पंजाब विधानसभा में BSF का दायरा बढ़ाने के खिलाफ प्रस्ताव पास, कैप्टन बोले- राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति ठीक नहीं

 

पंजाब विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेते सीएम, डिप्टी सीएम व अन्य विधायक। फोटो ट्विटर से
पंजाब विधानसभा में केंद्र सरकार द्वारा बीएसएफ का दायरा बढ़ाए जाने को लेकर किए गए फैसले के खिलाफ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गया है। यह प्रस्ताव विधानसभा में उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने रखा जिसका भाजपा को छोड़ सभी ने समर्थन किया।

 चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में केंद्र सरकार द्वारा बीएसएफ का दायरा 15 से बढ़ाकर 50 किलोमीटर करने वाली अधिसूचना को रद करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुआ। यह प्रस्ताव उपमुख्यमंत्री व गृह विभाग देख रहे सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पेश किया। प्रस्ताव पर हुई बहस के दौरान बीजेपी के विधायकों ने कुछ नहीं बोला। वहीं, विपक्ष ने बीएसएफ का दायरा बढ़ाने को लेकर के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए। जिसके बाद चन्नी ने सफाई देते हुए कहा कि बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बार्डर सील करने की मांग की थी, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

संसदीय कार्य मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने कहा कि सरकार इस अधिसूचना के खिलाफ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी जा रही है। अकाली दल के विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया ने बीएसएफ का दायरा बढ़ाने को जहां राज्य के अधिकारों का हनन बताया। वहीं, उन्होंने कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी द्वारा किए गए ट्वीट का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं को भी अपनी पार्टी पर भरोसा नहीं है।

मनीष तिवारी ने भी कहा था कि केंद्र सरकार को अधिसूचना जारी किए हुए करीब 1 माह हो गया है, लेकिन पंजाब सरकार ने अभी तक कानून का सहारा नहीं लिया। मजीठिया ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर पंजाब सरकार ने बीएसएफ का दायरा बढ़ाने से रोकने के लिए कैबिनेट में फैसला क्यों नहीं लिया। कैबिनेट में यह फैसला लिया जा सकता था कि 15 किलोमीटर के दायरे के बाहर पंजाब पुलिस बीएसएफ की कोई मदद नहीं करेगी। जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं है, जैसा मजीठिया कह रहे हैं कैबिनेट भी इस पर फैसला लेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य है कि सभी लोग अपना अपना सुझाव दें। जिस पर मजीठिया ने कहा कि वह मनीष तिवारी से सुझाव क्यों नहीं लेते। सुनील जाखड़ तो पहले ही कह चुके हैं कि मुख्यमंत्री ने आधा पंजाब केंद्र सरकार को दे दिया है। मजीठिया ने गृह मंत्री पर हमला बोलते हुए कहा, जब वह जेल मंत्री थे तब उन्होंने जेलों की सुरक्षा सीआरपीएफ को दे दी थी। तब उन्हें पंजाब पुलिस पर भरोसा नहीं था।

नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने भी कांग्रेस सरकार को ही लपेटा। उन्होंने कहा कि साढ़े चार वर्षों तक कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब को आंतरिक व बाहरी खतरे की बात उठाते रहे। उनके खिलाफ क्या कांग्रेस मर्यादा हनन का प्रस्ताव लाएगी। पंजाब में ड्रोन आ रहे है। पहले कैप्टन बोलते थे, अब चन्नी बोल रहे हैं। कांग्रेस घड़ियाली आंसू बहा रही है। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए किउनकी प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के साथ क्या डील हुई है, क्योंकि मुख्यमंत्री ने बकायदा ट्वीट करके कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करके उन्होंने सीमाओं को सील करने का मुद्दा उठाया है।

करीब 45 मिनट तक चली बहस के बाद यह प्रस्ताव बगैर भाजपा विधायकों के बोले सर्वसम्मति के साथ पास हुआ। इस प्रस्ताव पर परगट सिंह, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, अमन अरोड़ा, समेत आधा दर्जन विधायकों ने अपने विचार रखे, जबकि कंवर संधू ने कहा कि 1968 में बने बीएसएफ एक्ट की धारा 139 में संशोधन की मांग की जानी चाहिए। क्योंकि इस धारा में केंद्र सरकार के पास अधिकार है कि वह दायरा बढ़ा सकता है, जबकि राज्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है।

