हाई सिक्योरिटी बैरक में परिंदा भी नहीं मार सकेगा पर, तिहाड़ जेल की तर्ज पर सुद्धोवाला जेल परिसर में बनाए जाएंगे बैरक

 

तिहाड़ जेल की तर्ज पर बैरक सुद्धोवाला जेल परिसर में ही बनाएं जाएंगे।
जेलों में तमाम सुरक्षा प्रबंध के बावजूद मोबाइल का इस्तेमाल लड़ाई झगड़े के मामले व नशे पर रोकथाम नहीं लग पा रहा है। इसी समस्या को देखते हुए जेल में रहकर अपराध करने वाले कैदियों के लिए जल्द ही जेल प्रशासन हाई सिक्योरिटी बैरक बनाने जा रहा है।

 देहरादून: जेलों में तमाम सुरक्षा प्रबंध के बावजूद मोबाइल का इस्तेमाल, लड़ाई झगड़े के मामले व नशे पर रोकथाम नहीं लग पा रहा है। इसी समस्या को देखते हुए जेल में रहकर अपराध करने वाले कैदियों के लिए जल्द ही जेल प्रशासन हाई सिक्योरिटी बैरक बनाने जा रहा है। तिहाड़ जेल की तर्ज पर बैरक सुद्धोवाला जेल परिसर में ही बनाएं जाएंगे, जिनमें कुख्यात अपराधियों पर नजर रखने के लिए अत्याधुनिक सुरक्षा यंत्र लगाए जाएंगे।

हरिद्वार, अल्मोड़ा और पौड़ी जेल में मोबाइल के इस्तेमाल, रंगदारी मांगने, हत्या की फिरौती जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। घटनाओं के बाद जेल प्रशासन की ओर से या तो स्टाफ को बदल दिया जाता है या फिर कैदियों को इधर-उधर किया जाता है। जेलों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए जेल प्रशासन की ओर से हाल ही में हाई सिक्योरिटी बैरक बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

प्रस्ताव के तहत सुद्धोवाला जेल परिसर में कुख्यात कैदियों के लिए 50 बैरक बनाए जाएंगे। प्रदेश में इस समय 15 ऐसे कुख्यात कैदी हैं, जो जेलों में रहकर गैंग का संचालन कर रहे हैं। इनके लिए हाई सिक्योरिटी बैरक में अलग-अलग बैरक की व्यवस्था की जाएगी। बैरकों में बाहर तलाशी से लेकर हाई रेज्यूलेशन के कैमरे, स्केनर और जैमर लगाए जाएंगे।

बाहर की फोर्स करेगी सुरक्षा

जेल प्रशासन ने बैरकों में सुरक्षा के लिए बाहर से फोर्स तैनात करने की योजना बनाई है। इसमें पीएसी या आइआरबी की फोर्स का ट्रेंड स्टाफ शामिल किया जा सकता है। बैरकों की 24 घंटे गिनरानी जेल अधीक्षक करेंगे। वहीं, आइजी जेल नियमित तौर पर अपडेट लेते रहेंगे।

स्टाफ न होने के चलते नहीं हो पा रही कार्रवाई

जेलों में अपराध होने पर अक्सर जेल स्टाफ का ही हाथ सामने आता है। अल्मोड़ा जेल में मोबाइल व अन्य सामान बरामद होने के बाद जेल प्रशासन ने पांच कर्मियों पर कार्रवाई तो की, लेकिन अब पौड़ी जेल से चार व्यक्तियों की हत्या की सुपारी देने के मामले में प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि प्रदेश की 11 जेलों में सिर्फ सात जेल अधीक्षक तैनात हैं, जबकि चार जेलों में जेलर ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जेल प्रशासन के सामने यह भी समस्या है कि कार्रवाई करने के बाद किसे कैदियों की सुरक्षा में लगाया जाए।

उत्तराखंड के आइजी जेल पुष्पक ज्योति का कहना है कि प्रदेश की जेलों में कई ऐसे कैदी हैं जो जेलों में रहकर अपराध संचालित कर रहे हैं। इनके लिए हाई सिक्योरिटी बैरक निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव को अपर मुख्य सचिव गृह की ओर से सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार की अनुमति मिलने के बाद इसकी डीपीआर तैयार की जाएगी। बैरक तिहाड़ जेल की तर्ज पर बनाए जाएंगे, जो अत्याधुनिक सुरक्षा से लैस रहेंगे।