प्रजा के लिए साल में एक दिन खुलता है राजमहल का मंदिर, यूपी के बलरामपुर में है डेढ़ सौ वर्ष पुराना मंदिर

 

डेढ़ सौ वर्ष पुराने मंदिर में प्रतिदिन राजपरिवार के पुरोहित करते हैं पूजन।
Publish Date:Thu, 11 Nov 2021 03:45 PM (IST)Author: Anurag Gupta

बलरामपुर राज परिवार के नीलबाग पैलेस में राधा-कृष्ण का भव्य मंदिर निर्मित है। राज परिवार के पुरोहित प्रतिदिन मंदिर में सुबह शाम पूजन-अर्चन करते हैं। यह मंदिर अपनी विशिष्ट निर्माण शैली के लिए भी जाना जाता है। अक्षय नवमी को आम आदमी के लिए खुलता है मंदिर का पट।

बलरामपुर। नगर में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां साल में सिर्फ एक दिन आमजन भगवान का दर्शन-पूजन करते हैं। राज परिवार के इस देवालय में डेढ़ सौ वर्षों से यह परंपरा कायम है। अक्षय नवमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर की एक झलक पाने को लालायित रहते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धालुओं की सप्तकोसी परिक्रमा तब तक अधूरी रहती है जब तक वे यहां पूजा न कर लें। 

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दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला की दिखती है झलक : बलरामपुर राज परिवार के नीलबाग पैलेस में राधा-कृष्ण का भव्य मंदिर निर्मित है। राज परिवार के पुरोहित प्रतिदिन मंदिर में सुबह शाम पूजन-अर्चन करते हैं। यह मंदिर अपनी विशिष्ट निर्माण शैली के लिए भी जाना जाता है। मंदिर में अति प्राचीन दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला की विशिष्टता दीवार व छत में दिखाई देती है। एतिहासिक व कलात्मक विशेषताओं को समेटे इस मंदिर की अलग पहचान है। वर्तमान समय यहां राजा जयेंद्र प्रताप सिंह ही व्यवस्था देखते हैं।

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आमजन की जुड़ी है आस्था : मंदिर से आम जनता की आस्था जुड़ी है। इसलिए अक्षय नवमी के दिन नगर के आसपास गांव के लोग पूजन के लिए जुटते हैं। इसी दिन नगर में सप्तकोसी परिक्रमा भी निकलती है। परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जब तक इस मंदिर में राधा-कृष्ण के दर्शन नहीं होते, तब तक परिक्रमा अधूरी है।

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श्रद्धालु अनीता गुप्ता का कहना है कि इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है। राजमहल के सचिव रिटायर्ड कर्नल आरके मोहंता ने बताया कि अनूठे व भव्य मंदिर का निर्माण करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले कराया गया था। अक्षय नवमी के दिन इस मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।