देश भर में घरेलू कामगारों का सर्वे शुरू, पहुंचाया जा सकेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

 

अपनी तरह के पहले सर्वे में काम के घंटे से लेकर माहौल तक की ली जाएगी जानकारी (फोटो एजेंसी)
इस सर्वें से काम के घंटे मजदूरी और अनुबंध का प्रकार काम के लिए तय की जाने वाली दूरी कोरोना महामारी से पहले और बाद में रखे गए घरेलू कामगार मजदूरी तथा नौकरी पर इसके प्रभाव रहन-सहन का स्तर और सामाजिक सुरक्षा लाभ के बारे में भी जानकारी मिलेगी।

 नई दिल्ली। देश में पहली बार घरेलू कामगारों का सर्वे शुरू हुआ है। सोमवार को श्रम व रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसकी शुरुआत की। यह काम देश के सभी राज्य व केंद्रशासित प्रदेशों में किया जाएगा। 742 जिलों में होने वाले इस सर्वे का काम अगले एक साल में पूरा होने की उम्मीद है।

इस सर्वे के जरिए घरेलू कामगारों के काम करने की आयु, सामाजिक स्थिति, व्यावसायिक प्रशिक्षण व शिक्षा, उनके द्वारा किए जाने वाले काम, काम के दिनों की संख्या जैसी जानकारी जुटाई जाएगी। इससे काम के घंटे, मजदूरी और अनुबंध का प्रकार, काम के लिए तय की जाने वाली दूरी, कोरोना महामारी से पहले और बाद में रखे गए घरेलू कामगार, मजदूरी तथा नौकरी पर इसके प्रभाव, रहन-सहन का स्तर और सामाजिक सुरक्षा लाभ के बारे में भी जानकारी मिलेगी।

अब तक घरेलू कामगारों का कोई डाटा कहीं भी उपलब्ध नहीं है। श्रम व रोजगार मंत्रालय के मुताबिक घरेलू कामगारों के इस प्रकार सर्वे से उनसे जुड़ी सभी जानकारी सरकार के पास होगी जिससे इन घरेलू कामगारों को भी सरकारी लाभ का हिस्सा बनाया जा सकेगा। घरेलू कामगारों पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण का उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर घरेलू कामगारों की संख्या और अनुपात, औपचारिक-अनौपचारिक रोजगार, प्रवासी-गैर-प्रवासी, उनकी मजदूरी और अन्य सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं के संबंध में जानकारी जुटाना है।

ई-श्रम पोर्टल भी हो चुका लांच

कुछ माह पहले ही श्रम मंत्रालय ने असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों के पंजीयन के लिए ई-श्रम पोर्टल लांच किया था और अब तक आठ करोड़ से अधिक श्रमिक इस पोर्टल पर अपना पंजीयन करा चुके हैं।