आरएसएस पंजाब की दुश्मन जमात : चन्नी

बीएसएफ का दायरा बढ़ाने को लेकर पंजाब सरकार द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के पास होने के बाद मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अकाली दल को जमकर खरी-खोटी सुनाई। चन्नी ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल के कारण ही भाजपा और आरएसएस का पंजाब में प्रवेश हुआ। आरएसएस को पंजाब का दुश्मन जमात बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसे कदम उठा सकती है, इसका अंदाजा उन्हें तब ही हो गया था जब जम्मू-कश्मीर में धारा 370 तोड़ी गई थी। आरएसएस, बीजेपी और एसएडी ने राज्यों के अधिकार छीने हैं। इन्हें राज्यों के अधिकारों के मुद्दे तब याद आते हैं जब यह सत्ता में नहीं होते है।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अकाली दल ने राज्यों के अधिकार छीनने का रास्ता बनाया है, क्योंकि लोकसभा में जब धारा 370 को तोड़ा जा रहा था तब शिरोमणि अकाली दल ने वोट नहीं डाला था और सुखबीर बादल ने इसका स्वागत किया था। मुख्यमंत्री ने शिअद को पंजाब की गद्दार पार्टी करार दिया। हालांकि इससे पहले अकाली दल के ही विधायक हरिंदर पाल सिंह चंदूमाजरा ने कांग्रेस पर हमला किया कि अकेले बीएसएफ का दायरा बढ़ाने को लेकर ही संवैधानिक ढांचे पर हमला नहीं हुआ है। 1969 में सीआरपीएफ ने बंगाल में प्रवेश किया तब भी संवैधानिक ढांचे का उल्लंघन हुआ था और 1959 में बंगाल में ही सीपीआइ की चुनी हुई सरकार को गिराया गया तब भी संवैधानिक ढांचे पर हमला था।

यह था प्रस्ताव

केंद्र सरकार ने बीएसएफ का अधिकार 15 से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है, जो कि पंजाब पुलिस पर अविश्वास प्रकट करता है। यह उनका अपमान भी है। केंद्र सरकार को इतना बड़ा फैसला करने से पहले पंजाब सरकार के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए था। पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति ठीक है और बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाए जाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। यह भारतीय संविधान की संघी ढांचे की भावना का घोर उल्लंघन है। बीएसएफ का दायरा बढ़ाना एक गंदी राजनीति है। पंजाब की सभी राजनीतिक पार्टियों ने केंद्र सरकार की इस नीति की निंदा की है और केंद्र सरकार से मांग की है कि 11 अक्टूबर 2021 को गृह मंत्रालय द्वारा जारी नोटीफिकेशन को तुरंत वापस लिया जाए।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों का राजनीतिकरण न करें : कैप्टन

पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के लिए केंद्र के प्रस्तावित कदम के खिलाफ विधानसभा में आज पंजाब सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य सरकार से कहा कि वह छोटे पक्षपातपूर्ण उद्देश्यों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे का राजनीतिकरण न करें।

उन्होंने कहा, ‘बीएसएफ का संचालन क्षेत्राधिकार राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है, न कि राज्य में कानून-व्यवस्था से, जिसे पंजाब में मौजूद शक्तियां स्पष्ट रूप से समझने में सक्षम नहीं हैं।’ कैप्टन ने कहा, यह दुखद है कि सरकार एक ऐसे मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है और पंजाब सहित सभी सीमावर्ती राज्यों से संबंधित है। केवल पंजाब में ही नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 50 किलोमीटर है, क्योंकि अत्याधुनिक ड्रोनों के आने से सीमा पर खतरा बढ़ा है।

कैप्टन ने कहा, बीएसएफ के संचालन क्षेत्र का विस्तार न तो राज्य के संघीय अधिकार का उल्लंघन करता है और न ही कानून और व्यवस्था बनाए रखने में राज्य पुलिस की क्षमता पर सवाल उठाता है। इसके बावजूद कुछ पार्टियां राजनीतिक हित बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा में बहुत बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से लोग कानून और व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच अंतर करने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा, पंजाब पुलिस की तरह बीएसएफ हमारी अपनी ताकत है, न कि कोई बाहरी या विदेशी दल आने वाला है। हमारी जमीन पर कब्जा करने।