भारत ने म्यांमार में उठाया आतंकवाद का मुद्दा, कहा- शीघ्र कायम हो लोकतत्र, पड़ोसी देश को 10 हजार टन चावल व गेहूं देने की बात

 

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला की फाइल फोटो
विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक विदेश सचिव ने म्यांमार सरकार व राजनीतिक दलों के समक्ष यह स्पष्ट तौर पर कहा है कि उसकी मंशा वहां लोकतंत्र की शीघ्र वापसी और जेल में बंद राजनीतिक बंदियों की रिहाई की है।

ब्यूरो, नई दिल्ली। पड़ोसी देश म्यांमार की सैन्य सरकार के साथ रिश्ता बनाये रखना भारत के लिए एक रणनीतिक मजबूरी है लेकिन इसके बावजूद लोकतंत्र के मुद्दे पर संदेश देने में कोई कोताही नहीं की गई है। बुधवार को म्यांमार में वहां की सरकार और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने एक तरफ जहां वहां के नेताओं को आश्वस्त किया कि उन्हें हर तरह की मानवीय मदद दी जाएगी लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शीघ्र शुरू करना होगा। विदेश सचिव ने देश के पूर्वोत्तर राज्यों में आतंकी वारदातों को अंजाम दे कर म्यांमार के जंगलों में शरण लेने वाले आतंकियों का मुद्दा भी उठाया। भारत-म्यांमार की सीमा को हर तरह से सुरक्षित रखने से जुडे़ दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत हुई है।

विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक विदेश सचिव ने म्यांमार सरकार व राजनीतिक दलों के समक्ष यह स्पष्ट तौर पर कहा है कि उसकी मंशा वहां लोकतंत्र की शीघ्र वापसी और जेल में बंद राजनीतिक बंदियों की रिहाई की है। भारत चाहता है कि सरकार व राजनीतिक दलों के बीच बातचीत से हर मुद्दे को सुलझाया जाए व हिंसा पूरी तरह से खत्म हो। इस संदर्भ में आसियान संगठन की तरफ से जो कोशिश हो रही है, भारत ने उसका पूरा समर्थन करने की बात कही है और उम्मीद जताया है कि जल्द ही उस बारे में ठोस प्रगति होगी।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा है कि एक पड़ोसी और लोकतांत्रिक देश होने के नाते भारत म्यांमार में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के शुरू करने में सहभागी रहा है। भारत ने अपनी तरफ से फिर से यह प्रस्ताव किया है कि वहां म्यांमार की जनता के इच्छानुसार वहां एक लोकतांत्रिक व स्थाई सरकार बनाने के लिए हरसंभव मदद करने को तैयार है।

पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय आतंकी संगठनों का उठाया गया मुद्दा

भारत की तरफ से इन बैठकों मे पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय आतंकी संगठनों का मुद्दा भी उठाया गया। खास तौर पर नवंबर, 2021 महीने में मणिपुर के चूड़ाचंदपुर जिले में भारतीय सैनिकों की एक टुकड़ी पर हुए हमले का मुद्दा विदेश सचिव श्रृंगला ने उठाया। उन्होंने कहा है कि सीमावर्ती इलाकों में अमन व शांति के लिए पूरे इलाके में हर तरह की हिंसक वारदातों पर रोक लगानी होगी।

म्यांमार के प्रतिनिधियों ने आतंकी गतिविधियों के खिलाफ और सक्रियता दिखाने का भरोसा दिया है। भारत के पूर्वोत्तर हिस्से में आतंकी वारदातों को अंजाम दे कर कुछ आतंकी संगठनों के सदस्य म्यांमार के जंगलों में छिप जाते हैं। इनका खात्मा करने के लिए भारत को म्यांमार के सुरक्षा सहयोग की जरूरत है।

म्यांमार की जनता के समाजिक व आर्थिक उन्नति के लिए भारत करता रहेगा कोशिश

विदेश सचिव ने कहा है कि भारत म्यांमार के साथ तकरीबन 1700 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। इस सीमा के पास रहने वाले म्यांमार की जनता के समाजिक व आर्थिक उन्नति के लिए भारत कोशिश करता रहेगा। भारत की मदद से वहां बनने वाली दो प्रमुख परियोजनाओं कलादान मल्टीमोडल ट्रांसिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और ट्राइलेटरल हाइवे की भी समीक्षा की गई है। विदेश सचिव ने इन परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर भारत की वचनबद्धता दोहराई है। भारत रखाईन स्टेट में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए जो मदद देने की वादा किया था, उसे भी जारी रखने का आश्वासन दिया गया है। इस मदद से वहां रहने वाले रोहंगिया मुस्लिमों को राहत मिलेगी।