बरेली जिला अस्पताल में नहीं है हेपेटाइटिस जांच किट, जानिये किट न होने लोगों ने स्टाफ के साथ क्या किया

 

जिला अस्पताल में मंगलवार को जांच कराने पहुंचे थे एक दर्जन से अधिक मरीज
 जिला अस्पताल में मरीजों की जांच व इलाज के संसाधन कम होने या आए दिन खत्म होने की शिकायत सामने आती रहती है। मंगलवार को हेपेटाइटिस की जांच के लिए पहुंचे मरीजों के लिए किट ही जिला अस्पताल में नहीं थीं।

बरेली : जिला अस्पताल में मरीजों की जांच व इलाज के संसाधन कम होने या आए दिन खत्म होने की शिकायत सामने आती रहती है। मंगलवार को भी ऐसा मामला सामने आया, जब हेपेटाइटिस की जांच के लिए पहुंचे दर्जन भर मरीजों के लिए किट ही जिला अस्पताल में नहीं थीं। इस पर जिला अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ।दरअसल, मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हेपेटाइटिस मरीजों की जांच होती है।इसी क्रम में मंगलवार को जिला अस्पताल में करीब एक दर्जन मरीज जांच के लिए पहुंचे। मरीजों को जांच के लिए बैठा तो लिया गया लेकिन मौके पर जांच किट उपलब्ध ही नहीं थी। इस पर मरीज बिफर गए और करीब आधे घंटे तक हंगामा किया। मरीजों के हंगामे की भनक जब एडीएसआइसी डा. सुबोध शर्मा तक पहुंची तो उन्होंने सेंट्रल जेल से संपर्क कर जांच किट मंगवाई और फिर मरीजों की जांच कराई। जिसके बाद मरीजों का हंगामा शांत हुआ। बताया गया कि किट की मांग पहले ही की जा चुकी है, हालांकि अभी तक किट नहीं पहुंची है। जैसे ही किट मिलेंगी, सेंट्रल जेल से लिया स्टाक वापस कर दिया जाएगा।

चौबारी मेले में उमड़ने लगी लोगों की भीड़ : रामगंगा चौबारी मेला मंगलवार को सामाजिक सरोकारों को समर्पित रहा। सामाजिक और गंगा बचाने के साथ ही स्वच्छता को समर्पित समितियों ने मेले में नुक्कड़ नाटक, शपथ समारोह और सहिष्णुता अपनाओ अभियान चलाए। इस बीच मेले में काफी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रही। मंगलवार को रामगंगा चौबारी में गंगा दशहरा मेले में वरिष्ठ रंगकर्मी जेसी पालीवाल के नेतृत्व में नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया गया।

नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से मां गंगा की स्वच्छता की ओर ध्यानाकर्षित किया गया और पालीथीन व प्लास्टिक के उपयोग नहीं करने की जनता से अपील की गई। इस मौके पर देवेंद्र रावत, पवन कालरा, सुनील धवन, मोहम्मद नवी, कवि रोहित राकेश, पूर्व ब्लाक प्रमुख चौबारी जयवीर सिंह आदि रहे। नुक्कड़ नाटकों में आल इंडिया कल्चरल एसोसिएशन, जिला समारोह समिति, जवाहर सांस्कृतिक दल, कौमी एकता एसोसिएशन आदि संस्थाएं अपने कलाकारों द्वारा सहयोग करती रही।