हरियाणा में पिछड़े वर्ग के आरक्षण नियम में बड़ा बदलाव, अब इन श्रेणी के लोगों को नहीं मिलेगा रिजर्वेशन

 

हरियाणा सरकार ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण नियम में किया बड़ा बदलाव। सांकेतिक फोटो
हरियाणा सरकार ने पिछड़ा वर्ग के आरक्षण नियम में बड़ा बदलाव किया है। राज्य में अब साधन संपन्न पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। इसके लिए सरकार ने श्रेणियां तय कर दी हैं ।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए सरकारी नौकरी व शिक्षा संस्थानों में दाखिलों के लिए मिलने वाले आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के अनुसार संवैधानिक अथवा उनके समकक्ष पदों पर काम करने वाले पिछड़े वर्ग के लोगों के बच्चों को इस आरक्षण के दायरे से बाहर कर दिया गया है। किसी सांसद, मंत्री अथवा विधायक के पुत्र या पुत्री को भी पिछड़ा वर्ग के लिए मिलने वाले आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाएगा।

हरियाणा सरकार के अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग कल्याण विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना आरक्षण अधिनियम 2016 में संशोधन करते हुए जारी की गई, ताकि पिछड़े वर्ग से नवोन्नत व्यक्तियों को आरक्षण के लाभ के दायरे से अलग कर दिया जाए। हरियाणा सरकार की सोच यह भी है कि ऐसा करने से पहले से साधन संपन्न लोग सरकार की इस सुविधा का लाभ नहीं लेंगे और उनके स्थान पर पिछड़े वर्ग के वास्तविक जरूरतमंद लोगों को सरकार की आरक्षण व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा। इस श्रेणी में सरकार की ओर से 27 फीसद आरक्षण का लाभ दिया जाता है।

हरियाणा सरकार ने क्रीमीलेयर में वार्षिक आय सीमा आठ लाख से घटाकर छह लाख रुपये भी की है। यह परिवर्तन पिछड़ा वर्ग के लिए किया गया है। छह लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय होने पर पिछड़ा वर्ग को हरियाणा में आरक्षण नहीं मिलेगा। राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार किसी परिवार, जिनके स्वामित्व में हरियाणा भूमि-जोत की अधिकतम सीमा अधिनियम 1972 की धारा 26 के अधीन अनुज्ञेय भूमि से अधिक भूमि का स्वामित्व है, उनके बच्चों को भी आरक्षण सुविधा का लाभ नहीं दिया जाएगा। जिन परिवारों की सभी स्रोतों से छह लाख रुपये या उससे अधिक की सकल वार्षिक आय है अथवा अधिकतम तीन निरंतर वर्षों की अवधि के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक की संपदा है, उनके बच्चों को भी आरक्षण के लाभ के दायरे से बाहर कर दिया गया है।

हरियाणा सरकार की ओर से सभी प्रशासनिक अधिकारियों को अपने इस फैसले की जानकारी भेज दी गई है। अधिसूचना के अनुसार संवैधानिक पदों पर नियुक्त व्यक्ति जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, संघ लोक सेवा आयोग और राज्यों के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य, भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक तथा इसी तरह के अन्य संवैधानिक पदों को धारण करने वाले व्यक्तियों के पुत्र व पुत्रियां आरक्षण का लाभ नहीं ले सकेंगे।

अखिल भारतीय, केंद्रीय तथा राज्य सेवाओं के वर्ग एक और वर्ग दो के अधिकारियों के पुत्र व पुत्रियों, जिनके माता-पिता में से एक या दोनों इन श्रेणियों में सेवारत हैं तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों जैसे बैंकों, बीमा संगठनों में समकक्ष या समतुल्य पदों पर काम करने वाले अधिकारी हैं, उनके पुत्र व पुत्रियों को भी आरक्षण के लाभ से वंचित रखा जाएगा। इसके अलावा, सशस्त्र बलों तथा अर्ध सैनिक बलों में (सिविल पदों को धारण करने वाले अधिकारी शामिल नहीं हैं) माता-पिता में से एक या दोनों सेना में मेजर या उससे उच्च पद पर या जल सेना या वायु सेना या अर्ध सैनिक बलों में समकक्ष पद पर हैं, उनके पुत्र या पुत्रियों को भी आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।

हरियाणा सरकार ने नए सिरे से तय किया क्रीमीलेयर

सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2021 को प्रदेश सरकार की तरफ से क्रीमीलेयर को लेकर 17 अगस्त 2016 और 28 अगस्त 2018 को जारी अधिसूचनाओं को निरस्त कर दिया था। इंद्रा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और हरियाणा पिछड़ा वर्ग आरक्षण अधिनियम के प्रविधानों के अनुसार तीन महीने के अंदर नई अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने नए सिरे से क्रीमीलेयर तय किया है। केंद्र सरकार ने आठ लाख रुपये से कम वार्षिक आय वालों को आर्थिक रूप से कमजोर की श्रेणी में रखा है, जबकि हरियाणा ने यह सीमा छह लाख रुपये तय की है। सभी स्रोतों से प्राप्त आय को सकल वार्षिक आय की गणना करने के लिए जोड़ा जाएगा।