27 सप्ताह के भ्रूण को गिराने की मांग, कोर्ट ने दिया मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश

 

जल्द से जल्द बोर्ड का गठन कर करें जांच, गर्भपात की संभावना पर पेश करें रिपोर्ट
महिला ने याचिका में कहा कि असामान्यताओं के के कारण भ्रूण के बचने की संभावना बहुत कम है। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने एम्स से कहा कि वह जल्द से जल्द बोर्ड का गठन करे ताकि महिला की जांच की जा सके।

नई दिल्ली, संवाददाता। असामान्यताओं से पीड़ित 25 सप्ताह के भ्रूण को गिराने का निर्देश देने की मांग काे लेकर एक महिला द्वारा दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को एक मेडिकल बोर्ड का गठन करने का निर्देश दिया है।

महिला ने याचिका में कहा कि असामान्यताओं के के कारण भ्रूण के बचने की संभावना बहुत कम है। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने एम्स से कहा कि वह जल्द से जल्द बोर्ड का गठन करे ताकि महिला की जांच की जा सके। पीठ ने गर्भपात की संभावना पर रिपोर्ट पेश करने का एम्स को निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई 27 दिसंबर को होगी।अधिवक्ता स्नेहा मुखर्जी और सुरभि शुक्ला के माध्यम से दायर याचिका में महिला ने मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम के तहत अदालत से अपनी गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति मांगी। याचिका में कहा गया है कि डाक्टरों ने महिला को सुझाव दिया है कि भ्रूण की स्थिति गंभीर है और बच्चे के जीवित रहने की संभावना 50 प्रतिशत से कम है। यह हृदय की खराबी के कारण जन्म के तुरंत बाद भी मर सकता है। इसने कहा कि एमटीपी अधिनियम के तहत 24 सप्ताह के अनुचित प्रतिबंध के परिणामस्वरूप महिला को अत्यधिक मानसिक और शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ा है।