम रंग गोरा करे या नहीं, लेकिन सेहत को नुकसान अवश्य पहुंचा सकती है। इन क्रीमों में शामिल रसायन और धातु जिंदगी भर के रोग भी दे सकते हैं। पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले दिल्ली के गैर सरकारी संगठन टाक्सिक लिंक ने अपनी शोध में पाया है कि भारत में आयातित त्वचा को गोरा करने वाली क्रीमों में उच्च स्तर की जहरीली पारा सामग्री और न्यूरोटाक्सिन का समावेश रहता है। टाक्सिक लिंक की नवीनतम रिपोर्ट ''त्वचा को गोरा करने वाली क्रीमों का काला सच : उपस्थिति'' चौकाने वाली जानकारी सामने लाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, पारा स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है और इसमें केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, जठरांत्र प्रणाली और गुर्दों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने भी इस तथ्य पर चिंता व्यक्त की है कि पारा शरीर के ऊतकों में जैव-संचित होता है और लंबी अवधि में इसका इस्तेमाल मस्तिष्क, हृदय, फेफड़ों और अजन्मे बच्चों तथा शिशुओं की प्रतिरक्षा प्रणाली को विशेष रूप से प्रभावित कर सकता है।

टाक्सिक लिंक ने देश के विभिन्न शहरों से 15 नामी ब्रांडों की क्रीम के नमूने लिए। पंद्रह में से छह नमूनों में पारा पाया गया। पांच नमूनों का स्तर खतरनाक यानी 4000 से 14000 पीपीएम के बीच था जबकि एक में पारा एक पीपीएम से नीचे यानी 0.3 पीपीएम था। दिल्ली में यह नमूने गफ्फार मार्केट, नवी मुंबई में वाशी, विजयवाड़ा में तारापेट मार्केट और त्रिवेंद्रम से लिए गए थे।

अध्ययन से यह भी पता चला कि पारा युक्त सभी छह नमूनों का निर्माण पाकिस्तान में किया गया था। जानकारी के मुताबिक भारत में, इसे रोकने के लिए ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स रुल्स 2020 के तहत एक सख्त विनियमन है। सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण और आयात में पारा यौगिक पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं, अनजाने में एक पीपीएम तक की अनुमति है। लेकिन यह रिपोर्ट बताती है कि पारा युक्त उत्पाद अभी भी भारतीय बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें पारे की मात्रा भी पीपीएम की वर्तमान अनुमेय सीमा से 1000 गुना है। हैरत की बात यह कि चीन, थाईलैंड, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों में निर्मित पारा युक्त क्रीम भी भारत में आसानी से उपलब्ध है और सख्त नियमों के बावजूद दुकानों पर आफलाइन च आनलाइन पोर्टल दोनों पर मिल रही है।

पारा युक्त क्रीम के उपयोग से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं। इसलिए नियामक अधिकारियों द्वारा अन्य देशों से आयातित त्वचा को गोरा करने वाली क्रीमों की निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है। उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए तकल एक उचित निगरानी प्रणाली स्थापित करने की भी जरूरत है। त्वचा को गोरा करने वाली उच्च पारा युक्त विषाक्त क्रीमों का आयात रोकना भी समय की मांग है। -पीयूष महापात्र, वरिष्ठ कार्यक्रम समन्वयक, टाक्सिक लिंक