क्‍या होता है ब्रेकडाउन और ब्रेकआउट, इन दोनों का लिंक है मानसिक तनाव और थकान से

 

मानसिक तनाव और मानसिक थकान का शरीर पर गंभीर असर पड़ता है।
ब्रेकडाउन और ब्रेकआउट दोनों ही हमारे स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़े हैं। ब्रेकडाउन वो स्थिति है जब मानसिक रूप से हम थक जाते हैं जबकि ब्रेकआउट तब होता है जब हम मानसिक रूप से टूट जाते हैं। ये दोनों ही स्थिति बेहद खराब होती हैं।

बर्नआउट वह स्थिति है, जब काम करते-करते किसी का मन बुरी तरह से थक चुका होता है। उसमें इतनी ऊर्जा भी नहीं बचती कि वह आगे और काम कर सके। जबकि ब्रेकडाउन उस स्थिति को कहते हैं, जब कोई व्यक्ति पूरी तरह से मानसिक रूप से टूट जाता है और उसे आगे अपने जीवन का कोई रास्ता दिखाई नहीं देता। तब वह विवश होकर फूट-फूट कर रोने लगता है।

ऐसी स्थित को इमोशनल ब्रेकडाउन के दौर से गुजरना कहा जाता है। असल में ये मन के वे बड़े जख्म हैं, जो दूसरों को दिखाई नहीं देते। कई सेलिब्रिटीज, जिन्हें हम अपने नायक या नायिकाएं समझ बैठते हैं, वे वास्तव में एक दोहरी जिंदगी जी रहे हैं। बुलंदियां छूने की होड़ में अपने मन को चुप करा कर काम करते चले जा रहे हैं। मोबाइल फोन के फिल्टर वाले लेंसों की मदद से वे अपने विकारों को दुनिया से तो छुपा लेते हैं, पर खुद से नहीं छुपा पाते।

असल में ये लोग कभी खुद को समय नहीं दे पाते। इन्हें अपने मानसिक स्वास्थ्य के साथ बहुत से समझौते करने पड़ते हैं।बर्नआउट की समस्या से केवल लोकप्रिय हस्तियां ही नहीं, बल्कि आम लोग भी इससे परेशान हैं। इसलिए हमें खुद पर और अपने परिवार के सदस्यों पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि कहीं हमारे परिवार का कोई सदस्य तो इसी तरह इमोशनल ब्रेकडाउन या बर्नआउट का शिकार नहीं हो रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन बर्नआउट को एक मानसिक समस्या मानता है।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक यह एक ऐसा सिंड्रोम है, जो काम के दौरान होने वाले तनाव से पैदा होता है और यह कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है। इसके लक्षण हैं, शरीर में ताकत की कमी महसूस होना और बहुत जल्दी थक जाना। ऐसे में व्यक्ति का काम पर जाने का मन नहीं करता। वह उदास रहता है और काम से एक दूरी बना लेता है। बर्नआउट होने पर दूसरों के प्रति कटुता का भाव पैदा हो सकता है और कार्यकुशलता में कमी भी देखी जाती है।

अमेरिकी कंपनी गैलप द्वारा किए गए एक सर्वे से पता चलता है कि दुनिया के करीब 23 प्रतिशत कर्मचारी मानते हैं कि वे अक्सर बर्नआउट का शिकार हो जाते हैं। ब्रिटेन में किए गए एक और अध्ययन के मुताबिक कर्मचारियों द्वारा अचानक छुट्टी मांगने के पीछे उनकी मानसिक परेशानियां एक बहुत बड़ी वजह हैं। कर्मचारियों द्वारा अचानक छुट्टी लेने से दुनिया की अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग 70 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है। यह सब कोविड के बाद से और ज्यादा होने लगा है।

अब सवाल यह है कि इससे बचने के लिए क्या किया जाए? तो इसका एक सरल उपाय यही है कि अपने काम और अपनी महत्वाकांक्षाओं को अपने मानसिक स्वास्थ्य पर हावी न होने दें, क्योंकि मन की बीमारी की दवा पैसों से नहीं खरीदी जा सकती।