भावनाओं के आधार पर किसी के भाग्य का निर्णय नहीं: कोर्ट

 



कड़कड़डूमा कोर्ट ने पांच लोगों को आरोप मुक्त किया ।
आरोपितों को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को हुई वित्तीय हानि और मानसिक पीड़ा के प्रति कोर्ट असंवेदनशील नहीं है। लेकिन संवेदनशीलता या फिर भावनाएं अकेले ऐसे कारक नहीं हैं जिन पर विचार करके कोर्ट किसी भी आरोपित के भाग्य का निर्णय करे।

नई दिल्ली,  संवाददाता। न्यू उस्मानपुर इलाके में दंगे के दौरान घर व दुकान में लूटपाट के बाद आग लगाने के एक मामले में सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट ने पांच लोगों को आरोप मुक्त किया था। मंगलवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट्ट के कोर्ट ने इस मामले में विस्तृत आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में एक ही गवाह पेश किया गया, जो कि खुद शिकायतकर्ता था। वह भी आरोपितों को प्रत्यक्ष रूप से नहीं पहचान पाया। शिकायतकर्ता ने थाने में तस्वीरों के मध्यम से पहचान की थी।रोपितों को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को हुई वित्तीय हानि और मानसिक पीड़ा के प्रति कोर्ट असंवेदनशील नहीं है। लेकिन, संवेदनशीलता या फिर भावनाएं अकेले ऐसे कारक नहीं हैं, जिन पर विचार करके कोर्ट किसी भी आरोपित के भाग्य का निर्णय करे।

पर्याप्त साक्ष्य और कानूनी आधार पर ही फैसला होना चाहिए। इस केस में साक्ष्यों की कमी है। आरोपपत्र से यह कहीं पता नहीं चलता कि जांच अधिकारी ने अन्य गवाहों को तलाशने के लिए कोई प्रयास किया भी या नहीं। ऐसा नहीं है कि वारदात नहीं हुई है, साक्ष्य न होने की वजह से आरोपितों को छोड़ा जा रहा है।

पड़ताल के तरीके की जांच करें

इसके साथ ही कोर्ट ने उत्तर पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को इस मामले में जांच करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने डीसीपी को आदेश दिया है कि वह जांच अधिकारी द्वारा की गई पड़ताल के तरीके की जांच करें। कोर्ट ने यह आशंका भी जाहिर की है कि कहीं जानबूझकर तो अपराधियों को बचाने का प्रयास नहीं किया गया। अगली तारीख पर कोर्ट ने डीपीसी से जांच रिपोर्ट मांगी है।

बता दें, गत वर्ष गामड़ी रोड स्थित सुदामापुरी में अजीजिया मस्जिद के पास रहने वाले फिरोज खान ने मुकदमा दर्ज कराया था। उसमें आरोप लगाया था कि दंगाइयों ने 25 फरवरी को उनके घर से नौ लाख रुपये नकद, 4.50 लाख रुपये के जेवर लूटने के बाद आग लगा दी थी। पुलिस ने इस मामले में राजकुमार, मनीष शर्मा उर्फ मोनू, राजकुमार उर्फ सिवैयां, इशु गुप्ता और प्रेम प्रकाश उर्फ काके को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने इन सभी को बरी कर दिया।

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