पहली बार दो बांग्लादेशी हस्तियों को पद्म पुरस्‍कारों से किया जा रहा सम्‍मानित, जानें क्‍या हैं इनके योगदान

 

पहली बार बांग्लादेश की दो शख्सियतों को पद्म पुरस्कार से सम्‍मानित किया जा रहा है।
पहली बार बांग्लादेश की दो शख्सियतों को पद्म पुरस्कार से सम्‍मानित किया जा रहा है। इनमें भारत में पूर्व उच्चायुक्त मुअज्जम अली और 1971 युद्ध के नायक कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर शामिल हैं।

नई दिल्‍ली, एजेंसियां। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में चर्चित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। पद्म पुरस्कारों के वितरण का आयोजन राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हाल में किया गया। इस भव्य समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वाली हस्तियों को सम्मानित किया गया। इस बार दो वर्षों के पुरस्कार दिए जा रहे हैं। इसमें वर्ष 2020 के लिए सोमवार को 141 लोगों को पद्म पुरस्कार दिए गए जबकि 2021 के लिए मंगलवार को 119 लोगों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।

पहली बार दो बांग्लादेशी नागरिकों को समम्‍मान

पहली बार बांग्लादेश की दो शख्सियतों को पद्म पुरस्कार से सम्‍मानित किया जा रहा है। इनमें भारत में पूर्व उच्चायुक्त मुअज्जम अली (Syed Muazzem Ali) और 1971 युद्ध के नायक कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर (Quazi Sajjad Ali Zahir) शामिल हैं। सैयद मुअज्जम अली को साल 2020 के लिए भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया जबकि कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर (Quazi Sajjad Ali Zahir) को साल 2021 के पद्म श्री पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। मुअज्जम अली को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। आइए जानें क्‍या हैं इन दोनों हस्तियों के उल्‍लेखनीय योगदान...

'भारत के दोस्‍त' मुअज्जम अली

सैयद मुअज्जम अली बांग्लादेश के पूर्व विदेश सचिव रहे। उन्होंने भारत में काफी लंबे अर्से तक बांग्लादेश के उच्चायुक्त के रूप में सेवाएं दी थीं। उनका 30 दिसंबर सन 19019 में निधन हो गया था। विदेश मंत्री जयशंकर ने अली के निधन पर शोक संवेदनाएं व्‍यक्‍त करते हुए उन्‍हें भारत का 'दोस्त' बताया था। सैयद मुअज्जम अली ने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ विद्रोह किया था और सन 1971 में वहां पाकिस्तान दूतावास में सेवा करते हुए बांग्लादेश के प्रति अपनी निष्ठा की घोषणा कर दी थी। उन्होंने बांग्लादेश के विदेश सचिव के रूप में भी काम किया।

कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर

कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर को सन 1971 के युद्ध नायक के तौर पर जाना जाता है। उल्‍लेखनीय है कि पाकिस्तान की सेना साल 1971 के दौरान पूर्वी पाकिस्तान (जो अब बांग्‍लादेश है) के लोगों पर बड़े जुल्म ढा रही थी। पाकिस्‍तान की इस बर्बर कार्रवाई को देखते हुए भारत ने तीन दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना को चुनौती दी थी। इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्‍त दी थी जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांगलादेश बना था।

1971 युद्ध के हीरो

रिपोर्टों के मुताबिक कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर साल 1969 के अंत में पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए थे। उनकी नियुक्ति आर्टिलरी कोर में हुई थी। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना की ओर से की किए जा रहे बर्बर अत्याचारों को देखकर कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर देश छोड़कर भारत पहुंच गए। कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर ने तब भारतीय सेना से संपर्क स्थापित किया और साल 1971 के युद्ध में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई... तब पाकिस्तानी सेना ने उनके खिलाफ मौत की सजा का वारंट जारी किया था जो आज तक जारी है।