चीन के लड़ाकू विमानों ने फिर भरी ताइवान के हवाई क्षेत्र में उड़ान, एक महीने में 17वीं घुसपैठ की घटना

 

एक महीने में 17वीं घुसपैठ की घटना
ताइवान पर चीन के द्वारा हमले का खतरा बढ़ता जा रहा है। बीते कुछ वक्त में ताइवान के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ के मामले चौकाने वाले तरीके से बढ़े हैं। बुधवार को चीन के चार लड़ाकू विमानों ने ताइवान के हवाई क्षेत्र में उड़ान भरी।

ताइपे, एएनआई: ताइवान पर चीन के द्वारा हमले का खतरा बढ़ता जा रहा है। बीते कुछ वक्त में ताइवान के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ के मामले चौकाने वाले तरीके से बढ़े हैं। बुधवार को चीन के चार लड़ाकू विमानों ने ताइवान के हवाई क्षेत्र में उड़ान भरी, जो इस महीने की 17वीं घुसपैठ की वारदात है।

चार लड़ाकू विमान हुए दाखिल

संसदीय कार्रवाई के दौरान देश के रक्षा मंत्री चिउ कुओ-चेंग ने सांसदों को चीनी सेना द्वारा घुसपैठ की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनवरी से अब तक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स देश के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र में करीब 940 ज्यादा बार घुसपैठ कर चुका है। वायु रक्षा पहचान क्षेत्र वो प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली हैं, जो देशों को अपने हवाई क्षेत्र में घुसपैठ का पता लगाने में मदद करती है। ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स को दो शेनयांग J-16 फाइटर जेट्स, एक शानक्सी Y-8 इलेक्ट्रानिक इंटेलिजेंस स्पाटर प्लेन और एक शानक्सी Y-8 इलेक्ट्रानिक वारफेयर प्लेन ने देश के दक्षिण-पश्चिमी हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की है। 

जारी है घुसपैठ की घटनाएं

रक्षा मंत्री ने बताया कि, वायु रक्षा पहचान क्षेत्र में दाखिल होते वक्त किसी भी विमान को अपने रास्ते और उद्देश्य के बारे में संबंधित देश को रिपोर्ट देनी होती है। हालांकि, वायु रक्षा पहचान क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और पायलट कानूनी रूप से ऐसी अधिसूचना बनाने के लिए बाध्य नहीं होते हैं। बीते साल सितंबर के बाद से, बीजिंग ने ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र में नियमित रूप से घुसपैठ जारी रखी है। चीन द्वारा भेजे जाने वाले लड़ाकू विमान ज्यादातर हवाई क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम हिस्से से दाखिल होते हैं।

चीन का पूर्ण संप्रभुता का दावा

गौरतलब है कि बीजिंग ताइवान पर पूर्ण संप्रभुता का दावा करता है। बावजूद इसके की देश की करीब ढाई करोड़ आबादी चीन की मुख्य सीमा से काफी अलग रहती है। वहीं दूसरी ओर, ताइपे ने अमेरिका सहित लोकतंत्रों के समर्थक देशों से रणनीतिक संबंधों को बढ़ाकर चीन आक्रामकता का और बढ़ाया है। बीजिंग लगातार इस तरह की गतिविधियों का विरोध करता रहा है। उसने साफ तौर पर कहा है कि ‘ताइवान की आजादी’ का मतलब युद्ध है।