शराबबंदी की सफलता पर सवाल: ड्राई स्टेट होने के बावजूद बिहार में महाराष्ट्र से ज्यादा लोग पी रहे शराब

 

बिहार में एक अप्रैल, 2016 से पूर्ण शराबबंदी है।
बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू हुए करीब पांच साल से अधिक हो गए है लेकिन इसकी सफलता पर विवाद जारी है। शराबबंदी लागू के बाद से बिहार में 3.46 लाख से अधिक लोगों को शराब कानून के उल्लंघन मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।

 बीते दिनों बिहार में जहरीली शराब पीने से कम से कम 45 लोगों की मौत हो गई है और कई गंभीर रूप से बीमार हैं। इससे यही लगता है कि शराब के नाम पर जहर बेचने का काम जारी था। भले इस हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हों, लेकिन अतीत से लेकर अब तक यही देखा गया है कि कुछ दिन बाद जांच के ये मामले कहीं भटक जाते हैं। ऐसे में यही सवाल दस्तक देता है कि क्या शराबबंदी को लेकर आबकारी विभाग और पुलिस बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू हुए करीब पांच साल से अधिक हो गए है, लेकिन इसकी सफलता पर विवाद जारी है। एक अप्रैल, 2016 से राज्य में पूर्ण शराबबंदी है। इसके बावजूद स्थिति ऐसी हो गई है कि कोई भी दिन ऐसा नहीं बीतता, जब राज्य के किसी न किसी कोने से शराब की बरामदगी और शराबबंदी कानून तोड़ने की खबरें न आती हों। एक अनुमान के मुताबिक, शराबबंदी लागू के बाद से बिहार में 3.46 लाख से अधिक लोगों को शराब कानून के उल्लंघन मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। यह वाकई में एक बड़ा आंकड़ा है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस), 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, ड्राई स्टेट होने के बावजूद बिहार में महाराष्ट्र से ज्यादा लोग शराब पी रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि बिहार में 15.5 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में शराब प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन शराब पीने वाले पुरुषों की तादाद 13.9 प्रतिशत ही है। इस बात में कोई संदेह नहीं कि शराबबंदी के बावजूद बिहार में शराब उपलब्ध है। यह बात दीगर है कि लोगों को दो या तीन गुनी कीमत चुकानी पड़ती है चाहे शराब देसी हो या अंग्रेजी।

सच यही है कि कानून लागू होने के कुछ दिनों बाद तक तो सब ठीक रहा। सख्त सजा के प्रविधान के कारण ऐसा लगा कि वाकई लोगों ने शराब से तौबा कर ली। इसका सबसे ज्यादा फायदा निचले तबके के लोगों को मिला। परिवारों में खुशियां लौटीं, मगर समय के साथ धीरे-धीरे शराब शहर क्या, दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक पहुंचने लगी। आज आम धारणा यही है कि शराब हर जगह सुलभ है। बस इसके लिए कीमत कुछ अधिक चुकानी पड़ती है। कहा जाता है कि बिहार में झारखंड, बंगाल, उत्तर प्रदेश एवं नेपाल से शराब की बड़ी खेप तस्करी कर लाई जाती है।

फिर प्रश्न उठता है कि जब कानून है तो शराब कैसे लोगों तक पहुंच रही है। यहां तक कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्रवाई की बात तो कहते हैं, लेकिन कार्रवाई होती नहीं दिखती है। बहरहाल कानून है तो उसका पालन भी होना चाहिए, लेकिन सरकारी तंत्र पर भारी शराब माफिया को कैसे ध्वस्त किया जाएगा, यह एक बड़ा सवाल है। याद रहे कि बिना चैनल को ध्वस्त किए शराबबंदी कानून लागू करना मुश्किल है।