कैसे वायु प्रदूषण के लिए दिल्ली-NCR खुद हैं जिम्मेदार

 

पढ़िये- कैसे वायु प्रदूषण के लिए दिल्ली-NCR खुद हैं जिम्मेदार
 सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरनमेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता राय चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में राजधानी दिल्ली की हवा को सबसे ज्यादा वाहनों का धुआं प्रदूषित कर रहा है।

नई दिल्ली । पराली ही नहीं, वाहनों का धुआं भी दिल्ली-एनसीआर की हवा में जहर घोल रहा है। सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरनमेंट (सीएसई) के नए अध्ययन पर गौर करें तो इस समय राजधानी दिल्ली में वाहनों से ही सबसे ज्यादा प्रदूषण फैल रहा है। इस अध्ययन में जानकारी दी गई है कि राजधानी दिल्ली में 27 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच ट्रैफिक की स्थिति की समीक्षा की गई, जिसमें पाया गया कि वर्तमान ट्रैफिक कोरोना फैलने के पूर्व की स्थिति में पहुंच गया है। कम से कम पंद्रह भीड़ भरे सड़कों पर स्थिति बहुत खराब है और यह सीधे तौर पर वायु प्रदूषण को प्रभावित कर रही है। सीएसई के अध्ययन मे महरौली बदरपुर रोड, आउटर रिंग रोड, रिंग रोड, एमजी रोड, मथुरा रोड, आइटीओ, अरविंदो मार्ग, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, गुरु रविदास मार्ग और जीटी करनाल रोड पर सर्वाधिक प्रदूषण पाया गया है।

सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता राय चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में राजधानी दिल्ली की हवा को सबसे ज्यादा वाहनों का धुआं प्रदूषित कर रहा है। अगर प्रदूषण से सभी स्त्रोतों की चर्चा करें तो वाहन प्रदूषण के अलावा औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण स्थलों पर होने वाले प्रदूषण, रोड पर धूल एवं रिहायशी इलाकों के प्रदूषण से भी वायु प्रदूषण बढ रहा है। यह पाया गया है कि दिल्ली में प्रदूषण के स्थानीय स्त्रोतों का प्रभाव शाम के समय बढ़ जाता है। यानि प्रदूषण के स्थानीय कारकों के कारण शाम सात बजे से सुबह 9.30 बजे तक प्रदूषण ज्यादा बढता है।

अध्ययन के कुछ प्रमुख निष्कर्ष

  • रियल टाइम डेटा बताता है कि 24 अक्टूबर से 8 नवंबर के बीच दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में आधे से अधिक योगदान वाहनों के धुएं का रहा है।
  • दो से छह नवंबर (दीवाली अवधि) के दौरान अन्य एनसीआर जिलों से योगदान काफी अधिक था। दीवाली के बाद स्माग एपिसोड के दौरान यह कम हो गया। इसके बाद दिल्ली का अपना योगदान और पराली के धुएं की हिस्सेदारी में इजाफा हुआ।
  • तीन नवंबर तक पराली के धुएं का योगदान कम रहा जो पिछले चार साल में सबसे कम था। लेकिन पांच नवंबर से यह काफी बढ़ गया।-इस चरण के दौरान यातायात की गति कम हो गई और महामारी से पहले की तर्ज पर भीड़ वापस वापस आ गई।
  • दिल्ली में प्रदूषण के सभी प्रमुख स्त्रोतों पर कार्रवाई तेज करने की आवश्यकता है, मसलन- एकीकृत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली, पैदल चलने को बढ़ाने के लिए, साइकिल चलाने के बुनियादी ढांचे और शहर भर में पार्किंग क्षेत्र प्रबंधन की योजना पर तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
  • निजी वाहनों का प्रयोग रोकें। इस सुधार के अभाव में, दिल्ली आपातकालीन कार्रवाई को लागू करने में असमर्थ है। स्माग एपिसोड के दौरान ट्रैफिक वोल्यूम को नियंत्रित करें। दिल्ली में वाहन संख्या 1.32 करोड़ के विस्फोटक स्तर पर है।