देख सकेंगे लाल किला का 350 साल पुराना इतिहास, शाहजहां के लिए सुनाई देगी मुलाजिमों की ये आवाज

 

देख सकेंगे लाल किला का 350 साल पुराना इतिहास
बहुत जल्द लाल किला में 350 साल बाद शाहजहां के लिए फिर से मुलाजिमों की यह आवाज सुनाई देगी। दरअसल लाल किला में शुरू होने जा रहे लाइट एंड साउंड शो में शहंशाह शाहजहां से लेकर बहादुर शाह जफर तक का चित्रण भी दिखाया जाएगा।

नई दिल्ली । बा-अदब, बा-मुलाहिजा, होशियार, शहंशाह तशरीफ ला रहे हैं! बहुत जल्द लाल किला में 350 साल बाद शाहजहां के लिए फिर से मुलाजिमों की यह आवाज सुनाई देगी। दरअसल, लाल किला में शुरू होने जा रहे लाइट एंड साउंड शो में शहंशाह शाहजहां से लेकर बहादुर शाह जफर तक का चित्रण भी दिखाया जाएगा। यह आयोजन लाइव परफार्मेंस के तहत होगा, जिसमें करीब 50 कलाकार भाग लेंगे। यह पहली बार है जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के किसी स्मारक में लाइट एंड साउंड शो की लाइव परफार्मेंस होगी।

एक घंटे के इस कार्यक्रम में पूरा सीन ठीक उसी तरह दर्शाया जाएगा जिस तरह से मुगलिया शासन के दौर में वास्तव में होता था। इस लाइट एंड साउंड सिस्टम का फरवरी 2020 में ट्रायल हो चुका है, मगर कोरोना आ जाने के कारण आगे का काम रुक गया था। अब इसे जनवरी से शुरू किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि विजिटर सेंटर के जनवरी में शुरू हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद इस कार्यक्रम पर पूरा फोकस रहेगा। इसे 2022 के मध्य तक इसे तैयार कर लिया जाएगा।

योजना के तहत लाइट एंड साउंड शो तीन भागों में होगा। पहले भाग में नक्कारखाना या नौबतखाना पर पर्यटक एकत्रित होंगे। यहां कुछ मिनट के लिए आयोजन होगा। इसके बाद दीवान-ए-आम और फिर दीवान-ए-खास में यह आयोजन होगा। करीब एक घंटे का यह आयोजन पहले हिंदी में होगा, जबकि इसके बाद दूसरे भाग में अंग्रेजी में होगा।

राष्ट्रवाद को समर्पित होगा आयोजन

लाल किला के इतिहास के कई पहलू हैं, जिसमें इसे प्रमुख रूप से 1857 की क्रांति और सुभाष चंद्र का नारा ‘दिल्ली चलो’ के नाम से प्रमुख रूप से जाना जाता है। यहां सुभाष चंद्र बोस की सेना के प्रमुख अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया। गद्दी के लिए किस तरह क्रांति हुई, देश को ब्रिटिश कंपनी के हाथों जाने से बचाने के लिए वीर सिपाहियों ने किस तरह जान की कुर्बानियां दीं, आन-बान और शान बचाने के लिए देशभक्तों ने किस तरह जान की बाजी लगा दी, यह सब कार्यक्रम में शामिल होगा। लाइट एंड साउंड में शाहजहां के साथ साथ दाराशिकोह का भी दौर दिखेगा, वहीं अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के समय के दृश्य भी दिखाई देंगे। किस तरह उन्हें कैद कर लिया गया।

मुगल शासन के आखरी शहंशाह को रुखसत होते समय यह कहना पड़ा, ‘कितना है बदनसीब जफर दफन के लिए, दो गज जमीन भी न मिली कू-ए-यार में।’ यह सब अगले वर्ष जून तक लाल किला में सूर्यास्त के बाद लाइट एंड साउंड शो में देखने को मिलेगा। आयोजकों की कोशिश है कि यह आयोजन राष्ट्रवाद हो समर्पित रहे।