अलविदा 2021: दिल्ली में जलसंकट बरकरार, आवास का सपना भी अधूरा, वजह जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर

 

अलविदा 2021: दिल्ली में करीब 1,140 एमजीडी पानी की जरूरत होती है।
अलविदा 2021 यमुना नदी के पानी में अमोनिया की बढ़ी मात्र के कारण भी कई बार जलापूर्ति प्रभावित रही। इस वजह से दिल्ली और हरियाणा के बीच पानी के मुद्दे पर सियासत भी बहुत हुई। वहीं दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) इस साल लोगों को ज्यादा आवास उपलब्ध नहीं करा पाया।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। कहीं भी रहने के लिए बिजली, पानी और घर बुनियादी जरूरतें होती हैं। इस साल 66 अनधिकृत कालोनियों में पानी की पाइप लाइन जरूर बिछाई गई, लेकिन सिर्फ नौ अनधिकृत कालोनियों में ही पाइप लाइन से जलापूर्ति शुरू हो पाई। वहीं, मांग और आपूर्ति के अनुसार पेयजल की कमी बनी रही। इस वजह से गर्मी में पेयजल किल्लत देखी गई।

यमुना नदी के पानी में अमोनिया की बढ़ी मात्र के कारण भी कई बार जलापूर्ति प्रभावित रही। इस वजह से दिल्ली और हरियाणा के बीच पानी के मुद्दे पर सियासत भी बहुत हुई। वहीं, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) इस साल लोगों को ज्यादा आवास उपलब्ध नहीं करा पाया। इस वजह से दिल्ली में आवास लोगों के लिए सपना ही बना हुआ है। लेकिन, बिजली की खपत अधिक रही।

223 कालोनियों में पानी की किल्लत : दिल्ली में 1,799 अनधिकृत कालोनियां हैं। जल बोर्ड के अनुसार अभी तक 1,576 कालोनियों में ही पाइप लाइन से जलापूर्ति हो रही है। वर्ष 2020 में 1,567 कालोनियों में पाइप लाइन से जलापूर्ति हो रही थी। 223 कालोनियों में अभी पाइप लाइन से जलापूर्ति नहीं हो रही है। इनमें से 115 कालोनियां वन विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की जमीन पर बसी हैं। इसलिए इनमें पानी की पाइप लाइन बिछाना आसान नहीं है।

जल बोर्ड खुद लगाएगा पानी का कनेक्शन : दूषित जलापूर्ति की शिकायतें दूर करने और जलापूर्ति की व्यवस्था में सुधार के लिए जल बोर्ड ने उपभोक्ताओं के घर पानी की पाइप लाइन जोड़ने और वाटर मीटर खुद लगाने की पहल की। इसलिए अब लोगों को निजी ठेकेदारों या प्लम्बर की मदद लेने की जरूरत नहीं होगी।

जलापूर्ति बढ़ाने की पहल : दिल्ली में करीब 1,140 एमजीडी पानी की जरूरत होती है। पिछले साल जल बोर्ड गर्मी के मौसम करीब 935 एमजीडी पानी की आपूर्ति कर रहा था। इस साल गर्मी में जलापूर्ति का आंकड़ा 945 एमजीडी से अधिक पहुंच गया, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इस साल जलापूर्ति औसतन पिछले साल से कम रही है। यमुना के नजदीक अत्याधुनिक कुआं बनाकर, ट्यूबवेल में आरओ सिस्टम लगाकर और बंद ट्यूबवेलों को शुरू कर जलापूर्ति बढ़ाने की पहल की गई।

वर्ष 2021 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) आवास तो ज्यादा मुहैया नहीं करा सका, लेकिन अनधिकृत कालोनियों में रहने वालों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक दिलवाने पर उसका पूरा जोर रहा। लैंड पूलिंग पालिसी के लिए भी एक बार फिर से पंजीकरण खोला गया।

सफल नहीं रही आवासीय योजना : जनवरी के पहले सप्ताह में डीडीए ने 1550 फ्लैटों की आवासीय योजना लांच की, लेकिन कुछ ही दिनों में करीब-करीब आधे फ्लैट आवंटियों ने वापस लौटा दिए। कहीं फ्लैटों का साइज छोटा होना, कहीं उसका रखरखाव ठीक न होना, कहीं सार्वजनिक परिवहन की सुविधा न होना, कहीं बिजली-पानी के कनेक्शन की समस्या और कहीं सुरक्षा व्यवस्था में झोल इसकी मुख्य समस्या रहा। ऐसे में डीडीए अब नई आवासीय योजना लांच करने जा रहा है। योजना के ब्रोशर (विवरणिका) के प्रारूप को अंतिम रूप दिया जा रहा है। किसी भी दिन यह योजना लांच की जा सकती है।

योजना में करीब 15,500 फ्लैट शामिल होंगे। फ्लैट एचआइजी, एमआइजी, एलआइजी एवं इब्ल्यूएस सभी श्रेणियों के होंगे। आवेदन करने के लिए लगभग दो माह का समय मिलेगा। उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में डीडीए बोर्ड की बैठक में इस योजना को पिछले माह ही स्वीकृति मिल चुकी है। योजना के सभी फ्लैट पूर्ववर्ती योजनाओं में लौटाए गए हैं जो द्वारका, नरेला, रोहिणी और जसोला में बने हुए हैं। हालांकि, बोर्ड बैठक में 15 हजार फ्लैटों का प्रस्ताव था, जबकि अब संख्या थोड़ी बढ़ गई है। इन फ्लैटों को जिन खामियों के कारण पूर्व में लौटाया गया था, उन्हें तो दुरुस्त कर ही दिया गया है, इनकी दरें भी पुरानी ही रखी जा रही हैं।

