चीन को मिलेगा कड़ा जवाब, भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होगी मिसाइल डिस्ट्रायर और सबमरीन

 

विशाखापट्टनम प्रोजेक्ट 15बी का पहला युद्धपोत है।
 भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते तनाव और दुनिया में बदलते सुरक्षा हालात से निपटने के लिए अपने बेड़े में एक मिसाइल डिस्ट्रायर और कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी को शामिल करेगी।

 नई दिल्‍ली, एजेंसी। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के मद्देनजर तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य से निपटने और क्षमता में वृद्धि के लिए अगले हफ्ते एक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रायर पोत 'विशाखापत्तनम' और कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी 'वेला' को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। इस संबंध में नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल सतीश नामदेव घोरमडे ने कहा कि युद्धपोत 'विशाखापत्तनम' को 21 नवंबर को बल में शामिल किया जाएगा, जबकि पनडुब्बी 'वेला' को 25 नवंबर को शामिल किया जाएगा। भारतीय नौसेना को सबसे बड़ा डिस्ट्रायर मिलेगा जो स्वदेश में तैयार किया गया है। इसे नौसेना ने ही डिजाइन किया है और मझगांव डाकयार्ड में बनाया गया है। विशाखापट्टनम प्रोजेक्ट 15बी का पहला युद्धपोत है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल चार स्वदेशी युद्धपोत बनने हैं। भारतीय नौसेना को इस क्लास का दूसरा युद्धपोत अगले साल, तीसरा 2024 और चौथा युद्धपोत 2025 में मिलेगा। इससे भारतीय नौसेना की मारक क्षमता काफी बढ़ जाएगी।

युद्धपोत 'विशाखापत्तनम' को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा शामिल किया जाएगा जबकि 'वेला' को शामिल करने के समारोह में मुख्य अतिथि नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह होंगे। 'वेला' कलवरी श्रेणी की चौथी पनडुब्बी है। ये दोनों मझगांव डाक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में बनाए गए हैं। इन्हें बल में शामिल करने के कार्यक्रम मुंबई के नौसेना डाकयार्ड में होंगे।

39 नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों का हो रहा निर्माण

नौसेना कमांडर ने कहा कि वर्तमान में विभिन्न भारतीय पोत कारखानों (शिपयार्ड) में 39 नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है, जिनसे भारत की समुद्री क्षमता को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा क‍ि हम सभी जानते हैं कि समुद्री वातावरण जटिल होता है। इसकी सुरक्षा केवल अधिक संख्या में अत्याधुनिक उपकरणों को बढ़ाने से बेहतर होती है।

तेजी से बदल रहा है क्षेत्रीय संतुलन

उन्होंने कहा क‍ि हम ऐसे समय में रह रहे हैं, जब शक्ति का वैश्विक और क्षेत्रीय संतुलन तेजी से बदल रहा है। सबसे तेजी से बदलाव का क्षेत्र निस्संदेह हिंद महासागर क्षेत्र है। वाइस एडमिरल घोरमडे ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं कि उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय नौसेना की मारक क्षमता लगातार बढ़ती रहे। 

विशाखापत्तनम के शामिल होने से विशिष्ट समूह में शामिल होगा भारत

वाइस एडमिरल ने कहा, 'विशाखापत्तनम के शामिल होने से भारत के उन्नत युद्धपोतों के डिजाइन और निर्माण की क्षमता वाले राष्ट्रों के विशिष्ट समूह में शामिल होने की पुष्टि हो जाएगी।' उन्होंने बताया कि इसमें विभिन्न स्वदेशी उपकरणों के अलावा कई प्रमुख स्वदेशी हथियार भी लगाए गए हैं, जिनमें भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड लिमिटेड द्वारा विकसित स्वदेशी मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने में सक्षम मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस एरोस्पेस की सतह से सतह में मार करने में सक्षम मिसाइलें और एलएंडटी द्वारा निर्मित तारपीडो व लांचर्स शामिल हैं। इस तरह इसके निर्माण में करीब 75 प्रतिशत सामग्री स्वदेशी है।

वाइस एडमिरल ने कहा कि पनडुब्बी का निर्माण बेहद जटिल प्रक्रिया है। इसमें पनडुब्बी के भीतर छोटे-छोटे उपकरणों को व्यवस्थित तरीके से लगाना होता है क्योंकि उसके अंदर जगह बेहद संकुचित होती है। बेहद कम देशों के पास इसकी औद्योगिक क्षमता होती है। पिछले 25 साल में भारत ने अपनी पनडुब्बियां बनाने की क्षमता साबित कर दी है।