आतंकी समूहों के आगे पाकिस्तान का आत्मसमर्पण वैश्विक चिंता का कारण, जानें- पर्दे के पीछे का खेल

 

पाकिस्तान का आतंकियों के आगे हालिया 'आत्मसमर्पण' वैश्विक चिंता का कारण बन गया है।
इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान ने टीटीपी के साथ शुक्रवार को अस्थायी संघर्ष विराम की घोषणा की। सरकार ने टीएलपी पर लगे प्रतिबंध को भी हटा लिया है। इस्लामाबाद ने टीएलपी के कई हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को भी रिहा कर दिया है।

इस्लामाबाद, एएनआइ। पाकिस्तान सरकार का हाल ही में दो इस्लामी समूहों, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के साथ बातचीत जल्द ही वैश्विक चिंता का कारण बन जाएगी। विश्लेषकों का कहना है कि इमरान सरकार में स्पष्ट नीति का अभाव, बढ़ता रणनीतिक भ्रम और भगदड़ के हालात बने हुए हैं।

इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान ने टीटीपी के साथ शुक्रवार को अस्थायी संघर्ष विराम की घोषणा की। आधिकारिक रिकार्ड के अनुसार पाकिस्तान में पिछले एक दशक में टीटीपी द्वारा की गई हिंसा में 70,000 लोग हताहत हुए हैं। टीटीपी पड़ोसी देश अफगानिस्तान में कबायली सीमावर्ती इलाकों से काम कर रहा है।

यही नहीं, इमरान खान सरकार ने टीएलपी पर लगे प्रतिबंध को भी हटा लिया है। इस्लामाबाद ने टीएलपी के कई हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को भी रिहा कर दिया, जिन्हें उनके हिंसक अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया था। समूह ने अपने प्रमुख साद रिजवी की रिहाई और फ्रांसीसी राजदूत को हटाने की भी मांग की थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कहना है कि वह संगठन को माफ कर आम नागरिकों का जीवन जीने का मौका दे रहे हैं।टाइम्स आफ इजराइल में सर्जियो रेस्टेली ने लिखा है कि अगर इस्लामाबाद की रणनीति इस्लामिक स्टेट-खुरासान और अल कायदा से लड़ने के लिए घरेलू आतंकी समूहों के साथ शांति स्थापित करने की है, तो इसे समझाया नहीं जा सकता है। सरकार की दोनों चालों को नारों और प्रदर्शने के बीच छिपाया जा रहा है।

जब से अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में आया है, पाकिस्तान में सीमा पार से हिंसा तेज हो गई है। इससे इस्लामाबाद के सुरक्षाबलों को आतंकवादियों के खिलाफ कड़े हमले करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पाकिस्तानी सेना ने हाल ही में टीटीपी के अंतिम गढ़ उत्तरी वजीरिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया था, जिससे आतंकवादियों को सीमा पार से पड़ोसी अफगानिस्तान में भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।इससे पहले इस्लामाबाद ने अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में टीटीपी के साथ बातचीत की, जिसमें तालिबान ने मध्यस्थता की थी। हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख और कार्यवाहक आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी दोनों के बीच वार्ता में प्रमुख व्यक्ति थे।

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