1731 अनधिकृत कालोनियों में मालिकाना हक के लिए डीडीए के पोर्टल पर 16 दिसंबर, 2019 से शुरू किया गया पंजीकरण धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है। डीडीए की ओर से 1,700 कालोनियों की चारदीवारी तय कर ली गई है और ज्यादातर कालोनियों के नक्शे भी पोर्टल अपलोड कर दिए गए हैं। डीडीए द्वारा इन कालोनियों में रहने वालों की मदद के लिए अधिक से अधिक सहायता केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है। मौजूदा समय में 25 से अधिक सहायता केंद्र कार्य कर रहे हैं, जहां लोग दस्तावेजों की जांच करवा सकते हैं। दस्तावेजों को पोर्टल पर अपलोड करने में समस्या आ रही हो तो इन केंद्रों पर मदद मिल सकती है। 17 दिसंबर तक 4,42,383 लोग पंजीकरण करा चुके थे। 3,35,157 आवेदनों में संपत्ति का जिओ सर्वे हो चुका है, जबकि 32,521 लोगों को कन्वेंस डीड भी जारी की जा चुकी है।

मालिकाना हक के लिए पंजीकरण पकड़ रहा जोर:  कोरोना संकट के दौर में लगाए गए प्रतिबंध के हटने के साथ ही वर्ष 2021 में बिजली की खपत में भी काफी बढ़ोतरी हुई। इस वर्ष गर्मी के मौसम में बिजली की मांग 7,323 मेगावाट के ऊपर पहुंच गई थी। अब सर्दी के मौसम में भी बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति करने के साथ ही बिजली वितरण कंपनियां सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही हैं। इमारतों की छत पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। बीएसईएस ने मालवीय नगर के शिवालिक में पहला सोलर माइक्रो ग्रिड शुरू किया है। आपात स्थिति में बिजली की आपूर्ति बाधित न हो, इस दिशा में भी काम चल रहा है। रानीबाग में देश का पहला ग्रिड कनेक्टेड कम्युनिटी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (सीईएसएस) की स्थापना की है। इससे आपात स्थिति में भी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

बीएसईएस

  • बीएसईएस ने 33 सौ मेगावाट हरित ऊर्जा खरीदने के लिए समझौता किया है। अगले दो वर्ष में इसके पास कुल बिजली का 52 प्रतिशत हिस्सा हरित ऊर्जा का होगा।
  • बीएसईएस ने सात पुराने विद्युत संयंत्रों से बिजली खरीदने से इन्कार कर दिया है। इससे उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
  •  जगह की कमी को देखते हुए घनी आबादी वाले क्षेत्र में डबल डेकर ट्रांसफार्मर और सब-स्टेशन बनाए जा रहे हैं। बीएसईएस ने इस तरह के दो सौ डबल डेकर ट्रांसफार्मर लगाने का फैसला किया है।

टीपीडीडीएल

  •  दिल्ली में ई-वाहन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ई-वाहनों की चार्जिग की समस्या हल करने के लिए टीपीडीडीएल ने आजादपुर क्षेत्र में पहला स्वैप प्वाइंट बनाया है।
  • औद्योगिक इकाइयों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए नरेला में 66/11केवी जीआइएस ग्रिड सब-स्टेशन शुरू किया गया है।
  • ’टीपीडीडीएल ने 24 मार्च को लाइनमैन दिवस मनाना शुरू किया है। देश में पहली बार कोई डिस्काम लाइनमैन दिवस मना रहा है।
  • टीपीडीडीएल नवीनीकरण ऊर्जा की अनिवार्यता पूरी करने वाली दिल्ली की पहली बिजली वितरण कंपनी बनी।
  •  उत्तरी दिल्ली में दो लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इससे उपभोक्ता बिजली खपत का बेहतर प्रबंधन कर सकेंगे।
  •  दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने लगातार दूसरे वर्ष बिजली की दरों में वृद्धि नहीं की है। साथ ही इस वर्ष भी स्थायी शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
  • दिल्ली की गिनती उन राज्यों में होने लगी है जहां बिजली की चोरी सबसे कम होती है। यहां बिजली की चोरी घटकर 7.5 प्रतिशत रह गई है।

पानी का बिल तैयार करने में कर्मियों की गड़बड़ी आई सामने

पानी का बिल तैयार करने में मीटर रीडर गड़बड़ी करते हैं। बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आने पर जल बोर्ड ने 30 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की। इसके तहत ठेके पर नियुक्त 20 कर्मचारी नौकरी से बर्खास्त कर दिए गए, वहीं जल बोर्ड के 10 कर्मचारी निलंबित किए गए।

यमुना में अमोनिया की बढ़ी मात्र से जलापूर्ति प्रभावित

13 अप्रैल को यमुना में अमोनिया की मात्र 7.36 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) पहुंच गया। जून के पहले सप्ताह में भी अमोनिया की मात्र बढ़ने से जलापूर्ति प्रभावित रही। जुलाई के दूसरे सप्ताह में यमुना में जल स्तर कम होने के कारण वजीराबाद, चंद्रावल और ओखला जलशोधन संयंत्रों से कई दिन तक 100 एमजीडी पानी आपूर्ति कम हुई थी।